ज्योतिष सेवा सदन "झा शास्त्री "{मेरठ उत्तर प्रदेश }

निःशुल्क ज्योतिष सेवा ऑनलाइन रात्रि ८ से९ जीमेल पर [पर्तिदिन ]

बुधवार, 11 जुलाई 2012

" सूचना पट -ज्योतिष सेवा सदन "झा शास्त्री "{मेरठ }

" सूचना पट -ज्योतिष सेवा सदन "झा शास्त्री "{मेरठ }
-{1}-ज्योतिष सेवा अहर्निशं सदस्यों को मिलेगी !
-{2}-निःशुल्क ज्योतिष सेवा 2013 तक अनुपलब्ध रहेगी !
-{3}-ज्योतिष की जानकारी अपने परिवार सहित आजीवन सदस्य बनकर ही प्राप्त कर सकते हैं !
-{4}-सदस्यता शुल्क 500 एकबार ही देना पड़ता है ,किन्तु ज्योतिष जानकारी आजीवन मिलती रहेगी ।
{5}-ज्योतिष सेवा सदन के कोई भी सदस्य बन सकते हैं ,किन्तु  जबाब {निदान } सनातन धर्म के अनुसार ही मिलेगा ।
----{6}देश -विदेशों  में रहकर भी ज्योतिष जानकारी प्राप्त कर सकते हैं !
{ ज्योतिष  जानकारी केवल सम्पर्क सूत्र द्वारा ही प्राप्त कर सकते हैं --प्रातः -8 बजे से रात्रि -10 बजे तक }
----------भवदीय ज्योतिष सेवा सदन --
       निवेदक -पंडित कन्हैयालाल "झा शास्त्री "
किशनपुरी धर्मशाला देहली गेट {मेरठ -उत्तर प्रदेश }
हेल्पलाइन--संपर्क सूत्र -09897701636--09358885616

बुधवार, 4 जुलाई 2012

"निःशुल्क ज्योतिष सेवा तत्काल अनुपलब्ध रहेगी ?"

  "निःशुल्क ज्योतिष सेवा तत्काल अनुपलब्ध रहेगी ?"
----सभी मित्रप्रवरों को "झा शास्त्री " का प्रणाम ।
--निःशुल्क ज्योतिष सेवा -3/07/2010 से प्रारंभ हुई थी । संयोग वश 03/07/2012 तक हमने कोशिश की कि देश -विदेश में जहाँ भी हमारे ज्योतिष के अनुयायी मित्र रहते हों ,उनसे हम जुड़ें कुछ अपनी ,कुछ उनकी सुनें । आप मित्रों के स्नेह और प्रेम नें हमें इस पथ पर चलने की प्रेरणा दी --जिस प्रेरणा के कारण हजारों मित्रों से हम जुड़े । पुत्री के विवाह और धनाभाव के कारण हम निःशुल्क ज्योतिष सेवा देने में असमर्थ रहेंगें ।
---------ज्योतिष या धर्म की कोई किम्मत नहीं होती ,अतः हमारी आत्मा सेवा से ही संतुष्ट रहती है ,परन्तु --सेवा से हम आज के युग में सारे कार्ज़ नहीं कर सकते हैं ---अतः यह निःशुल्क ज्योतिष सेवा पुनः 2013 में शुरू करेंगें  परमात्मा एवं आप मित्रों का सहयोग रहेगा तो ?
--------अब केवल ज्योतिष सेवा का लाभ वही मित्र ले पायेंगें जो ज्योतिष सेवा सदन के आजीवन सदस्य होंगें । -----आजीवन सदस्यता शुल्क -500 आप -पंजाब  नेशनल बैंक -बागपत रोड मेरठ
         -कविता झा खाता  नंबर----2533001500011102 में जमा करना होगा ।
-----या -09358885616-टाटा डोकोमो -में ईजी रिचार्ज कर भी सदस्य बन सकते हैं ।
----------निवेदक ज्योतिष सेवा सदन {मेरठ }
पंडित कन्हैयालाल झा शास्त्री {मेरठ उत्तर प्रदेश }
---सम्पर्क सूत्र -09897701636--09358885616

मंगलवार, 3 जुलाई 2012

"कालसर्पयोग की परिभाषा एवं सर्पशाप से युक्त कुण्डलियाँ ?"

"कालसर्पयोग की परिभाषा एवं सर्पशाप से युक्त कुण्डलियाँ ?"
----सभी ग्रह यदि राहु -केतु के मध्य में आ जाए तो "कालसर्पयोग "की सृष्टि होती है ।मोटे तौर पर -कालसर्पयोग -दो प्रकार के होते हैं ।एक उदित गोलार्ध और दूसरा अनुदित गोलार्ध ।उदित गोलार्ध को ग्रस्त योग कहते हैं ,तथा अनुदित को मुक्त योग कहते हैं ।लग्न में राहु तथा सप्तम में केतु हो ,सारे ग्रह 4/8/9/10/11/12 वें स्थानों में हो तो यह उदित "कालसर्पयोग "कहलाता है ।राहु -केतु का भ्रमण सदा उलटा चलता है ।इस योग में सभी ग्रह क्रमशः राहु के मुख में आते चले जाते हैं ।
---------सर्पशाप से ग्रसित कुण्डलियाँ --को भी जानते की कोशिश करते हैं ------?
---प्रसंगवश "कालसर्पयोग "की भांति ही सर्पशाप से ग्रसित कुण्डलियों का विवेचन करना आवश्यक समझता हूँ ।वैसे तो -14 प्रकार से श्रापित कुण्डलियों की शान्ति "कालसर्पयोग "विधि से ही हो जाती है ।केवल संकल्प के समय उच्चारण में पाठान्तर होता है ,परन्तु सर्पशाप से ग्रसित जन्मपत्रिकाओं की निवृति भी "कालसर्पयोग "विधि से ही होती है ।।
-----भवदीय -पंडित के0 एल0 झा शास्त्री {मेरठ }
  ----ज्योतिष सेवा आजीवन सदस्यता शुल्क 500 रूपये अदा करने पर ही मिलेगी ?
       ज्योतिष सेवा सदन --संपर्क सूत्र -09897701636,09358885616

शनिवार, 30 जून 2012

--"शापित जन्मकुंडलियाँ को जानने की कोशिश करते हैं ?"

  --"शापित जन्मकुंडलियाँ को जानने की कोशिश करते हैं ?"
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शुक्रवार, 29 जून 2012

"कालसर्पयोग की प्राचीनता जानते हैं ?"

"कालसर्पयोग की प्राचीनता जानते हैं ?"
---महर्षि पराशर ने "कालसर्पयोग "की चर्चा करते हुए कहा है कि सूर्य ,शनि व मंगल ये तीनो केंद्र स्थानों में हों और शुभग्रह केन्द्रस्थान से भिन्न स्थानों में हों तो "कालसर्पयोग "की सृष्टि होती है ।
--जैसे -केंद्र त्रैगतेह सौम्ये पार्पैवा दल सन्ग्य्कौ ।
  क्रमान्या भुजन्गख्यौ शुभाशुभ फलप्रदौ ।।
-----भाव -ब्रेहत्परासर के अनुसार "कालसर्पयोग "में जन्मे जातक -कुटिल ,क्रूर ,निर्धन ,दुखी ,दीन व पराये अन्न पर निर्भर रहने वाला होता है ।।
---महर्षि बादरायण ,भगवान गर्ग ,मनित्थ के अनुसार ----
              ब्रेहद्जातक नाभसंयोग अध्याय -  बारह - पृष्ट एक सौ अरतालीस पर इस योग को वराहमिहिर द्वारा भी अपने ग्रंथों में उदघृत किया है । ईसा की आठवीं शताब्दि में स्वप्नामधन्य आचार्य कल्याण वर्मा ने "कालसर्पयोग "की परिभाषा में संशोधन किया ।उन्हौने सारावली के अध्याय- एकादश -पृष्ट एक सौ चौवन में स्पष्ट किया है कि सर्प की स्थिति पूर्ण वृत्त न होकर वक्र ही रहती है ।
-----अतः तीन केन्द्रों तक में सीमित "कालसर्पयोग "की व्याख्या उचित प्रतीत होती है ।चारों केन्द्र ,किंवा केन्द्र व त्रिकोणों से वेष्टित पापग्रह की उपस्थिति भी "सर्पयोग" की सृष्टि करती है ।
-------जातक तत्वम ,जातकदीपक,ज्योतिषरत्नाकर,जैन ज्योतिष के अनेक प्राचीन ग्रंथों में "कालसर्पयोग "के अनेक दृष्टान्त मिलते हैं ।
----प्रेषक -भवदीय पंडित कन्हैयालाल "झा शास्त्री "
      किशनपुरी धर्मशाला देहली गेट {मेरठ -उत्तर प्रदेश }




गुरुवार, 28 जून 2012

{1}-ज्योतिष सेवा सदन के मित्र बनकर" फेसबुक "पर निःशुल्क ज्योतिष सेवा कोई भी प्राप्त कर सकते हैं

{1}-ज्योतिष सेवा सदन के मित्र बनकर" फेसबुक "पर निःशुल्क ज्योतिष सेवा  कोई भी प्राप्त कर सकते हैं {प्रतिरात्रि }एकबार ---हेल्पलाइन {सम्पर्क सूत्र }के द्वारा --09897701636--09358885616--!
{2}-आजीवन सदस्यता शुल्क -500 देने पर ,आजीवन अपने परिवार की भी जानकारी निरंतर प्राप्त कर सकते हैं !
--नोट दुबारा ज्योतिष जानकारी केवल सदस्यों को ही मिलेगी ! ज्योतिष जानकारी का समय -8 -से 9.30 प्रति रात्रि !
------भवदीय -पंडित कन्हैयालाल "झा शास्त्री "
   किशनपुरी धर्मशाला देहली गेट मेरठ -{उत्तर प्रदेश }

शनिवार, 23 जून 2012

"राहु -केतु का "कालसर्पयोग "से आखिर सम्बन्ध क्या है ?"

"राहु -केतु का "कालसर्पयोग "से आखिर सम्बन्ध क्या है ?"
---पौराणिक मतानुसार "राहु "नामक राक्षस का मस्तक कट जाने पर भी वह जीवित है और केतु उसी राक्षस का धड है ।राहु -केतु एक ही शरीर के दो अंग हैं ।चुगली के कारण सूर्य -चन्द्र को ग्रसित्कर सृष्टि में भय फैलाते हैं । ब्रेहत्संहिता के राहु -चाराध्याय में लिखा है -"मुख पुच्छ विभक्ताग भुजंग कार पुम दिशंत्यांये "अर्थात -मुख और से विभक्त अंग जिसका सर्प का आकार है ,वही राहु का आकार है ।
---कामरत्न अध्याय 64 शलोक -47 में सर्प को ही काल कहा गया है ।
---16वीं शताब्दी के विद्वान मानसागर ने "मानसागरी "नामक ग्रन्थ की रचना की ।उन्होंने अरिष्ट योगों पर चर्चा करते हुए अध्याय -4-के शलोक 10-में लिखा है ----
           "लग्नाश्च सप्तमस्थाने शनि -राहु सन्युतौ ।
             सर्पेना बाधा तस्यौक्ता शय्यायाम स्वपितोपी च ।।
--भाव -सातवें भावगत शनि -सूर्य व राहु की युति हो तो शय्या पर सोते हुए व्यक्ति को भी सांप काट लेता है ।फलित ज्योतिष पर निरंतर अध्ययन -अनुसन्धान करने वाले आचार्यों ने देखा कि राहु -केतु के मध्य सभी ग्रह अव्यवस्थित होने पर -जातक का जीवन ज्यादा कष्टमय रहता है ।तो इसे "कालसर्पयोग "की संज्ञा दे दी होगी ।वस्तुतः -कालसर्पयोग का ही परिष्कृत स्वरुप है ।।
-----भवदीय निवेदक -पंडित कन्हैयालाल "झा शास्त्री "{मेरठ -उत्तर प्रदेश }
निःशुल्क ज्योतिष सेवा एकबार सभी मित्रों को -रात्रि -8 -से 9.30 पर मिलेगी ।
    हेल्प लाइन {संपर्क -सूत्र }द्वारा प्राप्त करें -09897701636--09358885616

शुक्रवार, 22 जून 2012

"The country - from 3 to 062,012 foreign fortnightly astrology -20-06 idea - long?"

"The country - from 3 to 062,012 foreign fortnightly astrology -20-06 idea - long?" - Five Tuesday in the month of fruit is not perfect ----
          
" "यत्र मासे महि सुनोर्जयानते पंच्वासराह ।
            रक्तेनपूरिता पृथ्वी छ्त्रभंगास्तदा भवेत् ।।

--- Quote - politicians Kichtan is due to the unexpected surprises. Regional government not Sanukul time. Knyagt Mon, Tue sum of two months will be stricken. Religious frenzy Bdengen the violence. Will put the fear of terror. Ruling coalition If resonant scattering in the tone of wonder .. ------"शनैश्चर धरापुत्रा वेकस्थो वृष्टिकारको ।
           तदा च तावती वृष्टिर्यावती गृह पतिनी ।।

------- Mon, Tue to the sum of the rain, but will not be less natural Mahotpat. Consider the -45% decline in prices ----- fast is a sign of recession. Materials shortages will increase in the current prices. 25 - June - Fri and 27 in the way - will cause major changes in June Fri. So - Markit's position will remain uncertain. --- Sky Signs -21 - June = ardra the Sun in Capricorn in the ascendant is at -22-18. Megesh - Trgrhi yoga master is nervous. - Timely rains this year will all be replaced with good yields. The side storm - storms, heavy thunder, Badlchal would be, but the lack of rain will continue. Rotten will heat. Can spread deadly Vimarian .. ----- Applicant - Pt Kanhaiyalal "Jha Shastri} {Meerut -India}
  
Contact Helpline {source} -09897701636-09358885616

मंगलवार, 19 जून 2012

"सर्प का -"कालसर्पयोग"से सम्बन्ध एक नजर ?"

"सर्प का -"कालसर्पयोग"से सम्बन्ध एक नजर ?"
---सर्प का भारतीय संस्कृति से गहरा सम्बन्ध है ।एक बार महर्षि "सुश्रुत "ने वैद्य धन्वन्तरी से पूछा कि हे भगवन !सर्पों की संख्या और उनके भेद बतायें ?वैद्य धन्वन्तरी ने कहा कि वासुकि जिनमे श्रेष्ठ हैं ,ऐसे  तक्षक आदि सर्प असंख्य हैं ।ये सर्प अन्तरिक्ष एवं पाताललोक के वासी हैं ।पृथ्वी पर पाये जाने वाले नामधारी सर्पों के भेद अस्सी प्रकार के हैं ।
----भारतीय वांग्मय में विषधर सर्पों की पूजा होती है ।हिन्दू मान्यताओं में सर्प को मारना उचित नहीं समझा जाता -तथा जहाँ -तहाँ उनके मंदिर भी पाए जाते हैं ।नागपंचमी को सर्पों की विशेष पूजा का प्रावधान है ।पुराणों में शेषनाग का वर्णन है ।भगवान श्रीकृष्ण ने यमुना नदी से कालिया नाग को नाथा था ।सर्पों के बारे में पुराणों में अनेक  कथाये प्रचलित हैं ।सर्पों को देवयोनि का प्राणी माना जाता है ।नए भवन के निर्माण समय नीव में सर्प की पूजाकर चांदी का सर्प रखा जाता है ।वेद के अनेक मंत्र सर्प से सम्बंधित हैं ।
--------नाग की हत्या जन्म जन्मान्तर तक पीछा नहीं छोड़ती है ।नागवध का शाप पुत्र -संतति में बाधक होता है ।कई स्थानों पर नागवध शाप दूर करने के लिए "पिष्टमय नाग "का विधिवत पूजन करके दहन किया जाता है ।फिर उस नाग की भस्मी के तुल्य सुवर्ण दान करने का विधान है ।
----शास्त्रों में सर्प को काल का पर्याय कहा गया है ।काल -आदि ,मध्य ,अन्त से रहित है ।मनुश्यादी प्राणियों का जीवन -मरण काल के आधीन है ।काल सर्वथा गतिशील है ।
-----कालसर्प योग सम्भवतः समय की गति से जुड़ा हुआ योग है !!
-------निवेदक पंडित कन्हैयालाल "झा शास्त्री {मेरठ -उत्तर प्रदेश }

"Kalsarpa What is yoga?"

"Kalsarpa What is yoga?"
- Much Kalsrpyog originally came from where? Where astrology was in the beginning? Who was the founder Acharya? Kalsrpyog has the effect or not?
Yoga when the Jataka ------ chart review should consider whether a solution to these queries is absolutely necessary in today's scientific age.
When all the planets Rahu and Ketu in the horoscope ----- typically capture are in the middle - it is the sum Kalsarpa. Rahu and Ketu the snake the snake's face is asking for.
---- Period means - death. The other planet is not strong, then the sum is Kalsrpyog early-born baby's death. If is live - death - is like suffering. Of yoga in astrology recognition is often indicative of Ashubfl ..
------ Sincerely - applicant - Pt Kanhaiyalal "Jha Shastri" {Meerut - Uttar Pradesh}
Free Astrology Services - Night -8 - nightly from 9:30-to} {{Contact the help line once as a friend on Facebook can be obtained by the formula} - {09897701636-09358885616}
{2} ----- = 500 lifetime membership fee of astrological information, the information can get your family .....

"कालसर्प योग किसे कहते हैं ?"

"कालसर्प योग किसे कहते हैं ?"
--बहुचर्चित कालसर्पयोग मूलतः कहाँ से आया ?फलित ज्योतिष में इसकी शुरुआत कहाँ से हुई ?इसके प्रवर्तक आचार्य कौन थे ?कालसर्पयोग का प्रभाव होता भी है या नहीं ?
------जातक की कुण्डली का अवलोकन करते समय इस योग पर विचार करना चाहिये या नहीं ?इन प्रशनों का समाधान आज के वैज्ञानिक युग में नितांत आवश्यक है ।
-----समान्यतः जन्मकुंडली के समस्त ग्रह जब राहु और केतु के बीच में कैद हो जाते हैं -तो उसे कालसर्प योग कहते हैं ।राहु को सर्प का मुख और केतु को सर्प की पूछ कहते हैं ।
----काल का अर्थ है -मृत्यु ।यदि अन्य ग्रह योग बलवान न हो तो कालसर्पयोग में जन्मे शिशु की मृत्यु शीघ्र हो जाती है ।यदि जीवित रहता है तो -मृत्यु -तुल्य कष्ट भोगता है ।ज्योतिष शास्त्र में इस योग के प्रति मान्यता प्रायः अशुभफल की सूचक है ।।
------भवदीय -निवेदक -पंडित कन्हैयालाल "झा शास्त्री "{मेरठ -उत्तर प्रदेश }
निःशुल्क ज्योतिष सेवा -रात्रि -8-से 9.30-तक{प्रतिरात्रि }एकबार कोई भी फेसबुक पर मित्र बनकर हेल्प लाइन {सम्पर्क सूत्र }द्वारा प्राप्त कर सकते हैं --{09897701636--09358885616}
{2}-----आजीवन ज्योतिष जानकारी सदस्यता शुल्क =500 देने पर अपने परिवार की भी जानकारी प्राप्त कर सकते हैं ।।

रविवार, 17 जून 2012

"21-12 -2012 -की भविष्यवाणी -सत्यता -असत्यता के लिए हमें विश्व कैलेंडरों पर नजरें डालनी होंगीं ?"

"21-12 -2012 -की भविष्यवाणी -सत्यता -असत्यता के लिए हमें विश्व कैलेंडरों पर नजरें डालनी होंगीं ?"
---माया सभ्यता के मुताबिक -२१-१२-२०१२ में  क़यामत का दिन अर्थात इस्लाम एवं ईसाई धर्मानुसार मनुष्य द्वारा किये गए पाप -पुन्य के निर्णय का अंतिम दिन ,प्रलय ,हंगामा की घडी होगी ?
-----ईसाई कैलेण्डर ---
  --के अनुसार पहले दस महीने का एक साल के हुआ करते थे |अलवन जंत्री ने ग्रेगरीय जंत्री का रूप ले लिया है | इस्वी पूर्व ७१३ वें वर्ष से जनवरी ,फरवरी दो मास जोड़कर इसे १२ मास का कहा जाने लगा है |इसमें सन १५८२ में १० दिन का फर्क पड़ गया था | तबसे प्रति चौथे वर्ष फरवरी लिपियर नाम देकर २९ दिन का होने लगा |प्राकृतिक सौर वर्ष से इसवी सन का वर्ष अभी भी लगभग ९ मिनट कम रह जाता है ||
------हिजरी मुस्लिम वर्ष ------
------३४५ दिन के लगभग है जो कि  कुदरती वर्षमान से ११ दिन प्रतिवर्ष छोटा रह जाता है |यह भी सत्यता की कसौटी पर खरा नहीं उतरता है |इसे हम इस प्रकार से कह सकते हैं कि इस्लाम के अनुयायी अपना कोई निश्चित नियम नहीं बना पाए हैं | सही गणना की जाये तो चौदहवीं सदी अभी शुरू नहीं हुई है ||
---यहूदी जन्त्री-------
-----यद्यपि कान्ति पतिक सौर वर्ष है फिर भी गणनार्थ  कोई निश्चित नियम नहीं है | कभी सितम्बर से तो कभी अक्तूबर में पड़ने वाली अमावस्या से इनका वर्ष शुरू होता है |
---पारसी सन -----
------के सभी मास ३० दिन करके कभी पीछे ५ दिन ,कभी ६ दिन जोड़कर उन्हें गाथा कहा जाता है |निश्चित नियम कोई नहीं है ||
-----माया सभ्यता ------
------के कैलेण्डर की गणना का भी कोई सार मालूम नहीं पड़ता है ,क्योंकि मैक्सिको का युलुम ध्वंसावशेष-सन ५६४ वर्ष का शिलालेश से सिद्ध होता है |वहां के अधिकांश निर्माण वर्ष -१२००व १४५० के बीच के हैं |इससे यह सिद्ध होता है कि इस सभ्यता का वजूद बहुत पुराना नहीं है |--माया सभ्यता वालों ने पृथ्वी की उम्र ५१२६ वर्ष आंकी है | इसे कैसे मन लिया जाये कि पृथ्वी की उम्र इतनी ही है |इतना समय  तो लगभग महाभारत को हुए बीत चूका है | हमारी पृथ्वी तो उससे पहले भी थी ||
----भारतीय गणना ------
-----सौर चान्द्र संवत्सरों का तालमेल सृष्टि के आरम्भकाल से आजतक अक्षुण चला आ रहा है |पंचांग प्रकृति से यथ्वत मेल खता है | पंचाग की गणना नुसार -सन २०१२ में प्रलय या महाप्रलय का समय नहीं आ रहा है ||
--अतः किसी को भयभीत होने की जरुरत नहीं है ||
--भवदीय पंडित कन्हैयालाल झा शास्त्री {मेरठ उत्तर प्रदेश }
--ज्योतिष सेवा निःशुल्क रात्रि ८ से९.३०तक एकबार सभी मित्रों को मिलेगी संपर्क सूत्र द्वारा -09897701636 ,09358885616

ज्योतिष सेवा सदन "झा शास्त्री "{1}: "क्या माया कैलेण्डर में उल्लिखित पृथ्वी की उम्र {5...

ज्योतिष सेवा सदन "झा शास्त्री "{1}: "क्या माया कैलेण्डर में उल्लिखित पृथ्वी की उम्र {5...: "क्या माया कैलेण्डर में उल्लिखित पृथ्वी की उम्र {5126 }अर्थात 2012 तक ही है ? --प्रश्न का उत्तर जानने से पहले हमें कुछ भारतीय -ज्योतिर गणि...

"क्या माया कैलेण्डर में उल्लिखित पृथ्वी की उम्र {5126 }अर्थात 2012 तक ही है ?

"क्या माया कैलेण्डर में उल्लिखित पृथ्वी की उम्र {5126 }अर्थात 2012 तक ही है ?
--प्रश्न का उत्तर जानने से पहले हमें कुछ भारतीय -ज्योतिर गणित {कालगणना }के सन्दर्भ में जानना होगा |
-----सूर्योपनिषद में तो सूर्य को समस्त विश्व की उत्पत्ति तथा लय का कारण कहा है |
        ---"सूर्यात भवन्ति भूतानि सूर्येण पलितानी तू |
               सूर्ये लयं प्राप्नुवन्ति यः सूर्यः सोहम्मेव च ||
---भाव -सूर्य चन्द्र अन्यान्य ग्रह नक्षत्र काल के करता अकर्ता कहे गए हैं |सूर्य सिद्धांत -१/१० के अनुसार काल दो प्रकार का होता है ---एक अव्यय अनंत रूप रहने वाला महाकाल है ,दूसरा सावयव गणना करने योग्य है | मूर्तरूप काल घटी पल ,विपल ,तिथि ,मास ,संवत्सर ,कल्प कल्पान्तर के रूप में गिना जाता है |
---सृष्टि कर्ता ब्रह्माजी हैं | चार युग {कृत ,त्रेता ,द्वापर और कलयुग} का एक महायुग होता है | जिसकी सौर वर्ष संख्या -४३२०००० होती है | इकहत्तर महायुग का एक मन्वंतर होता है | प्रत्येक कल्प में १४मन्वन्तर और १४ इन्द्र बीत जाते हैं |एक कल्प की सौ वर्ष संख्या -4318272000 कही गयी है |
-------कल्पान्त में ब्रह्मा जी का दिन समाप्त होते ही प्रलय जैसी स्थिति उत्पन्न हो जाती है | वर्तमान में सृष्टि की रचना हुए -१९५५८८५१०९ वर्ष बीते हैं |इससे स्पष्ट है कि अभी महा प्रलय होने में -२३६२३८६८९१ इतने वर्ष और लगेंगें |
------ऐसा भी नहीं है कि इतनी लम्बी अवधि में प्राकृत में कोई उत्पात न होता हो |अन्तरिक्ष में जब -जब ग्रह अंशसाम्य होते हैं-अथवा ग्रहयुद्ध के संयोग बनते हैं |तब -तब वसुंधरा पर नाना प्रकार के महोत्पत हुआ करते हैं |प्रकृति साम्यावस्था है |जब -जब इसके संतुलन को प्राणी बिगाड़ते हैं ,तब -तब प्रकृति प्रकुपित होकर बड़ी मात्रा में संहार करती है अथवा किसी को माध्यम बनाकर उसके द्वारा विनाशलीला कराया करती है | धर्म की हनी होती है |क्षमाशीलता घटती जाती है |रजोगुण और तमोगुण अपनी चरम सीमा पर होते हैं | तब भयंकर  युद्ध  हुआ करते हैं अधर्मी  दुराचारियों का विनाश  होता है |     
-------यदा यदा ही धर्मस्य ग्लानिर्भवति भारत |
          अभ्युथान धर्मस्य तदात्मानं सृजाम्यहम ||
----नोट -कुदरत के खिलाफ जब -जब क्रूर कारनामे होते हैं ,तब -तब विश्व में उत्पात तो होते ही हैं |भविष्य  के गर्त में यथार्थ क्या है ,इसे तो केवल ईस्वर ही जनता है-परन्तु इतना अवश्य है कि विश्व विनाश की ओर नपे तुले क़दमों से बढ़ता चला जा रहा है |
--भवदीय पंडित कन्हैयालाल "झा शास्त्री" {मेरठ उत्तर प्रदेश }
  निःशुल्क ज्योतिष सेवा सभी मित्रों को एकबार ही मिल पायेगी  सम्पर्कसूत्र {हेल्प लाइन } के द्वरा रात्रि - 8  से 9 .३० पर | {आजीवन जानकारी के लिए सदस्य बनना होगा ?} --09897701636 --09358885616  

शुक्रवार, 15 जून 2012

ज्योतिष सेवा सदन "झा शास्त्री ": "शनि की साढ़ेसाती विचार -कुंडली में आपके पैरों के ...

ज्योतिष सेवा सदन "झा शास्त्री ": "शनि की साढ़ेसाती विचार -कुंडली में आपके पैरों के ...: "शनि की साढ़ेसाती विचार -कुंडली में आपके पैरों के प्रभाव ?" --जिस राशि में शनि भ्रमण करता है उससे बारहवी और दूसरी राशि को  भी त्रस्त {पीड़ित...

"शनि की साढ़ेसाती विचार -कुंडली में आपके पैरों के प्रभाव ?"

"शनि की साढ़ेसाती विचार -कुंडली में आपके पैरों के प्रभाव ?"
--जिस राशि में शनि भ्रमण करता है उससे बारहवी और दूसरी राशि को  भी त्रस्त {पीड़ित } करता है |तीन राशियों का भोगकाल साढ़ेसात वर्षों का होता है |शनि की साढ़ेसाती लगने से -१०० दिनों तक जातक के मुख पर प्रभाव रहता है --ये हानिकारक होता है |ऐसे ही ४०० दिनों तक दक्षिण भुजा  पर शनि का प्रभाव रहता है --जो जातक को विजय दिलाता है | ६०० दिनों तक जातक के चरणों में शनि का प्रभाव रहता है -जो जातक को यत्र -तत्र भ्रमण कराता रहता है | ४०० दिनों तक वामभुजा के ऊपर शनि का प्रभाव रहता है -जो जातक को -दुःख प्रदान करता है | ५०० दिनों तक जातक के उदार पर शनि का प्रभाव रहता है -जो जातक को लाभ देता है | ३०० दिनों तक जातक के मस्तक पर शनि का प्रभाव रहता है-जो जातक को राज्य का लाभ दिलाता है | २०० दिनों तक जातक के नेत्रों पर शनि का प्रभाव रहता है -जो जातक को दुःख प्रदान करता है |२०० दिनों तक गुदा में प्रभाव रहता है शनि का -जो जातक को दुःख प्रदान करता है --इस प्रकार से २७०० दिनों तक शनि की साढ़ेसाती रहती है -जो समयानुसार -क्रम से जातक को लाभ या हानी देती है ||
----जातक के जन्म होते ही अभिभावक -अपने शिशु के पैर की कुंडली में प्रभाव देखते है --जब जातक जन्म लेता है -तो चंद्रमा की स्थिति से पैरों की जानकारी मिलती है -कुंडली के -१,६,११ भाव में चन्द्रमा हो तो -शिशु के स्वर्ण पैर होते हैं -प्रभाव -हानिकारक माना जाता है |२,५,९ भाव में चन्द्रमा होने से -रजत पैर माने जाते हैं -जो लाभदायक होते हैं |३,७,१० भाव में चन्द्रमा होने पर -ताम्बे के पैर होते हैं जो -उत्तम माने जाते हैं | ४,८,१२ भाव में चन्द्रमा होने पर -लोहे के पैर माने जाते हैं -जो हानिकारक होते हैं |
   ----"{लोहे धन विनाशः स्यान्सर्व सौखयम च }
---भवदीय -पंडित कन्हैयालाल " झा  शास्त्री "

गुरुवार, 14 जून 2012

"पंचकों में क्या करें ? क्या नहीं करें?"

    "पंचकों में क्या करें ? क्या नहीं करें?"
--रत्नमाला ग्रन्थ के अनुसार -धनिष्ठा ,शतभिषा ,पूर्वाभाद्रपद,उत्तरा भाद्रपद और रेवती इन पञ्च नक्षत्रों को पंचक कहते हैं |
   "वसवोतर दलादी पंचके याम्य्दिग्गम्नेह गोपनम|
    प्रेतदाह त्रीण काष्ठ संग्रह  श्य्यादिकवि तननम च वर्जयेत ||
----भाव --पंचकों में दक्षिण दिशा की यात्रा ,वायुयान की सवारी करना,मकान की छत या लेंटर डालना ,झोपडी तैय्यार करना,मृतक का अग्निसंस्कार करना,तिनके तोडना ,काष्ठ्संग्रह करना,चारपाई {ख़त }बनवाना {बुनवाना },पलग कुर्सी बनवाना ,स्तम्भारोपन,त्रीण ताम्बा  ,पीतल  का संचय करना वर्जित कहा गया  है   |
---पंचकों में हानि - लाभ  अन्य कार्य पांचगुना,त्रिपुष्कर योग में तीन गुणा तथा द्विपुष्कर योग में दो गुणा फल मिलने की सम्भावना रहती है |
-----विधिवत अशुभ संयोग बन पड़े तो नक्षत्र पूजा ,दान पुण्यार्जन ,द्विजभोजन सम्मान करने पर कार्य  क्षेत्र       में  हानी होने का अंदेशा नहीं रहता है  शुभकार्यों  में तो हमेशा शुभ ही मिलते  हैं ।
------ध्यान रहे --- मुहुर्तग्रंथों में विवाह ,यज्ञोपवीत, मुंडन संस्कार ,गृहारंभ ,गृहप्रवेश ,वधुप्रवेश ,आदि देवपूजन ,व्रत ,उद्यापन तथा होली ,दीपावली ,रक्षाबंधन ,भैय्यादूज ,करवाचौथ अदि पर्वोत्सवों में पंचक निशेध के विषय में कहीं कुछ नहीं लिखा ,अपितु धनिष्टादी  पांचों नक्षत्रों को मंगलोत्सव में शुभ लिखा है ।
    { देखें ---वृहद्दैवग्यरंजनग्रन्थ  में }
-----भवदीय -पंडित कन्हैयालाल "झा  शास्त्री "

             {मेरठ -"उत्तर प्रदेश }
निःशुल्क ज्योतिष सेवा सभी मित्रों को एकबार अवश्य मिलेगी -हेल्प लाइन {सम्पर्क सूत्र }के द्वारा रात्रि -8से 9.30 तक {प्रति रात्रि }---09897701636-09358885616----।।

मंगलवार, 12 जून 2012

"अपनी -अपनी जन्म तिथियों के स्वाभाव और प्रभाव जानें ?"

 "अपनी -अपनी जन्म तिथियों के स्वाभाव और प्रभाव जानें ?"
--ज्योतिष के दो प्रारूप हैं -गणित और फलित |-गणित को गणना के माध्यम से  ही जाना जा सकता है ,किन्तु समय के आभाव के कारण कुछ जातक - आपकी कुंडली की जानकारी से वंचित रह जाते हैं | उन जातकों के हित के लिए और जिन जातकों को अपनी कुंडली की जानकारी उपलब्ध रहती है उन सभी के लिए भी--अपनी -अपनी जन्म तिथियों की जानकारी के द्वारा -अपने -अपने  कष्टको दूर कर सकते हैं |
----वैदिक प्रक्रिया में सात्विक  बलिदानों के विधान बताये गए हैं-|
जन्म चाहे शुक्ल पक्ष में हो या कृष्ण पक्ष में तिथिओं का फलित यथावत होता है |
{१}-प्रतिपदा तिथि में जन्म हुआ हो तो -- स्वामी अग्निदेव हैं -कष्ट तिथि आपकी द्वादशी होगी --शक्कर एवं घी की आहुति देने से {हवन में }लाभ होगा |-दान आप -घी एवं अन्न का करें |
{२}-द्वितीया तिथि में जन्म हुआ हो तो --आपके स्वामी -ब्रह्मा हैं,कष्दायक तिथि पंचमी रहेगी ,पायस{खीर }की आहुति देने से लाभ होगा,---भोजन का दान करने से सुख समृद्धि आएगी  |
{३}-तृतीया तिथि में जन्म हुआ हो तो - इष्टदेव -देवी हैं ,सप्तमी तिथि आपके लिए हानिकारक रहेगी ,घी और अन्न की आहुति से लाभ होगा ,-दान आप रक्तवस्त्र का करें -अत्यधिक प्रसन्नता मिलेगी ||
{४}-चतुर्थी तिथि में आपका जन्म हुआ हो तो --इष्टदेव आपके गणेशजी हैं ,पूर्णिमा तिथि आपके लिए अहितकर रहेगी ,मिष्टान की आहुति देने से-प्रसन्नता मिलेगी ,रत्न मूंगा का दान से लक्ष्मी की प्राप्ति होगी ||
{५}-पंचमी तिथि में आपका जन्म हुआ हो तो -इष्टदेव आपके नागदेव हैं ,षष्ठी तिथि आपके लिए अहितकर रहेगी ,खीर की आहुति से लाभ होगा ,दूध का दान से प्रसन्नता मिलेगी ||
{६}-षष्ठी तिथि में आपका जन्म हुआ हो तो -इष्टदेव आपके कार्तिकजी हैं ,द्वादशी तिथि कष्दायक रहेगी आपके लिए ,मोदक की आहुति से लाभ होगा ,चित्रित वस्त्र का दान से उन्नति होगी आपकी ||
{७}-सप्तमी तिथि में आपका जन्म हुआ हो तो -इष्टदेव आपके सूर्यदेव हैं ,अष्टमी तिथि में हानी होगी आपको ,खीर की आहुति से लाभ मिलेगा ,ताम्बे के पत्र का दान से लक्ष्मी की प्राप्ति होगी ||
{८}-अष्टमी तिथि में आपका जन्म हुआ हो तो - इष्टदेव आपके शिव हैं ,त्रयोदशी तिथि हानिकारक रहेगी ,सामग्री { शाकल्य }की आहुति से लाभ होगा ,पीतवस्त्र का दान से पद और गरिमा मिलेगी |
{९}-नवमी तिथि में आपका जन्म हुआ हो तो -इष्टदेव आपकी दुर्गा हैं ,तृतीया तिथि हानिकारक रहेगी ,मिष्ठान्न की आहुति से उन्नति होगी ,रक्तवस्त्र का दान से लाभ होगा |
{१०}-दशमी तिथि में आपका जन्म हुआ हो तो -इष्टदेव आपके यमदेव हैं ,दशमी तिथि आपके लिए अहितकर रहेगी,शाकल्य की आहुति से उन्नति होगी ,नीलवस्त्र  का दान से रोग शोक नहीं होंगें ||
{११}एकादशी तिथि में आपका जन्म हुआ हो तो --आपके इष्टदेव विस्वेदेव हैं , सप्तमी तिथि हानिकारक रहेगी ,मोदक की आहुति से लाभ होगा ,पीतवस्त्र का दान से उन्नति होगी |
{१२} द्वादशी तिथि में आपका जन्म हुआ हो तो -इष्टदेव आपके विष्णुदेव हैं ,सप्तमी तिथि हानिकारक रहेगी ,मिष्ठान की आहुति से लाभ होगा ,स्वेत्वस्त्र का दान से उन्नति होगी |
{१३}त्रयोदशी तिथि में आपका जन्म हुआ हो तो-इष्टदेव आपके कामदेव हैं ,दशमी तिथि हानिकारक रहेगी ,दही और शर्करा की आहुति से लाभ होगा ,स्वर्ण का दान से राजयोग बनेगा |
{१४}-चतुर्दशी  तिथि में जन्म हुआ हो तो -- इष्टदेव आपके शिव हैं ,अमावस तिथि हानिकारक रहेगी ,शाकल्य  की आहुति से लाभ होगा,रजत का दान या अभिषेक से उन्नति होगी ||
{१५}पूणिमा तिथि में जन्म हुआ हो तो -आपके इष्टदेव चन्द्रमा हैं ,दही का दान से लाभ होगा ,चंडी का दान से उन्नति होगी |
{१६}-अमावस तिथि में जन्म हुआ हो तो --इष्टदेव आपके पितर हैं,तृतीया तिथि आपके लिए अहितकर रहेगी ,पका अन्न की आहुति से लाभ मिलेगा {खीर },सुन्दर भूदेव को भोजन करने से लाभ होगा ||
-----सभी मित्र बंधू अपनी -अपनी तिथि में जन्म के अनुसार प्रयोग करके देखें अति लाभ होगा ||
--निवेदक -पंडित कन्हैयालाल झा शास्त्री {मेरठ उत्तर प्रदेश }
  निःशुल्क ज्योतिष सेवा रात्रि 8  से .9  ३० तक  प्रत्येक रात्रि सभी मित्रों के लिए उपलब्ध रहती है | हेल्प लाइन के द्वारा यह सेवा प्राप्त करें == 09897701636 ,09358885616  

रविवार, 10 जून 2012

"जन्मराशि और नामराशि का उपयोग कर्म के अनुसार करें ?"

  "जन्मराशि और नामराशि का उपयोग कर्म के अनुसार करें ?"
---जिन जातकों को अपनी जन्मराशि और प्रचलित नामराशि की जानकारी हों--वो जातक अपने -अपने कार्य के अनुसार राशि का उपयोग करें ---
----"विवाहे सर्वमांगल्ये यात्रा दोग्रहगोचरे |
      जन्मराशे प्रधानत्वं नाम राशि न चिन्तये ||
--भाव -विवाह के समय ,सभी मंगल कार्य के समय तथा ग्रहों की स्थिति{राशि फल } देखने के समय जन्म राशि से विचार करना चाहिए न कि--अपने प्रचलित नामराशि का ||
----देशे ग्रामे गृहे युद्धे सेवायाम व्यवहारके |
     नाम राशेह प्रधानत्वं जन्म राशि न चिन्तये ||
----भाव --किसी देश में निवास करना हो ,किसी शहर में रहना हो ,मकान बनाना हो,नौकरी करनी हो या फिर तत्काल के कोई भी कार्य हो -तो प्रचलित नाम की राशि का  उपयोग करना चाहिए न कि जन्मराशि का |
----विवाहं घट्नम चैव लग्नजम ग्रह्जम बलम |
     नामभाद विचिंत्येव सर्वजन्म न ज्ञायते ||
--भाव -अगर जन्मराशि की जानकारी न हो तो -तत्काल के लग्न के अनुसार कार्य करना चाहिए और वो भी ज्ञात न हो तो -अपनी प्रचलित नाम राशि के अनुसार कार्य करने चाहिए ||
--घात तिथिर घतवारह घात नक्षत्र मेव च |
  यात्रायाम वर्जयत प्राग्य्त्व न्य्कर्म्सू  शोभनम ||
--नोट ध्यान दें -यात्रा के समय घाततिथि,घातवार,एवं घातनक्षत्र में यात्रा न करें ||
  भवदीय निवेदक -पंडित कन्हैयालाल झा शास्त्री {मेरठ उतर प्रदेश }
  निःशुल्क ज्योतिष सेवा सभी मित्रों को एकबार अवश्य मिलेगी -संपर्क सूत्र द्वरा -प्रति रात्रि -8  से९.30  तक =09358885616 --09897701636   

"जुड़ने से पहले-एक नजर निवेदन पर डालें ?"

  "जुड़ने से पहले-एक नजर निवेदन पर डालें ?"
--सभी "ज्योतिष सेवा सदन " से जुड़ने वाले एवं जुड़े हुए मित्र बंधुओं से निवेदक है ,कि आप सभी इन नियमों का सदा पालन  करें ?
--{१}-ज्योतिष सेवा सदन देश -विदेशों में रह रहे सभी मित्रों को अपने साथ निरंतर ज्योतिष एवं कर्मकांड की सलाह और ज्ञान का आदान- प्रदान निःशुल्कआजीवन देता रहेगा देता है ,लेखों के माध्यम से ||
{२}-ज्योतिष सेवा सदन के सदस्य वही बन सकते हैं-जो आदर करना और आदर देना जानते हैं ,जो संस्कृति और संस्कारों से अपने आपको बांधे रखना चाहते
 हैं |
{३}-ज्योतिष सेवा सदन- के कोई भी कहीं के भी सदस्य बन सकते हैं ,किन्तु आस्थावान ही बने | ज्योतिष सेवा केवल निःशुल्क एकबार मित्रों को ही मिल पायेगी चाहे आप नेट पर जहाँ भी जुड़ें हों --ऑरकुट ,फेसबुक ,ट्विट्टर ,इबीबो ,हि५ ,जीमेल ,होटमेल,याहू ,नेट्लोग--ब्लॉग पोस्ट -आदि -आदि कहीं भी -ज्योतिष सेवा सदन के नाम से ही उपलब्ध है ||
{४}-ज्योतिष सेवा सदन -की सेवा अगर आपको अच्छी लगती है ,साथ ही अपने परिवार की जानकारी भी चाहते हैं ,निरंतर जुड़ें रहना चाहते हैं ,सलाह और सुगम पथ की जानकारी चाहते हैं तो आपको -ज्योतिष सेवा सदन का सदस्य बनना पड़ेगा --जिसका आजीवन शुल्क 500  रूपरे अदा करने पड़ते हैं ,तभी आप आजीवन जानकारी मौखिक प्राप्त कर पायेंगें ---लेखों के द्वरा हम निरंतर सभी सदस्यों तक पहुँचने की कोशिश करते रहते हैं ||
{५}-ज्योतिष की जानकारी ,या विशेष सलाह आप केवल हेल्प लाइन के माध्यम से ही लें --क्यों की हम लिखने में असमर्थ रहते हैं ||
{६}-मित्रों की अत्यधिक संख्या होने के कारण-ज्योतिष सेवा का समय हमने -रात्रि ८ से 9 .30  कर दिया है आगे और समय बढ़ा देंगें-ताकि किसी भी मित्रों को दिक्कत न हो ?
भवदीय निवेदक -पंडित कन्हैयालाल झा शास्त्री {मेरठ उत्तर प्रदेश }
  आपकी सहायतार्थ  नंबर -09358885616 ,09897701636