-आजीवन सदस्यता शुल्क -1100.rs,जिसकी आजीवन सम्पूर्ण जानकारी सेवा सदन के पास होगी ।। --सदस्यता शुल्क आजीवन {11.00- सौ रूपये केवल । --कन्हैयालाल शास्त्री मेरठ ।-खाता संख्या 20005973259-स्टेट बैंक {भारत }Lifetime membership fee is only five hundred {11.00}. - Kanhaiyalal Meerut Shastri. - Account Number 20005973259 - State Bank {India} Help line-09897701636 +09358885616
ज्योतिष सेवा सदन "झा शास्त्री "{मेरठ उत्तर प्रदेश }
निःशुल्क ज्योतिष सेवा ऑनलाइन रात्रि ८ से९ जीमेल पर [पर्तिदिन ]
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jyotish seva sdan Nivedak "jha shastri": "जिनका अपमान हो समझो ,सम्मान मिलने वाला है ?" : "'जिनका अपमान हो समझो ...
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"होलिका दहन कब करें ? {मतों को जानें } इस वर्ष फाल्गुनी पूर्णिमा ८ मार्च 2012 गुरूवार दिन में ३ बजकर ९ मिनट तक रहेगी, अर्थात नि...
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--नक्षत्र २७ हैं ,सभी जानते हैं ,किन्तु सभी नक्षत्रों की संज्ञा एवं उन नक्षत्रों में हम कोन सा कार्ज करें --शास्त्रकारों के विचार को जा...
शुक्रवार, 8 जून 2012
ज्योतिष सेवा सदन "झा शास्त्री "{1}: "Have a nice day,Ram Ram,Namskar"
ज्योतिष सेवा सदन "झा शास्त्री "{1}: "Have a nice day,Ram Ram,Namskar": "Life is oneway road,We can see back,, But can't go back,,So,Enjoy every second... Because today's newspaper will be tomorrow...
प्रस्तुतकर्ता
ज्योतिष सेवा सदन { पंडित कन्हैयालाल झा शास्त्री "}{मेरठ }
पर
शुक्रवार, जून 08, 2012
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"Have a nice day,Ram Ram,Namskar"
"Life is oneway road,We can see back,,
But can't go back,,So,Enjoy every second...
Because today's newspaper will be tomorrow's waste paper..!!
By-"jha shastri" jyotish seva sadan-{Meerut-UP}
"Have a nice day,Ram Ram,Namskar"
free jyotish seva-8to9 pm all friends {once}
cont---09897701636,09358885616--|
But can't go back,,So,Enjoy every second...
Because today's newspaper will be tomorrow's waste paper..!!
By-"jha shastri" jyotish seva sadan-{Meerut-UP}
"Have a nice day,Ram Ram,Namskar"
free jyotish seva-8to9 pm all friends {once}
cont---09897701636,09358885616--|
प्रस्तुतकर्ता
ज्योतिष सेवा सदन { पंडित कन्हैयालाल झा शास्त्री "}{मेरठ }
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शुक्रवार, जून 08, 2012
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बुधवार, 6 जून 2012
"देश-विदेश पाक्षिक ज्योतिष विचार -5-जून-से १९-जून २०१२ तक ?" ----अतिचारी गते जीवे शनौ वक्रत्व भागते | हा! हा !!, भूतं जगत्सर्वं रुण्ड मुंडा च मेदिनी || -----भाव -गुरु अतिचारी एवं शनि वक्री नव पंचम योग में अति नष्ट है -{-अर्थात उत्तम नहीं है } | इस योग के कारण- मास पर्यंत विश्व के किन्हीं देशों में -रुण्ड -मुंड लुढ़कते नजर आयेंगें -अर्थात -आततायी लोग परास्त होंगें | पश्चिम के देशों में तनाव बढेगा |नेपाल ,चीन ,मंगोलिया ,पाकिस्तान ,अफगानिस्तान ,ईरान ,इराक एवं साउदीअरब में भारी हलचल होगी | यूरोपियन देश एशिया के देशों पर दबाब बनाने का प्रयास करेंगें | सीमाओं पर तनाव बढेगा |भारतीय राजनीति में उठा -पटक जारी रहेगी |चुनावी सरगर्मी बढ़ेगी |मंदिर ,मस्जिद ,गुरुद्वारा -धार्मिक विवाद लडाई के केंद्र में रहेगा |-- "एक रशो यदा यन्ति चत्वारः पंचखेचराः | प्लाव्यन्ति महीं सर्वा रुधिरेण जलें वा || ---भाव जब एक राशि में चार ग्रह होते हैं -तो पृथ्वी जल से या रक्त से रंजित हो जाती है अर्थात शांतिवार्ता ---निष्फल हो सकती है || तेजी मंदी -समय उत्तम होने के कारण -बाजार का रुख नरम रहेगा ----सोना ,चांदी ,मशीनरी ,वाहन ,पेयपदार्थ, फल फूल ,सब्जियों के भावों में बढ़ोत्तरी होगी | शेयर शर्राफामें दोतरफा चाल होगी || आकाश लक्षण -शुक्रोदय के प्रवाव -से आंधी- तूफान ,मेघाडंबर के साथ -साथ बूंदा -बूंदी होगी | तापमान वृद्धि के कारण लोग पीड़ित होंगें | सौर धब्बों का प्रकोप विश्व में भारी क्षति का लक्षण होता है || सदा याद रखें ---"अमंत्रामक्षरं नास्ति मूलं अनौषधम | अयोग्यः पुरुषाः नास्ति योजकः तत्र दुर्लभाः {राजधानी } भाव -संसार में कोई भी वस्तु निरर्थक नहीं है || भवदीय निवेदक --पंडित कन्हैयालाल झा शास्त्री {मेरठ उत्तर प्रदेश }
"देश-विदेश पाक्षिक ज्योतिष विचार -5-जून-से १९-जून २०१२ तक ?"
----अतिचारी गते जीवे शनौ वक्रत्व भागते | हा! हा !!,
भूतं जगत्सर्वं रुण्ड मुंडा च मेदिनी ||
-----भाव -गुरु अतिचारी एवं शनि वक्री नव पंचम योग में अति नष्ट है -{-अर्थात उत्तम नहीं है } | इस योग के कारण- मास पर्यंत विश्व के किन्हीं देशों में -रुण्ड -मुंड लुढ़कते नजर आयेंगें -अर्थात -आततायी लोग परास्त होंगें | पश्चिम के देशों में तनाव बढेगा |नेपाल ,चीन ,मंगोलिया ,पाकिस्तान ,अफगानिस्तान ,ईरान ,इराक एवं साउदीअरब में भारी हलचल होगी | यूरोपियन देश एशिया के देशों पर दबाब बनाने का प्रयास करेंगें | सीमाओं पर तनाव बढेगा |भारतीय राजनीति में उठा -पटक जारी रहेगी |चुनावी सरगर्मी बढ़ेगी |मंदिर ,मस्जिद ,गुरुद्वारा -धार्मिक विवाद लडाई के केंद्र में रहेगा |--
"एक रशो यदा यन्ति चत्वारः पंचखेचराः |
प्लाव्यन्ति महीं सर्वा रुधिरेण जलें वा ||
---भाव जब एक राशि में चार ग्रह होते हैं -तो पृथ्वी जल से या रक्त से रंजित हो जाती है अर्थात शांतिवार्ता ---निष्फल हो सकती है ||
तेजी मंदी -समय उत्तम होने के कारण -बाजार का रुख नरम रहेगा ----सोना ,चांदी ,मशीनरी ,वाहन ,पेयपदार्थ, फल फूल ,सब्जियों के भावों में बढ़ोत्तरी होगी | शेयर शर्राफामें दोतरफा चाल होगी ||
आकाश लक्षण -शुक्रोदय के प्रवाव -से आंधी- तूफान ,मेघाडंबर के साथ -साथ बूंदा -बूंदी होगी | तापमान वृद्धि के कारण लोग पीड़ित होंगें | सौर धब्बों का प्रकोप विश्व में भारी क्षति का लक्षण होता है ||
सदा याद रखें ---"अमंत्रामक्षरं नास्ति मूलं अनौषधम |
अयोग्यः पुरुषाः नास्ति योजकः तत्र दुर्लभाः {राजधानी }
भाव -संसार में कोई भी वस्तु निरर्थक नहीं है ||
भवदीय निवेदक --पंडित कन्हैयालाल झा शास्त्री {मेरठ उत्तर प्रदेश }
----अतिचारी गते जीवे शनौ वक्रत्व भागते | हा! हा !!,
भूतं जगत्सर्वं रुण्ड मुंडा च मेदिनी ||
-----भाव -गुरु अतिचारी एवं शनि वक्री नव पंचम योग में अति नष्ट है -{-अर्थात उत्तम नहीं है } | इस योग के कारण- मास पर्यंत विश्व के किन्हीं देशों में -रुण्ड -मुंड लुढ़कते नजर आयेंगें -अर्थात -आततायी लोग परास्त होंगें | पश्चिम के देशों में तनाव बढेगा |नेपाल ,चीन ,मंगोलिया ,पाकिस्तान ,अफगानिस्तान ,ईरान ,इराक एवं साउदीअरब में भारी हलचल होगी | यूरोपियन देश एशिया के देशों पर दबाब बनाने का प्रयास करेंगें | सीमाओं पर तनाव बढेगा |भारतीय राजनीति में उठा -पटक जारी रहेगी |चुनावी सरगर्मी बढ़ेगी |मंदिर ,मस्जिद ,गुरुद्वारा -धार्मिक विवाद लडाई के केंद्र में रहेगा |--
"एक रशो यदा यन्ति चत्वारः पंचखेचराः |
प्लाव्यन्ति महीं सर्वा रुधिरेण जलें वा ||
---भाव जब एक राशि में चार ग्रह होते हैं -तो पृथ्वी जल से या रक्त से रंजित हो जाती है अर्थात शांतिवार्ता ---निष्फल हो सकती है ||
तेजी मंदी -समय उत्तम होने के कारण -बाजार का रुख नरम रहेगा ----सोना ,चांदी ,मशीनरी ,वाहन ,पेयपदार्थ, फल फूल ,सब्जियों के भावों में बढ़ोत्तरी होगी | शेयर शर्राफामें दोतरफा चाल होगी ||
आकाश लक्षण -शुक्रोदय के प्रवाव -से आंधी- तूफान ,मेघाडंबर के साथ -साथ बूंदा -बूंदी होगी | तापमान वृद्धि के कारण लोग पीड़ित होंगें | सौर धब्बों का प्रकोप विश्व में भारी क्षति का लक्षण होता है ||
सदा याद रखें ---"अमंत्रामक्षरं नास्ति मूलं अनौषधम |
अयोग्यः पुरुषाः नास्ति योजकः तत्र दुर्लभाः {राजधानी }
भाव -संसार में कोई भी वस्तु निरर्थक नहीं है ||
भवदीय निवेदक --पंडित कन्हैयालाल झा शास्त्री {मेरठ उत्तर प्रदेश }
प्रस्तुतकर्ता
ज्योतिष सेवा सदन { पंडित कन्हैयालाल झा शास्त्री "}{मेरठ }
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बुधवार, जून 06, 2012
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सोमवार, 4 जून 2012
ज्योतिष सेवा सदन "झा शास्त्री "{1}: "आज अल्पग्रास" चन्द्र ग्रहण" भारत में कहीं से भी न...
ज्योतिष सेवा सदन "झा शास्त्री "{1}: "आज अल्पग्रास" चन्द्र ग्रहण" भारत में कहीं से भी न...: "आज अल्पग्रास" चन्द्र ग्रहण" भारत में कहीं से भी नहीं दिखाई देगा ?" दिनांक -४-०६-२०१२ सोमवार को दिन में अल्पग्रास चन्द्र ग्रहण भारत से ब...
प्रस्तुतकर्ता
ज्योतिष सेवा सदन { पंडित कन्हैयालाल झा शास्त्री "}{मेरठ }
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सोमवार, जून 04, 2012
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"आज अल्पग्रास" चन्द्र ग्रहण" भारत में कहीं से भी नहीं दिखाई देगा ?"
"आज अल्पग्रास" चन्द्र ग्रहण" भारत में कहीं से भी नहीं दिखाई देगा ?"
दिनांक -४-०६-२०१२ सोमवार को दिन में अल्पग्रास चन्द्र ग्रहण भारत से बाह्य पूर्व के देशों में होगा | भारतीय स्टें ० टा. के अनुसार ग्रहण दिन में ३ बजकर २९ मिनट से शुरू होकर सायं ५ बजकर ३७ मिनट तक रहेगा |इस ग्रहण को -म्यानमार,थाईलेंड ,जापान ,आष्ट्रेलिया ,चीन ,पूर्वी रूस ,मलेशिया ,फिलीपींस,इंडोनेशिया ,उत्तर -दक्षिण अमेरिका ,मैक्सिको ,पेरू ,अर्जेंटीना ,आदि देशों में देखा जा सकेगा |
----भारत में ग्रहण कहीं से भी दिखाई नहीं देगा --देश के पूर्वी भाग असं ,मिजोरम ,मेघालय ,अरुणाचल प्रदेश - आदि में चंद्रमा विरल छ्या में से होकर गुजरेगा ,जिसे वास्तव में ग्रहण नहीं माना जायेगा |
भवदीय -पंडित कन्हैयालाल झा शास्त्री {मेरठ उत्तर प्रदेश }
दिनांक -४-०६-२०१२ सोमवार को दिन में अल्पग्रास चन्द्र ग्रहण भारत से बाह्य पूर्व के देशों में होगा | भारतीय स्टें ० टा. के अनुसार ग्रहण दिन में ३ बजकर २९ मिनट से शुरू होकर सायं ५ बजकर ३७ मिनट तक रहेगा |इस ग्रहण को -म्यानमार,थाईलेंड ,जापान ,आष्ट्रेलिया ,चीन ,पूर्वी रूस ,मलेशिया ,फिलीपींस,इंडोनेशिया ,उत्तर -दक्षिण अमेरिका ,मैक्सिको ,पेरू ,अर्जेंटीना ,आदि देशों में देखा जा सकेगा |
----भारत में ग्रहण कहीं से भी दिखाई नहीं देगा --देश के पूर्वी भाग असं ,मिजोरम ,मेघालय ,अरुणाचल प्रदेश - आदि में चंद्रमा विरल छ्या में से होकर गुजरेगा ,जिसे वास्तव में ग्रहण नहीं माना जायेगा |
भवदीय -पंडित कन्हैयालाल झा शास्त्री {मेरठ उत्तर प्रदेश }
प्रस्तुतकर्ता
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सोमवार, जून 04, 2012
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रविवार, 3 जून 2012
"शिखा के बिना आयु ,तेज ,बल ,ओज और पुरुषार्थ नष्ट हो जाते हैं ?"
"शिखा के बिना आयु ,तेज ,बल ,ओज और पुरुषार्थ नष्ट हो जाते हैं ?"
-हिन्दुओं के प्रमुख सोलह संस्कारों में "चूडाकरण"या "चौल "एक विशेष संस्कार है |इसी संस्कार में आर्यजाति के प्रतीक अथवा मुख्य जातीय चिन्ह स्वरूप "शिखा धारण का विधान है | इसके धारण से आयु ,तेज ,बल ,ओज और पुरुषार्थ की प्राप्ति होती है | पारस्कर ,आश्वलायन,बैखानस ,बौधायन ,अग्निवेश्य ,आपस्तम्ब और जैमिनीय आदि गुह्य -सूत्र ग्रंथों में चुदकर्म के अंतर्गत शिखा रखने का श्पष्ट विधान मिलता है ||
---सिर के मध्य स्थित केश समूह ही चूड़ा कहलाता है | यही चूड़ा प्रधान शिखा मानी जाति है | वशिष्ठ गोत्र वाले मध्य शिखा से दक्षिण भाग में स्थित केश शिखा को चूड़ा कहते हैं | अत्रि और कश्यप गोत्र वाले मध्यभाग में स्थित शिखा के उभय पार्श्व {अगल -बगल }में स्थित केशों को शिखा कहते हैं ||
--उपनयन काल में मध्य शिखा के अतिरिक्त अन्य गौण शिखाओं के वपन का विधान "निर्णय सिन्धु " में स्पष्ट रूप से पाया जाता है | महर्षि "हारित" कहते हैं --कि जो लोग मोह ,द्वेष या अज्ञानता से शिखा काट देते हैं ,वे "तप्तकश्छ"व्रत करने से शुद्ध होते हैं ||
--ब्रह्मण ,क्षत्रिय ,वैश्य को शिखा,सूत्र और हिन्दुमात्र को शिखा अवश्य धारण करनी चाहिए | बिना यज्ञोपवित और शिखा के हिन्दुओं का किया गया सभी सत्कार्य व्यर्थ हो जाता है और राक्षस कर्म कहलाता है ||
----शिखा के साथ बल ,बीर्य,आयुवृद्धि ,तेज और पराक्रम का गहरा सम्बन्ध है | इसलिए हिन्दुओं का यह सर्वोत्कृष्ट जातीय चिन्ह माना जाता है | जिस प्रकार फौजी सिपाहियों का फौजी वेश वीरता सूचक है | उसी प्रकार सिर के मध्य भाग में सुरक्षित सुस्थिर शिखा चिरंतन ,आर्य गौरव तथा हिंदुत्व की द्योतक है |इसलिए शिखा रखना नितांत आवश्यक है ||
------वेदं और योगदर्शन के सिद्धांतों के अनुसार शिखा का अधः स्थित भाग ब्रह्मरंध्र माना गया है | इस ब्रह्मरंध्र के ऊपर सहश्रदल कमल में अमृत रुपी ब्रह्मा का स्थान है |विधिपूर्वक किये गए वेदादि के स्वाध्याय और सविधि कर्मानुष्ठान से समुत्पन्न अमृतत्व का अतिक्रांत वायुवेग से सहश्रदल की कर्णिका से प्रविष्ट होता है ||
धर्मशास्त्रकारों ने कहा है -कि सनन ,दान ,जप ,होम ,संध्या ,स्वाध्याय और देवार्चन करते समय शिखा में ग्रंथि अवश्य लगानी चाहिए-------"स्नाने दाने जपे होमे संधयायाम देवतार्चने |
शिखा ग्रंथि सदा कुर्यादीत्येतन मनुरब्रबीत||
-----वैदिक विज्ञानं से यह बात सिद्ध है कि सर्वव्यापी परमेश्वर परमात्मा की अप्रमेय शक्ति को आकृष्ट करने का सर्वोतम साधन "शिखा -धारण "है | भवदीय -पंडित कन्हैयालाल झा शास्त्री |
{ मेरठ उत्तर प्रदेश }
-हिन्दुओं के प्रमुख सोलह संस्कारों में "चूडाकरण"या "चौल "एक विशेष संस्कार है |इसी संस्कार में आर्यजाति के प्रतीक अथवा मुख्य जातीय चिन्ह स्वरूप "शिखा धारण का विधान है | इसके धारण से आयु ,तेज ,बल ,ओज और पुरुषार्थ की प्राप्ति होती है | पारस्कर ,आश्वलायन,बैखानस ,बौधायन ,अग्निवेश्य ,आपस्तम्ब और जैमिनीय आदि गुह्य -सूत्र ग्रंथों में चुदकर्म के अंतर्गत शिखा रखने का श्पष्ट विधान मिलता है ||
---सिर के मध्य स्थित केश समूह ही चूड़ा कहलाता है | यही चूड़ा प्रधान शिखा मानी जाति है | वशिष्ठ गोत्र वाले मध्य शिखा से दक्षिण भाग में स्थित केश शिखा को चूड़ा कहते हैं | अत्रि और कश्यप गोत्र वाले मध्यभाग में स्थित शिखा के उभय पार्श्व {अगल -बगल }में स्थित केशों को शिखा कहते हैं ||
--उपनयन काल में मध्य शिखा के अतिरिक्त अन्य गौण शिखाओं के वपन का विधान "निर्णय सिन्धु " में स्पष्ट रूप से पाया जाता है | महर्षि "हारित" कहते हैं --कि जो लोग मोह ,द्वेष या अज्ञानता से शिखा काट देते हैं ,वे "तप्तकश्छ"व्रत करने से शुद्ध होते हैं ||
--ब्रह्मण ,क्षत्रिय ,वैश्य को शिखा,सूत्र और हिन्दुमात्र को शिखा अवश्य धारण करनी चाहिए | बिना यज्ञोपवित और शिखा के हिन्दुओं का किया गया सभी सत्कार्य व्यर्थ हो जाता है और राक्षस कर्म कहलाता है ||
----शिखा के साथ बल ,बीर्य,आयुवृद्धि ,तेज और पराक्रम का गहरा सम्बन्ध है | इसलिए हिन्दुओं का यह सर्वोत्कृष्ट जातीय चिन्ह माना जाता है | जिस प्रकार फौजी सिपाहियों का फौजी वेश वीरता सूचक है | उसी प्रकार सिर के मध्य भाग में सुरक्षित सुस्थिर शिखा चिरंतन ,आर्य गौरव तथा हिंदुत्व की द्योतक है |इसलिए शिखा रखना नितांत आवश्यक है ||
------वेदं और योगदर्शन के सिद्धांतों के अनुसार शिखा का अधः स्थित भाग ब्रह्मरंध्र माना गया है | इस ब्रह्मरंध्र के ऊपर सहश्रदल कमल में अमृत रुपी ब्रह्मा का स्थान है |विधिपूर्वक किये गए वेदादि के स्वाध्याय और सविधि कर्मानुष्ठान से समुत्पन्न अमृतत्व का अतिक्रांत वायुवेग से सहश्रदल की कर्णिका से प्रविष्ट होता है ||
धर्मशास्त्रकारों ने कहा है -कि सनन ,दान ,जप ,होम ,संध्या ,स्वाध्याय और देवार्चन करते समय शिखा में ग्रंथि अवश्य लगानी चाहिए-------"स्नाने दाने जपे होमे संधयायाम देवतार्चने |
शिखा ग्रंथि सदा कुर्यादीत्येतन मनुरब्रबीत||
-----वैदिक विज्ञानं से यह बात सिद्ध है कि सर्वव्यापी परमेश्वर परमात्मा की अप्रमेय शक्ति को आकृष्ट करने का सर्वोतम साधन "शिखा -धारण "है | भवदीय -पंडित कन्हैयालाल झा शास्त्री |
{ मेरठ उत्तर प्रदेश }
प्रस्तुतकर्ता
ज्योतिष सेवा सदन { पंडित कन्हैयालाल झा शास्त्री "}{मेरठ }
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रविवार, जून 03, 2012
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ज्योतिष सेवा सदन "झा शास्त्री "{1}: "कैरियर निर्माण हेतु -कुंडली का निरिक्षण अवश्य करे...
ज्योतिष सेवा सदन "झा शास्त्री "{1}: "कैरियर निर्माण हेतु -कुंडली का निरिक्षण अवश्य करे...: "कैरियर निर्माण हेतु -कुंडली का निरिक्षण अवश्य करें ?" प्राचीन कल में शिक्षा का मुख्य उद्देश्य ज्ञान प्राप्ति होता था |विद्यार्थी किसी ...
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रविवार, जून 03, 2012
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"कैरियर निर्माण हेतु -कुंडली का निरिक्षण अवश्य करें ?"
"कैरियर निर्माण हेतु -कुंडली का निरिक्षण अवश्य करें ?"
प्राचीन कल में शिक्षा का मुख्य उद्देश्य ज्ञान प्राप्ति होता था |विद्यार्थी किसी योग्य विद्वान के निर्देशन में विभिन्न प्रकार की शिक्षा ग्रहण करते थे |इसके अतिरिक्त उसे शस्त्र सञ्चालन एवं विभिन्न कलाओं का प्रशिक्षण भी दिया जाता था |किन्तु वर्तमान समय में यह सभी प्रशिक्षण गौण हो गए हैं |शिक्षा की महत्ता बढ़ने व् प्रतिस्पर्धात्मक युग में सजग रहते हुए बालक के बोलने व् समझने लगते ही माता -पिता शिक्षा के बारे में चिंतित हो जाते हैं |कुछ वर्षों बाद सबसे बड़ी समस्या यही होती है कि कौन सा विषय पढ़ायें ,जिससे उनके बच्चे का भविष्य सुखमय हो ?
----{१}-सर्वप्रथम जातक के बचपन से ही उसकी कुंडली विषय की पढाई व् कैरियर चयन में सहायक होती है |
---{२}जातक की कुंडली से तय करना चाहिए कि वह नौकरी करेगा या व्यवसाय |
---{३}-जातक कि २० से ४० वर्ष की उम्र के बिच की ग्रहदशा का सूक्षम अध्ययन कर यह देखना चाहिए कि दशा किस प्रकार के कार्यक्षेत्र का संकेत दे रही है |
----{४}-आगामी गोचर या दशा कार्य क्षेत्र में तरक्की का संकेत दे रही है या नहीं ? इसका भी परीक्षण कर लेना चाहिए |
कुंडली में शिक्षा का योग -----जन्म कुंडली का नवम भाव धर्म त्रिकोण स्थान है ,जिसके स्वामी देव गुरु वृहस्पति हैं | यह भाव शिक्षा में महत्वाकांक्षा व् उच्च शिक्षा तथा उच्च शिक्षा किस स्टार कि होगी इसको दर्शाती है | यदि इसका सम्बन्ध पंचम से हो जाये तो अच्छी शिक्षा मिलती है ||
----शिक्षा का स्तर------जन्मकुंडली का पंचम भाव बुद्धि ,ज्ञान ,कल्पना ,अतीन्द्रिय ज्ञान,रचनात्मक कार्य ,याददास्त व् पूर्वजन्म के संचित कर्म को दर्शाता है | यह शिक्षा के संकाय का स्तर तय करता है ||
-----शिक्षा किस प्रकार की होगी --------जन्मकुंडली का चतुर्थभाव मन का भाव है |यह इस बात का निर्धारण करता है कि आपकी मानसिक योग्यता किस प्रकार की शिक्षा में होगी |जब भी चतुर्थ भाव का स्वामी छठे ,आठवें या बारहवें भाव में गया हो या नीच राशि,अस्त राशि ,शत्रु राशि में बैठा हो व् करक ग्रह {चंद्रमा } पीड़ित हो तो शिक्षा में मन नहीं लगता है ||
-----शिक्षा का उपयोग -----जन्मकुंडली का द्वितीय भाव -वाणी ,धन ,संचय ,व्यक्ति की मानसिक स्थिति को व्यक्त करता है तथा यह दर्शाता है कि शिक्षा आपने ग्रहण कि है वह आपके लिए उपयोगी है या नहीं |यदि इस भाव पर पाप ग्रह का प्रभाव हो तो जातक शिक्षा का उपयोग नहीं करता है |
जातक को बचपन से किस विषय की पढाई करवानी चाहिए ,इस हेतु हम मूलतः निम्न चार पाठ्यक्रम{ विषय } को ले सकते हैं --गणित ,जिव विज्ञानं ,कला और वाणिज्य -----
{१}-गणित ---गणित के करक ग्रह बुध का सम्बन्ध यदि जातक के लग्न ,लग्नेश या लग्न नक्षत्र से होता है तो वह गणित में सफल होता है ||
{२}-शनि एवं मंगल किसी भी प्रकार से सम्बन्ध बनायें तो जातक -मशीनरी कार्य में दशा होता है ||
---जीव विज्ञानं -सूर्य का जल राशिस्थ होना ,छठे एवं दशम भाव /भावेश के बीच सम्बन्ध ,सूर्य एवं मंगल का सम्बन्ध आदि चिकित्सा क्षेत्र में पढाई के करक होते हैं
---कला ------पंचम /पंचमेश एवं करक गुरु ग्रह का पीड़ित होना कला के क्षेत्र में पढाई का करक होता है | इन पर शुभ ग्रहों की दृष्टि पढाई प[उरी करवाने में सक्षम होती है ||
--वाणिज्य --लग्न /लग्नेश का सम्बन्ध बुध के साथ -साथ गुरु से भी हो तो जातक वाणिज्य की पढाई सफलता पूर्वक करता है ||
आइये जानते हैं अच्छी शिक्षा के योग -----
{१}-द्वितीयेश या वृहस्पति केंद्र या त्रिकोण में हों |
{२}-पंचम भाव में बुध की स्थिति अथवा दृष्टि या बृहस्पति और शुक्र की युति हो |
{३}-पंचमेश की पंचम भाव में वृहस्पति या शुक्र के साथ युति हो ?
{४}-बृहस्पति ,शुक्र और बुध में से कोई भी केंद्र या त्रिकोण में हो ?
---नोट - शिक्षा की सलाह अपने -अपने पुरोहित जी आचार्यजी से लें और अपनी -अपनी संतानों को शिक्षा की सही राह दिखाएं ||
भवदीय निवेदक -पंडित कन्हैयालाल झा शास्त्री {मेरठ -उत्तर प्रदेश }
निःशुल्क ज्योतिष सेवा एकबार ही सभी मित्रों को संपर्क सूत्र द्वारा ही मिल पायेगी -रात्रि -8 से 9 .३० में =09897701636 ,09358885616
प्राचीन कल में शिक्षा का मुख्य उद्देश्य ज्ञान प्राप्ति होता था |विद्यार्थी किसी योग्य विद्वान के निर्देशन में विभिन्न प्रकार की शिक्षा ग्रहण करते थे |इसके अतिरिक्त उसे शस्त्र सञ्चालन एवं विभिन्न कलाओं का प्रशिक्षण भी दिया जाता था |किन्तु वर्तमान समय में यह सभी प्रशिक्षण गौण हो गए हैं |शिक्षा की महत्ता बढ़ने व् प्रतिस्पर्धात्मक युग में सजग रहते हुए बालक के बोलने व् समझने लगते ही माता -पिता शिक्षा के बारे में चिंतित हो जाते हैं |कुछ वर्षों बाद सबसे बड़ी समस्या यही होती है कि कौन सा विषय पढ़ायें ,जिससे उनके बच्चे का भविष्य सुखमय हो ?
----{१}-सर्वप्रथम जातक के बचपन से ही उसकी कुंडली विषय की पढाई व् कैरियर चयन में सहायक होती है |
---{२}जातक की कुंडली से तय करना चाहिए कि वह नौकरी करेगा या व्यवसाय |
---{३}-जातक कि २० से ४० वर्ष की उम्र के बिच की ग्रहदशा का सूक्षम अध्ययन कर यह देखना चाहिए कि दशा किस प्रकार के कार्यक्षेत्र का संकेत दे रही है |
----{४}-आगामी गोचर या दशा कार्य क्षेत्र में तरक्की का संकेत दे रही है या नहीं ? इसका भी परीक्षण कर लेना चाहिए |
कुंडली में शिक्षा का योग -----जन्म कुंडली का नवम भाव धर्म त्रिकोण स्थान है ,जिसके स्वामी देव गुरु वृहस्पति हैं | यह भाव शिक्षा में महत्वाकांक्षा व् उच्च शिक्षा तथा उच्च शिक्षा किस स्टार कि होगी इसको दर्शाती है | यदि इसका सम्बन्ध पंचम से हो जाये तो अच्छी शिक्षा मिलती है ||
----शिक्षा का स्तर------जन्मकुंडली का पंचम भाव बुद्धि ,ज्ञान ,कल्पना ,अतीन्द्रिय ज्ञान,रचनात्मक कार्य ,याददास्त व् पूर्वजन्म के संचित कर्म को दर्शाता है | यह शिक्षा के संकाय का स्तर तय करता है ||
-----शिक्षा किस प्रकार की होगी --------जन्मकुंडली का चतुर्थभाव मन का भाव है |यह इस बात का निर्धारण करता है कि आपकी मानसिक योग्यता किस प्रकार की शिक्षा में होगी |जब भी चतुर्थ भाव का स्वामी छठे ,आठवें या बारहवें भाव में गया हो या नीच राशि,अस्त राशि ,शत्रु राशि में बैठा हो व् करक ग्रह {चंद्रमा } पीड़ित हो तो शिक्षा में मन नहीं लगता है ||
-----शिक्षा का उपयोग -----जन्मकुंडली का द्वितीय भाव -वाणी ,धन ,संचय ,व्यक्ति की मानसिक स्थिति को व्यक्त करता है तथा यह दर्शाता है कि शिक्षा आपने ग्रहण कि है वह आपके लिए उपयोगी है या नहीं |यदि इस भाव पर पाप ग्रह का प्रभाव हो तो जातक शिक्षा का उपयोग नहीं करता है |
जातक को बचपन से किस विषय की पढाई करवानी चाहिए ,इस हेतु हम मूलतः निम्न चार पाठ्यक्रम{ विषय } को ले सकते हैं --गणित ,जिव विज्ञानं ,कला और वाणिज्य -----
{१}-गणित ---गणित के करक ग्रह बुध का सम्बन्ध यदि जातक के लग्न ,लग्नेश या लग्न नक्षत्र से होता है तो वह गणित में सफल होता है ||
{२}-शनि एवं मंगल किसी भी प्रकार से सम्बन्ध बनायें तो जातक -मशीनरी कार्य में दशा होता है ||
---जीव विज्ञानं -सूर्य का जल राशिस्थ होना ,छठे एवं दशम भाव /भावेश के बीच सम्बन्ध ,सूर्य एवं मंगल का सम्बन्ध आदि चिकित्सा क्षेत्र में पढाई के करक होते हैं
---कला ------पंचम /पंचमेश एवं करक गुरु ग्रह का पीड़ित होना कला के क्षेत्र में पढाई का करक होता है | इन पर शुभ ग्रहों की दृष्टि पढाई प[उरी करवाने में सक्षम होती है ||
--वाणिज्य --लग्न /लग्नेश का सम्बन्ध बुध के साथ -साथ गुरु से भी हो तो जातक वाणिज्य की पढाई सफलता पूर्वक करता है ||
आइये जानते हैं अच्छी शिक्षा के योग -----
{१}-द्वितीयेश या वृहस्पति केंद्र या त्रिकोण में हों |
{२}-पंचम भाव में बुध की स्थिति अथवा दृष्टि या बृहस्पति और शुक्र की युति हो |
{३}-पंचमेश की पंचम भाव में वृहस्पति या शुक्र के साथ युति हो ?
{४}-बृहस्पति ,शुक्र और बुध में से कोई भी केंद्र या त्रिकोण में हो ?
---नोट - शिक्षा की सलाह अपने -अपने पुरोहित जी आचार्यजी से लें और अपनी -अपनी संतानों को शिक्षा की सही राह दिखाएं ||
भवदीय निवेदक -पंडित कन्हैयालाल झा शास्त्री {मेरठ -उत्तर प्रदेश }
निःशुल्क ज्योतिष सेवा एकबार ही सभी मित्रों को संपर्क सूत्र द्वारा ही मिल पायेगी -रात्रि -8 से 9 .३० में =09897701636 ,09358885616
प्रस्तुतकर्ता
ज्योतिष सेवा सदन { पंडित कन्हैयालाल झा शास्त्री "}{मेरठ }
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रविवार, जून 03, 2012
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शनिवार, 2 जून 2012
ज्योतिष सेवा सदन "झा शास्त्री "{1}: "ज्योतिष के माध्यम से शिक्षा का चयन उपयोगी हो सकता...
ज्योतिष सेवा सदन "झा शास्त्री "{1}: "ज्योतिष के माध्यम से शिक्षा का चयन उपयोगी हो सकता...: "ज्योतिष के माध्यम से शिक्षा का चयन उपयोगी हो सकता है ?" प्रायः हम देखते हैं कि कुछ व्यवसाय /पदों को प्राप्त करके भी हम छोड़ देते हैं य...
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ज्योतिष सेवा सदन { पंडित कन्हैयालाल झा शास्त्री "}{मेरठ }
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शनिवार, जून 02, 2012
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"ज्योतिष के माध्यम से शिक्षा का चयन उपयोगी हो सकता है ?"
"ज्योतिष के माध्यम से शिक्षा का चयन उपयोगी हो सकता है ?"
प्रायः हम देखते हैं कि कुछ व्यवसाय /पदों को प्राप्त करके भी हम छोड़ देते हैं या अन्य व्यवसाय से जुड़ जाते हैं अथवा अनेक व्यवसाय एक साथ करने लग जाते हैं |इसका मुख्य कारन जातक की कुंडली में ग्रहों की स्थिति होती है |
एक सभ्य ,सुसंस्कृत एवं जिम्मेदार नागरिक बनने में शिक्षा की महत्वपूर्ण भूमिका है |आर्थिक एवं प्रतिस्पर्धा के इस युग में उचित एवं सही माध्यम या सही विषय चयन कर अच्छे परिणाम प्राप्त किये जा सकते हैं |कोई व्यक्ति kitni शिक्षा प्राप्त करेगा या उसका पढाई के प्रति क्या रुझान होगा ,यह जन्म पत्रिका के माध्यम से जाना जा सकता है |अधिकांश अभिभावकों एवं विद्यार्थियों की चिंता यह रहती है कि क्या पढ़ा जाए ताकि अच्छा कैरियर हो ----
--{१}--सिंह राशि हो -सूर्य की अथिति उत्तम हो---तो आप --चिकित्सा ,शरीर विज्ञानं,प्राणीशास्त्र,नेत्र चिकित्सा ,राजभाषा ,प्रशासन ,राजनीति एवं जीवविज्ञान के क्षेत्र में सफल हो सकते हैं ||
{२}-कर्क राशि हो --चंद्रमा की स्थिति उत्तम हो तो आप ---नर्सिंग ,नाविक शिक्षा ,वनस्पति विज्ञानं ,जंतु विज्ञानं ,{जूलोजी }होटल प्रबंध ,काव्य ,पत्रकारिता ,पर्यटन ,डेयरी विज्ञानं ,जलदाय के क्षेत्र में सफल हो सकते हैं ||
{३}-मेष या वृश्चिक राशि हो मंगल की स्थिति उत्तम हो तो आप -भूमिति {भूमि सम्बन्धी } फौजदारी ,कानून ,इतिहास ,पुलिस सम्बन्धी प्रशिक्षण ,ओवर-सियर प्रशिक्षण,सर्वे ,अभियांत्रिकी ,वायुयान शिक्षा ,शल्य चिकित्सा ,विज्ञानं ,ड्राइविंग ,टेलरिंग या अन्य तकनिकी शिक्षा ,खेल कूद सम्बन्धी प्रशिक्षण ,सैन्य शिक्षा ,दन्त चिकित्सा के क्षेत्र में सफल हो सकते हैं ||
{४}-धनु या मीन- राशि हो ,गुरु प्रबल हों तो आप ---बीजगणित ,द्वितीय भाषा ,आरोग्यशास्त्र विविध ,अर्थशास्त्र ,दर्शन ,मनोविज्ञान ,धार्मिक या आध्यात्मिक शिक्षा के क्षेत्र में सफल हो सकते हैं ||
{५}-मिथुन या कन्या राशि हो साथ ही बुध की स्थिति उत्तम हो तो आप ---गणित ,ज्योतिष ,व्याकरण ,शासन की विभागीय परीक्षाएं ,पदार्थ विज्ञानं ,मानसशास्त्र,हस्तरेखा ज्ञान ,शब्दशास्त्र {भाषा विज्ञानं }टैपिंग ,तत्वज्ञान,पुस्तकालयविज्ञानं,लेखा ,वाणिज्य ,शिक्षक प्रशिक्षणके क्षेत्रों में सफल हो सकते हैं ||
{६}-वृष या तुला राशि हो साथ ही शुक्र प्रबल हो तो आप ---ललितकला ,{संगीत ,नृत्य ,अभिनय ,चित्रकला ,आदि }फ़िल्म टी० वी०,वेशभूषा ,फैशन ,डिजायनिंग ,काव्य साहित्य एवं अन्य विविध कला के क्षेत्र में सफल हो सकते हैं ||
{७}--मकर या कुम्भ राशि हो शनि की मजबूत स्थिति हो तो आप ----भूगर्भशास्त्र सर्वेक्षण ,अभियांत्रिकी ,ओधोगिकी ,यांत्रिकी ,भवन निर्माण ,मुद्रण कला ,प्रिन्टिंग इत्यादि के क्षेत्रों में सफल हो सकते हैं ||
{८}-यदि आपकी कुंडली में राहु की स्थिति बहुत ही मजबूत है तो आप -तर्कशास्त्र ,हिप्नोटिजम ,मेस्मिरिजम ,करतब के खेल ,{जादू सर्कस आदि } भुत प्रेत सम्बन्धी ज्ञान ,विष चिकित्सा ,एंटी बायोटिक्स इलेक्ट्रोनिक्स इत्यादि के क्षेत्र में सफल हो सकते हैं ||
{९}--केतु की स्थिति अगर बढियां है आपकी कुंडली में तो आप ---गुप्त विद्याएं,मंत्र -तंत्र सम्बन्धी ज्ञान के क्षेत्रों में निपुण हो सकते हैं ||
भाव -वैज्ञानिक और ओद्योगिक प्रगति के कारण व्यवसायों एवं शैक्षणिक विषयों की संख्या में उत्तरोतर वृद्धि होती जा रही है | अतः ज्योतिष सिधान्तों के आधार पर ग्रहों के पारस्परिक संबंधों को ध्यान में रखते हुए विचार किया जा सकता है | ---निवेदक -पंडित के० एल० झा शास्त्री{मेरठ उत्तर प्रदेश }
कृपया निःशुल्क ज्योतिष सेवा रात्रि -8 से 9.30 में संपर्क सूत्र द्वरा ही प्राप्त करें =09897701636 -09358885616
प्रायः हम देखते हैं कि कुछ व्यवसाय /पदों को प्राप्त करके भी हम छोड़ देते हैं या अन्य व्यवसाय से जुड़ जाते हैं अथवा अनेक व्यवसाय एक साथ करने लग जाते हैं |इसका मुख्य कारन जातक की कुंडली में ग्रहों की स्थिति होती है |
एक सभ्य ,सुसंस्कृत एवं जिम्मेदार नागरिक बनने में शिक्षा की महत्वपूर्ण भूमिका है |आर्थिक एवं प्रतिस्पर्धा के इस युग में उचित एवं सही माध्यम या सही विषय चयन कर अच्छे परिणाम प्राप्त किये जा सकते हैं |कोई व्यक्ति kitni शिक्षा प्राप्त करेगा या उसका पढाई के प्रति क्या रुझान होगा ,यह जन्म पत्रिका के माध्यम से जाना जा सकता है |अधिकांश अभिभावकों एवं विद्यार्थियों की चिंता यह रहती है कि क्या पढ़ा जाए ताकि अच्छा कैरियर हो ----
--{१}--सिंह राशि हो -सूर्य की अथिति उत्तम हो---तो आप --चिकित्सा ,शरीर विज्ञानं,प्राणीशास्त्र,नेत्र चिकित्सा ,राजभाषा ,प्रशासन ,राजनीति एवं जीवविज्ञान के क्षेत्र में सफल हो सकते हैं ||
{२}-कर्क राशि हो --चंद्रमा की स्थिति उत्तम हो तो आप ---नर्सिंग ,नाविक शिक्षा ,वनस्पति विज्ञानं ,जंतु विज्ञानं ,{जूलोजी }होटल प्रबंध ,काव्य ,पत्रकारिता ,पर्यटन ,डेयरी विज्ञानं ,जलदाय के क्षेत्र में सफल हो सकते हैं ||
{३}-मेष या वृश्चिक राशि हो मंगल की स्थिति उत्तम हो तो आप -भूमिति {भूमि सम्बन्धी } फौजदारी ,कानून ,इतिहास ,पुलिस सम्बन्धी प्रशिक्षण ,ओवर-सियर प्रशिक्षण,सर्वे ,अभियांत्रिकी ,वायुयान शिक्षा ,शल्य चिकित्सा ,विज्ञानं ,ड्राइविंग ,टेलरिंग या अन्य तकनिकी शिक्षा ,खेल कूद सम्बन्धी प्रशिक्षण ,सैन्य शिक्षा ,दन्त चिकित्सा के क्षेत्र में सफल हो सकते हैं ||
{४}-धनु या मीन- राशि हो ,गुरु प्रबल हों तो आप ---बीजगणित ,द्वितीय भाषा ,आरोग्यशास्त्र विविध ,अर्थशास्त्र ,दर्शन ,मनोविज्ञान ,धार्मिक या आध्यात्मिक शिक्षा के क्षेत्र में सफल हो सकते हैं ||
{५}-मिथुन या कन्या राशि हो साथ ही बुध की स्थिति उत्तम हो तो आप ---गणित ,ज्योतिष ,व्याकरण ,शासन की विभागीय परीक्षाएं ,पदार्थ विज्ञानं ,मानसशास्त्र,हस्तरेखा ज्ञान ,शब्दशास्त्र {भाषा विज्ञानं }टैपिंग ,तत्वज्ञान,पुस्तकालयविज्ञानं,लेखा ,वाणिज्य ,शिक्षक प्रशिक्षणके क्षेत्रों में सफल हो सकते हैं ||
{६}-वृष या तुला राशि हो साथ ही शुक्र प्रबल हो तो आप ---ललितकला ,{संगीत ,नृत्य ,अभिनय ,चित्रकला ,आदि }फ़िल्म टी० वी०,वेशभूषा ,फैशन ,डिजायनिंग ,काव्य साहित्य एवं अन्य विविध कला के क्षेत्र में सफल हो सकते हैं ||
{७}--मकर या कुम्भ राशि हो शनि की मजबूत स्थिति हो तो आप ----भूगर्भशास्त्र सर्वेक्षण ,अभियांत्रिकी ,ओधोगिकी ,यांत्रिकी ,भवन निर्माण ,मुद्रण कला ,प्रिन्टिंग इत्यादि के क्षेत्रों में सफल हो सकते हैं ||
{८}-यदि आपकी कुंडली में राहु की स्थिति बहुत ही मजबूत है तो आप -तर्कशास्त्र ,हिप्नोटिजम ,मेस्मिरिजम ,करतब के खेल ,{जादू सर्कस आदि } भुत प्रेत सम्बन्धी ज्ञान ,विष चिकित्सा ,एंटी बायोटिक्स इलेक्ट्रोनिक्स इत्यादि के क्षेत्र में सफल हो सकते हैं ||
{९}--केतु की स्थिति अगर बढियां है आपकी कुंडली में तो आप ---गुप्त विद्याएं,मंत्र -तंत्र सम्बन्धी ज्ञान के क्षेत्रों में निपुण हो सकते हैं ||
भाव -वैज्ञानिक और ओद्योगिक प्रगति के कारण व्यवसायों एवं शैक्षणिक विषयों की संख्या में उत्तरोतर वृद्धि होती जा रही है | अतः ज्योतिष सिधान्तों के आधार पर ग्रहों के पारस्परिक संबंधों को ध्यान में रखते हुए विचार किया जा सकता है | ---निवेदक -पंडित के० एल० झा शास्त्री{मेरठ उत्तर प्रदेश }
कृपया निःशुल्क ज्योतिष सेवा रात्रि -8 से 9.30 में संपर्क सूत्र द्वरा ही प्राप्त करें =09897701636 -09358885616
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ज्योतिष सेवा सदन { पंडित कन्हैयालाल झा शास्त्री "}{मेरठ }
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शनिवार, जून 02, 2012
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बुधवार, 30 मई 2012
"रवि योग एवं सिद्धि योग-को जानने की कोशिश करते हैं ?"
"रवि योग एवं सिद्धि योग-को जानने की कोशिश करते हैं ?"
संसार के सभी शुभ कार्यों {विवाह को छोरकर } में इन योगों का उपयोग कर सकते हैं |--------रवि योग --{१}--रवियोग भी उपरोक्त योगों की तरह सभी शुभ कार्यों में प्रयोग करते हैं | शास्त्रों में-कहा गया है कि-जिस तरह हिमालय का हिम सूर्य के उगने पर गल जाता है और सैकड़ों हाथियों के समूहों को अकेला सिंह भगा देता है ,उसी तरह से -रवि योग भी सभी अशुभ योगों को भगा देता है ,----अर्थात -इस योग में सभी शुभ कार्य निर्विघ्न रूप से पूर्ण होते हैं ||
---{२}-सिद्धि योग ---भी सर्वार्थ सिद्धि आदि और रवि योगों की भांति ही महत्वशाली हैं |उपरोक्त योगों में किये जाने वाले सभी कार्य इसमें भी किये जा सकते हैं |शास्त्रों का कहना है कि सिद्धि योग में यम्घंत ,vish ,आदि कुयोगों का प्रभाव समाप्त हो जाता है ||
भाव हम हम अपने किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत --इन योगों में करें तो उत्तम रहेगा -किन्तु परामर्श अपने पुरोहित जी से अवश्य लें ||
भवदीय निवेदक "पंडित के० एल ० झा शास्त्री {किशनपुरी धर्मशाला देहली गेट मेरठ -उत्तर प्रदेश } निःशुल्क ज्योतिष सेवा रात्रि -8 से 9.30 तक प्रति रात्रि सभी मित्रों के लिए उपलब्ध रहती है | ज्योतिष जानकारी केवल संपर्क सूत्र द्वारा ही मिल पायेगी सभी मित्रों को ?--09897701636 ,09358885616
संसार के सभी शुभ कार्यों {विवाह को छोरकर } में इन योगों का उपयोग कर सकते हैं |--------रवि योग --{१}--रवियोग भी उपरोक्त योगों की तरह सभी शुभ कार्यों में प्रयोग करते हैं | शास्त्रों में-कहा गया है कि-जिस तरह हिमालय का हिम सूर्य के उगने पर गल जाता है और सैकड़ों हाथियों के समूहों को अकेला सिंह भगा देता है ,उसी तरह से -रवि योग भी सभी अशुभ योगों को भगा देता है ,----अर्थात -इस योग में सभी शुभ कार्य निर्विघ्न रूप से पूर्ण होते हैं ||
---{२}-सिद्धि योग ---भी सर्वार्थ सिद्धि आदि और रवि योगों की भांति ही महत्वशाली हैं |उपरोक्त योगों में किये जाने वाले सभी कार्य इसमें भी किये जा सकते हैं |शास्त्रों का कहना है कि सिद्धि योग में यम्घंत ,vish ,आदि कुयोगों का प्रभाव समाप्त हो जाता है ||
भाव हम हम अपने किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत --इन योगों में करें तो उत्तम रहेगा -किन्तु परामर्श अपने पुरोहित जी से अवश्य लें ||
भवदीय निवेदक "पंडित के० एल ० झा शास्त्री {किशनपुरी धर्मशाला देहली गेट मेरठ -उत्तर प्रदेश } निःशुल्क ज्योतिष सेवा रात्रि -8 से 9.30 तक प्रति रात्रि सभी मित्रों के लिए उपलब्ध रहती है | ज्योतिष जानकारी केवल संपर्क सूत्र द्वारा ही मिल पायेगी सभी मित्रों को ?--09897701636 ,09358885616
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ज्योतिष सेवा सदन { पंडित कन्हैयालाल झा शास्त्री "}{मेरठ }
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बुधवार, मई 30, 2012
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मंगलवार, 29 मई 2012
ज्योतिष सेवा सदन "झा शास्त्री "{1}: "27 नक्षत्रों की संज्ञा एवं उनमें करने योग्य कर्म ...
ज्योतिष सेवा सदन "झा शास्त्री "{1}: "27 नक्षत्रों की संज्ञा एवं उनमें करने योग्य कर्म ...: --नक्षत्र २७ हैं ,सभी जानते हैं ,किन्तु सभी नक्षत्रों की संज्ञा एवं उन नक्षत्रों में हम कोन सा कार्ज करें --शास्त्रकारों के विचार को जा...
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ज्योतिष सेवा सदन { पंडित कन्हैयालाल झा शास्त्री "}{मेरठ }
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मंगलवार, मई 29, 2012
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"27 नक्षत्रों की संज्ञा एवं उनमें करने योग्य कर्म ?"
--नक्षत्र २७ हैं ,सभी जानते हैं ,किन्तु सभी नक्षत्रों की संज्ञा एवं उन नक्षत्रों में हम कोन सा कार्ज करें --शास्त्रकारों के विचार को जाने की कोशिश करते हैं --जिसे हमलोग भी अमुक -अमुक कार्ज नक्षत्रों के अनुसार करें |
-----{१}-उत्तरा फाल्गुनी,उत्तराषाढा,उत्तरा भाद्रपद -रोहिणी और रविवार -यह ध्रुव एवं स्थिर संज्ञक हैं ---इन नक्षत्रों में स्थिर काम-जैसे -गृहराम्भ,बिज बोना ,शांति कर्म {ग्रह आदि शांति }बगीचा लगाना ,तथा मृदु नक्षत्र मधुर कार्ज करना शुभ होता है |
--{२}-स्वाति ,पुनर्वसु ,श्रवण ,धनिष्ठा ,शतभिषा --यह नक्षत्र और सोमवार यह चर एवं चल संज्ञक है ,इनमें -वहां ,हाथी,घोडा पर चढ़ना ,फुलवारी आदि लगानासाथ ही यात्रा एवं लघुसंज्ञक कर्म करना भी शुभ रहता है ||
---{३}-पूर्वाफाल्गुनी ,पूर्वाषाढा,पूर्वा भाद्रपद -भरणी ,मघा और मंगलवार यह उग्र तथा क्रूरसंज्ञक हैं,इनमें मारण,अग्नि कार्य ,शुद्धता तथा विष आदि का प्रयोग ,शास्त्र बनाना तथा दारुण संज्ञक नक्षत्रों के कार्य शुभ होते हैं ||
-----{४}-विशाखा ,कृतिका और बुधवार यह मिश्र एवं साधारण संज्ञक हैं ,इनमें अग्नि कार्य,मिश्र नक्षत्रों में कहे हुए कार्य और वृष उत्सर्ग गाय या बैल का दान आदि शब्द से उग्र संज्ञक नक्षत्र के भी कार्य करना शुभ रहता है ||
---{५}-हस्त ,अश्विनी ,पुष्य ,अभिजित ,नक्षत्र और गुरुवार क्षिप्र और लघु संज्ञक हैं ,इनमें दुकान लगाना ,रति ज्ञान {प्रेम }शास्त्र अध्ययन ,आभूषण बनाना या बनबाना ,शिल्प -चित्र रचना ,कला ,नृत्य आदि सीखना तथा आदि शब्द से चर संज्ञक नक्षत्रों में कहे हुए कार्यों का करना भी शुभ होता है ||
----{६}-मृगशिरा ,रेवती ,चित्रा ,अनुराधा ,और शुक्रवार ये मृदु संज्ञक हैं,इनमें गीत ,वस्त्र ,खेल ,मित्र कार्य एवं आभूषण {गहना }बनाना या धारण करना शुभ होता है ||
---{७}-मूल ,ज्येष्ठा,आर्द्रा ,आश्लेषा और शनिवार यह तीक्ष्ण और दारुण संज्ञक हैं ,इनमें अभिचार {मरण आदि प्रयोग}घात उग्र कार्य भेद अत्यंत मित्रों में परस्पर कलह ,पशु शिक्षा आदि सब कार्य सिद्ध होता है ||
-----{८}-मूल ,आश्लेषा ,कृतिका ,और विशाखा तीनो पूर्वा और भरणी तथा मघा ये नौ नक्षत्र अधोमुख हैं | आर्द्रा पुष्य ,श्रवण ,धनिष्ठा,शतभिषा ,तीनो उत्तरा और रोहिणी ,यह नौ नक्षत्र उर्धमुख हैं |मृगशिरा ,रेवती ,चित्रा अनुराधा ,हस्त ,स्वाति ,पुनर्वसु ,ज्येष्ठा ,अश्विनी ये नौ तियर्गमुख नक्षत्र हैं |इन नक्षत्रों के मुख के अनुसार उसी तरह का कार्य सिद्ध होता है ,जैसे अधोमुख से -कुंआं खुद्बबाना इत्यादि ,उर्ध मुख से मकान बनवाना ,तियर्ग मुख में बांध बंधवाना यात्रा एवं चक्र रथ इत्यादि बनवाना शुभ होता है ||
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निःशुल्क ज्योतिष सेवा सभी मित्रों को केवल एकबार ही मिल पायेगी --संपर्क सूत्र द्वारा --09897701636 ----09358885616
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मंगलवार, मई 29, 2012
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सोमवार, 28 मई 2012
"कर्ज{ऋण }लेन देन का वर्जित समय ?"
"कर्ज{ऋण }लेन देन का वर्जित समय ?"
भौतिक आवश्यकता के कारण--लोग कर्ज लेने में संकोच नहीं करते ,तो सांसारिक लोलुपता के कारण कर्ज देने को लोग विह्वल {आतुर }भी बहुत रहते हैं | किन्तु सोच के अनुकून बात नहीं बनने पर लोग प्राण की परवाह भी नहीं करते हैं ---आइये हम ज्योतिष की कुछ सलाह देना चाहते हैं | जिससे कर्जदार लोग ऋणी न रहें ,साहूकार धन से पर्पूर्ण रहें ||
---------संक्रांति का दिन हो या मंगलवार का दिन हो ---वृद्धि योग ,हस्त नक्षत्र युक्त रविवार हो --तो उस दिन ऋण ले लेने से --ऋण जल्दी मुक्त नहीं हो पाता है | अर्थात --अनेक प्रकार की अडचनें सामने अवश्य आ जाती है ||
------मंगलवार के दिन यदि ऋण चुकाया जाये तो अति शुभ होता है | अर्थात -पुनः ऋण लेने की आवश्यकता नहीं पड़ती है |
---------बुधवार के दिन ऋण को देना नहीं चाहिए ,---कृतिका ,रोहिणी ,आर्द्रा,आश्लेषा उत्तरा फाल्गुनी,विशाखा ,ज्येष्ठा,मूल --इन नक्षत्रों में या --भद्रा ,व्यतिपात और अमावस में दिया गया धन फिर नहीं मिलता या फिर झगड़े ,विवाद ,मुकदमें आदि करने पर मजबूर करवा देता है ||
भाव --जब भी धन लेना हो या देना हो इन जानकारी के द्वारा लेन या देन या अपने पुरोहित जी से विचार विमर्श करके लें ||
भवदीय -पंडित कन्हैयालाल झा शास्त्री {मेरठ -उत्तर प्रदेश }
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भौतिक आवश्यकता के कारण--लोग कर्ज लेने में संकोच नहीं करते ,तो सांसारिक लोलुपता के कारण कर्ज देने को लोग विह्वल {आतुर }भी बहुत रहते हैं | किन्तु सोच के अनुकून बात नहीं बनने पर लोग प्राण की परवाह भी नहीं करते हैं ---आइये हम ज्योतिष की कुछ सलाह देना चाहते हैं | जिससे कर्जदार लोग ऋणी न रहें ,साहूकार धन से पर्पूर्ण रहें ||
---------संक्रांति का दिन हो या मंगलवार का दिन हो ---वृद्धि योग ,हस्त नक्षत्र युक्त रविवार हो --तो उस दिन ऋण ले लेने से --ऋण जल्दी मुक्त नहीं हो पाता है | अर्थात --अनेक प्रकार की अडचनें सामने अवश्य आ जाती है ||
------मंगलवार के दिन यदि ऋण चुकाया जाये तो अति शुभ होता है | अर्थात -पुनः ऋण लेने की आवश्यकता नहीं पड़ती है |
---------बुधवार के दिन ऋण को देना नहीं चाहिए ,---कृतिका ,रोहिणी ,आर्द्रा,आश्लेषा उत्तरा फाल्गुनी,विशाखा ,ज्येष्ठा,मूल --इन नक्षत्रों में या --भद्रा ,व्यतिपात और अमावस में दिया गया धन फिर नहीं मिलता या फिर झगड़े ,विवाद ,मुकदमें आदि करने पर मजबूर करवा देता है ||
भाव --जब भी धन लेना हो या देना हो इन जानकारी के द्वारा लेन या देन या अपने पुरोहित जी से विचार विमर्श करके लें ||
भवदीय -पंडित कन्हैयालाल झा शास्त्री {मेरठ -उत्तर प्रदेश }
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सोमवार, मई 28, 2012
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शनिवार, 26 मई 2012
"Have a nice day,Ram-Ram,Namskar?"
"Never ignore anyone who really cares 4U
Other wise one day U will realise that U
Have lost a diamond while U were busy in
Collecting stones.........!!
From-"jha shastri Meerut-India,
{Have a nice day,ram-Ram,Namskar}
-Free of coust-jyotish seva all friends-8 to9 pm ,
con----09358885616,09897701636
Other wise one day U will realise that U
Have lost a diamond while U were busy in
Collecting stones.........!!
From-"jha shastri Meerut-India,
{Have a nice day,ram-Ram,Namskar}
-Free of coust-jyotish seva all friends-8 to9 pm ,
con----09358885616,09897701636
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शनिवार, मई 26, 2012
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बुधवार, 23 मई 2012
"बहुमूल्य वस्तुएं -त्रिपुष्कर एवं द्विपुष्कर योगों में खरीदें ?"
यद्यपि ज्योतिष शाश्त्रों में अनंत योंग होते हैं | सभी योगों के महत्व भी अलग -अलग हैं | जब पंचांग में कोई मुहूर्त उपलब्ध नहीं होते हैं-तो योगों में विहित कर्म करने की सदियों से परम्परा रही है | कुछ शाश्त्रकारों के मत के अनुसार -मुहूर्त से भी उत्तम योग होते हैं ,जिन योगों में अमुक -अमुक कार्ज़ करने से विशेष लाभ होते हैं |---------आज हम बात करते हैं त्रिपुष्कर एवं द्विपुष्कर योगों की ----जमीन,हीरे ,जवाहरात ,कार ,ट्रक ,ट्रेक्टर,टेलीविजन ,आभूषण ,घोडा ,गाय ,भैष-आदि बहुमूल्य चीजें और भी योगों में खरीदी जा सकती है ,किन्तु त्रिपुष्कर एवं द्विपुष्कर योग विशेष ही महत्वपूर्ण माने जाते हैं |
---{१}-यदि कोई वस्तु त्रिपुष्कर योग में खरीदी जाये तो वह निकट भविष्य में तिगुनी हो जाती है |
---{२}-यदि कोई बहुमूल्य वस्तु -द्विपुष्कर योग में खरीदी जाये तो -निकट भविष्य में दुगुनी हो जाती है |
----अतः इन योगों में बहुमूल्य वस्तुएं खरीदिनी चाहिए या बैंक में रुपया जमा करवाने चाहिये |
---नोट --इन योगों में मुकदमा दायर करना या दवा खरीदना उत्तम नहीं होता है ,क्योंकि ये वृद्धि कारक योग हैं --तो ये योग दवा एवं शत्रुओं से मुक्त नहीं अपितु वृद्धि करायेंगें | इन योगों में अपनी कोई कीमती वस्तु को बेचनी भी नहीं चाहिए |अन्यथा आगे चलकर उससे तिगुनी या दुगुनी बेचने की स्थिति भी पैदा हो सकती है |
----{३}-धन या अचल संपत्ति के संचय के लिए ये योग --अद्वितीय हैं ||
भवदीय -पंडित कन्हैयालाल "झा शास्त्री " {मेरठ उत्तर प्रदेश }
निःशुल्क ज्योतिष सेवा सभी मित्रों के लिए रात्रि 8 -से -9 में संपर्क सूत्र द्वरा उपलब्ध रहती है |
--09358885616 --09897701636
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ज्योतिष सेवा सदन { पंडित कन्हैयालाल झा शास्त्री "}{मेरठ }
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बुधवार, मई 23, 2012
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मंगलवार, 22 मई 2012
ज्योतिष सेवा सदन "झा शास्त्री "{1}: "ज्योतिष की नजरें,पाक्षिक विश्व की ख़बरें -21 -05 -...
ज्योतिष सेवा सदन "झा शास्त्री "{1}: "ज्योतिष की नजरें,पाक्षिक विश्व की ख़बरें -21 -05 -...: इस पक्ष देश -विदेशों की यात्रा करने वाले यात्री सावधान होकर यात्रा करें ,क्योंकि मृगशिरा में स्थित शुक्र के कारण यात्रा में यात्रियों को ...
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मंगलवार, मई 22, 2012
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"ज्योतिष की नजरें,पाक्षिक विश्व की ख़बरें -21 -05 -से 04 -06 -2012 तक ?"
इस पक्ष देश -विदेशों की यात्रा करने वाले यात्री सावधान होकर यात्रा करें ,क्योंकि मृगशिरा में स्थित शुक्र के कारण यात्रा में यात्रियों को परेशानी होगी | धान्य मँहगे होंगें | समाजवादी देशों एवं अनेक तानाशाही देशों में आंतरिक सैन्य संघर्ष होगा |गृहयुद्ध के आसार बनेंगें |भीषण अग्निकांड होगा |तोड़ -फोड़ ,सांप्रदायिक उपद्रव हो सकते हैं |खून -खराबे का तांडव होगा |चीन अंतर्राष्ट्रीय राजनीति में इस समय अकेला पड़ जायेगा |प्रवास सम्बन्धी कानून में ब्रिटेन में परिवर्तन होगा | सार्वजानिक उद्योगों की स्थिति में सुधार होगा,तथा उसमें लाभ की स्थिति बनेगी |देश में मासांत तक विरोधी पक्ष एवं सत्ता पक्ष में सुधार की संभावनाएं हैं |
----संक्रांति फल -किराने की वस्तुओं के भाव में घटा -बढ़ी होती रहेगी | गेंहूँ ,चना ,जौ के भाव में तेजी आएगी ,किन्तु मक्का ,मूंग ,मोठ ,उड़द का भाव मंदा रहेगा |सोना -चांदी के भाव में काफी उत्तर चढाव होगा |तिल ,तेल ,सरसों ,रूई,अलसी ,मूंगफली का भाव तेज रहेगा |रस-कास पदार्थ तेज होंगें | रूई ,कपास ,सूत ,कपडे में उत्तर -चढाव होगा ||
भवदीय -पंडित कन्हैयालाल "झा शास्त्री "{मेरठ- उत्तर प्रदेश }
निःशुल्क ज्योतिष सलाह -सभी मित्रों के लिए रात्रि ८ से 9 में उपलब्ध रहती है |
संपर्क सूत्र -09897701636 ,09358885616 ---
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सोमवार, 21 मई 2012
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सोमवार, मई 21, 2012
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"इस पक्ष देश -विदेशों में क्या होगा -२१ मई से ४ जून २०१२ तक ?"
---कन्या राशि में वक्री शनि २५ जून २०१२ तक उपद्रवों का कारण बनेगा ---"कन्या मीने यदा सौरी राशि वक्रं प्रजायते |
नृपायुद्धं भयं लोके दुर्भिक्षं तत्र जायते ||-----के अनुसार किन्हीं देशों में युद्धभय,प्राकृतिक प्रकोप ,भूकंप ,दिग्दाह ,आंधी -तूफान ,अग्निकांड की त्रासदी झेलनी पड़ेगी |असामान्य परिस्थितियों में अकाल जैसे हालात बन सकते हैं | अंतर्राष्ट्रीय शांति परिचर्चा होगी | कश्मीर का मुद्दा और भी उलझ सकता है |अमेरिका आदि प्रभावी देश दखल देने की कोशिश करेंगें |आस्तीन के सापों से देश के कर्णधारों को सचेत रहना चाहिए अन्यथा हानि होगी देश को |
तेजी -मंदी विचार ---सूर्य के साथ पांच ग्रह संयोग तेजी का संकेत है |----आगे पीछे बहुत ग्रह ,सूर्य से तामस योग | हा !हा ! कार होय जग ,बाढ़े रोग वियोग ||{राजधानी } ----मंहगाई की मार से त्राहि -त्राहि मचेगी | सरकार आयात -निर्यात नीति पर पुनर्विचार करेगी |सतर्कता बरती गयी तो मंहगाई कुछ कम कम होगी ||
--आकाश लक्षण -इस पक्ष गर्मी बेतहासा पड़ेगी | बुध रशिचार -गुरु- शुक्रउदयास्त के प्रभाव से मौसम ख़राब होगा |जहाँ -तहां वर्षा होने से कुछ राहत मिलेगी देश के दक्षिण संभागों में वर्षा अधिक होगी | आंधी-तूफान जानलेवा सिद्ध हो सकता है | आगे अच्छी फसल की उम्मीद की जा सकती है ||
भवदीय- निवेदक -पंडित कन्हैयालाल "झा शास्त्री "{मेरठ उत्तर प्रदेश }
निःशुल्क ज्योतिष सेवा रात्रि ८ से ९ सभी के लिए उपलब्ध रहती है | सम्पर्क सूत्र-०९८९७७०१६३६,09358885616
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