ज्योतिष सेवा सदन "झा शास्त्री "{मेरठ उत्तर प्रदेश }

निःशुल्क ज्योतिष सेवा ऑनलाइन रात्रि ८ से९ जीमेल पर [पर्तिदिन ]

गुरुवार, 14 जून 2012

"पंचकों में क्या करें ? क्या नहीं करें?"

    "पंचकों में क्या करें ? क्या नहीं करें?"
--रत्नमाला ग्रन्थ के अनुसार -धनिष्ठा ,शतभिषा ,पूर्वाभाद्रपद,उत्तरा भाद्रपद और रेवती इन पञ्च नक्षत्रों को पंचक कहते हैं |
   "वसवोतर दलादी पंचके याम्य्दिग्गम्नेह गोपनम|
    प्रेतदाह त्रीण काष्ठ संग्रह  श्य्यादिकवि तननम च वर्जयेत ||
----भाव --पंचकों में दक्षिण दिशा की यात्रा ,वायुयान की सवारी करना,मकान की छत या लेंटर डालना ,झोपडी तैय्यार करना,मृतक का अग्निसंस्कार करना,तिनके तोडना ,काष्ठ्संग्रह करना,चारपाई {ख़त }बनवाना {बुनवाना },पलग कुर्सी बनवाना ,स्तम्भारोपन,त्रीण ताम्बा  ,पीतल  का संचय करना वर्जित कहा गया  है   |
---पंचकों में हानि - लाभ  अन्य कार्य पांचगुना,त्रिपुष्कर योग में तीन गुणा तथा द्विपुष्कर योग में दो गुणा फल मिलने की सम्भावना रहती है |
-----विधिवत अशुभ संयोग बन पड़े तो नक्षत्र पूजा ,दान पुण्यार्जन ,द्विजभोजन सम्मान करने पर कार्य  क्षेत्र       में  हानी होने का अंदेशा नहीं रहता है  शुभकार्यों  में तो हमेशा शुभ ही मिलते  हैं ।
------ध्यान रहे --- मुहुर्तग्रंथों में विवाह ,यज्ञोपवीत, मुंडन संस्कार ,गृहारंभ ,गृहप्रवेश ,वधुप्रवेश ,आदि देवपूजन ,व्रत ,उद्यापन तथा होली ,दीपावली ,रक्षाबंधन ,भैय्यादूज ,करवाचौथ अदि पर्वोत्सवों में पंचक निशेध के विषय में कहीं कुछ नहीं लिखा ,अपितु धनिष्टादी  पांचों नक्षत्रों को मंगलोत्सव में शुभ लिखा है ।
    { देखें ---वृहद्दैवग्यरंजनग्रन्थ  में }
-----भवदीय -पंडित कन्हैयालाल "झा  शास्त्री "

             {मेरठ -"उत्तर प्रदेश }
निःशुल्क ज्योतिष सेवा सभी मित्रों को एकबार अवश्य मिलेगी -हेल्प लाइन {सम्पर्क सूत्र }के द्वारा रात्रि -8से 9.30 तक {प्रति रात्रि }---09897701636-09358885616----।।

मंगलवार, 12 जून 2012

"अपनी -अपनी जन्म तिथियों के स्वाभाव और प्रभाव जानें ?"

 "अपनी -अपनी जन्म तिथियों के स्वाभाव और प्रभाव जानें ?"
--ज्योतिष के दो प्रारूप हैं -गणित और फलित |-गणित को गणना के माध्यम से  ही जाना जा सकता है ,किन्तु समय के आभाव के कारण कुछ जातक - आपकी कुंडली की जानकारी से वंचित रह जाते हैं | उन जातकों के हित के लिए और जिन जातकों को अपनी कुंडली की जानकारी उपलब्ध रहती है उन सभी के लिए भी--अपनी -अपनी जन्म तिथियों की जानकारी के द्वारा -अपने -अपने  कष्टको दूर कर सकते हैं |
----वैदिक प्रक्रिया में सात्विक  बलिदानों के विधान बताये गए हैं-|
जन्म चाहे शुक्ल पक्ष में हो या कृष्ण पक्ष में तिथिओं का फलित यथावत होता है |
{१}-प्रतिपदा तिथि में जन्म हुआ हो तो -- स्वामी अग्निदेव हैं -कष्ट तिथि आपकी द्वादशी होगी --शक्कर एवं घी की आहुति देने से {हवन में }लाभ होगा |-दान आप -घी एवं अन्न का करें |
{२}-द्वितीया तिथि में जन्म हुआ हो तो --आपके स्वामी -ब्रह्मा हैं,कष्दायक तिथि पंचमी रहेगी ,पायस{खीर }की आहुति देने से लाभ होगा,---भोजन का दान करने से सुख समृद्धि आएगी  |
{३}-तृतीया तिथि में जन्म हुआ हो तो - इष्टदेव -देवी हैं ,सप्तमी तिथि आपके लिए हानिकारक रहेगी ,घी और अन्न की आहुति से लाभ होगा ,-दान आप रक्तवस्त्र का करें -अत्यधिक प्रसन्नता मिलेगी ||
{४}-चतुर्थी तिथि में आपका जन्म हुआ हो तो --इष्टदेव आपके गणेशजी हैं ,पूर्णिमा तिथि आपके लिए अहितकर रहेगी ,मिष्टान की आहुति देने से-प्रसन्नता मिलेगी ,रत्न मूंगा का दान से लक्ष्मी की प्राप्ति होगी ||
{५}-पंचमी तिथि में आपका जन्म हुआ हो तो -इष्टदेव आपके नागदेव हैं ,षष्ठी तिथि आपके लिए अहितकर रहेगी ,खीर की आहुति से लाभ होगा ,दूध का दान से प्रसन्नता मिलेगी ||
{६}-षष्ठी तिथि में आपका जन्म हुआ हो तो -इष्टदेव आपके कार्तिकजी हैं ,द्वादशी तिथि कष्दायक रहेगी आपके लिए ,मोदक की आहुति से लाभ होगा ,चित्रित वस्त्र का दान से उन्नति होगी आपकी ||
{७}-सप्तमी तिथि में आपका जन्म हुआ हो तो -इष्टदेव आपके सूर्यदेव हैं ,अष्टमी तिथि में हानी होगी आपको ,खीर की आहुति से लाभ मिलेगा ,ताम्बे के पत्र का दान से लक्ष्मी की प्राप्ति होगी ||
{८}-अष्टमी तिथि में आपका जन्म हुआ हो तो - इष्टदेव आपके शिव हैं ,त्रयोदशी तिथि हानिकारक रहेगी ,सामग्री { शाकल्य }की आहुति से लाभ होगा ,पीतवस्त्र का दान से पद और गरिमा मिलेगी |
{९}-नवमी तिथि में आपका जन्म हुआ हो तो -इष्टदेव आपकी दुर्गा हैं ,तृतीया तिथि हानिकारक रहेगी ,मिष्ठान्न की आहुति से उन्नति होगी ,रक्तवस्त्र का दान से लाभ होगा |
{१०}-दशमी तिथि में आपका जन्म हुआ हो तो -इष्टदेव आपके यमदेव हैं ,दशमी तिथि आपके लिए अहितकर रहेगी,शाकल्य की आहुति से उन्नति होगी ,नीलवस्त्र  का दान से रोग शोक नहीं होंगें ||
{११}एकादशी तिथि में आपका जन्म हुआ हो तो --आपके इष्टदेव विस्वेदेव हैं , सप्तमी तिथि हानिकारक रहेगी ,मोदक की आहुति से लाभ होगा ,पीतवस्त्र का दान से उन्नति होगी |
{१२} द्वादशी तिथि में आपका जन्म हुआ हो तो -इष्टदेव आपके विष्णुदेव हैं ,सप्तमी तिथि हानिकारक रहेगी ,मिष्ठान की आहुति से लाभ होगा ,स्वेत्वस्त्र का दान से उन्नति होगी |
{१३}त्रयोदशी तिथि में आपका जन्म हुआ हो तो-इष्टदेव आपके कामदेव हैं ,दशमी तिथि हानिकारक रहेगी ,दही और शर्करा की आहुति से लाभ होगा ,स्वर्ण का दान से राजयोग बनेगा |
{१४}-चतुर्दशी  तिथि में जन्म हुआ हो तो -- इष्टदेव आपके शिव हैं ,अमावस तिथि हानिकारक रहेगी ,शाकल्य  की आहुति से लाभ होगा,रजत का दान या अभिषेक से उन्नति होगी ||
{१५}पूणिमा तिथि में जन्म हुआ हो तो -आपके इष्टदेव चन्द्रमा हैं ,दही का दान से लाभ होगा ,चंडी का दान से उन्नति होगी |
{१६}-अमावस तिथि में जन्म हुआ हो तो --इष्टदेव आपके पितर हैं,तृतीया तिथि आपके लिए अहितकर रहेगी ,पका अन्न की आहुति से लाभ मिलेगा {खीर },सुन्दर भूदेव को भोजन करने से लाभ होगा ||
-----सभी मित्र बंधू अपनी -अपनी तिथि में जन्म के अनुसार प्रयोग करके देखें अति लाभ होगा ||
--निवेदक -पंडित कन्हैयालाल झा शास्त्री {मेरठ उत्तर प्रदेश }
  निःशुल्क ज्योतिष सेवा रात्रि 8  से .9  ३० तक  प्रत्येक रात्रि सभी मित्रों के लिए उपलब्ध रहती है | हेल्प लाइन के द्वारा यह सेवा प्राप्त करें == 09897701636 ,09358885616  

रविवार, 10 जून 2012

"जन्मराशि और नामराशि का उपयोग कर्म के अनुसार करें ?"

  "जन्मराशि और नामराशि का उपयोग कर्म के अनुसार करें ?"
---जिन जातकों को अपनी जन्मराशि और प्रचलित नामराशि की जानकारी हों--वो जातक अपने -अपने कार्य के अनुसार राशि का उपयोग करें ---
----"विवाहे सर्वमांगल्ये यात्रा दोग्रहगोचरे |
      जन्मराशे प्रधानत्वं नाम राशि न चिन्तये ||
--भाव -विवाह के समय ,सभी मंगल कार्य के समय तथा ग्रहों की स्थिति{राशि फल } देखने के समय जन्म राशि से विचार करना चाहिए न कि--अपने प्रचलित नामराशि का ||
----देशे ग्रामे गृहे युद्धे सेवायाम व्यवहारके |
     नाम राशेह प्रधानत्वं जन्म राशि न चिन्तये ||
----भाव --किसी देश में निवास करना हो ,किसी शहर में रहना हो ,मकान बनाना हो,नौकरी करनी हो या फिर तत्काल के कोई भी कार्य हो -तो प्रचलित नाम की राशि का  उपयोग करना चाहिए न कि जन्मराशि का |
----विवाहं घट्नम चैव लग्नजम ग्रह्जम बलम |
     नामभाद विचिंत्येव सर्वजन्म न ज्ञायते ||
--भाव -अगर जन्मराशि की जानकारी न हो तो -तत्काल के लग्न के अनुसार कार्य करना चाहिए और वो भी ज्ञात न हो तो -अपनी प्रचलित नाम राशि के अनुसार कार्य करने चाहिए ||
--घात तिथिर घतवारह घात नक्षत्र मेव च |
  यात्रायाम वर्जयत प्राग्य्त्व न्य्कर्म्सू  शोभनम ||
--नोट ध्यान दें -यात्रा के समय घाततिथि,घातवार,एवं घातनक्षत्र में यात्रा न करें ||
  भवदीय निवेदक -पंडित कन्हैयालाल झा शास्त्री {मेरठ उतर प्रदेश }
  निःशुल्क ज्योतिष सेवा सभी मित्रों को एकबार अवश्य मिलेगी -संपर्क सूत्र द्वरा -प्रति रात्रि -8  से९.30  तक =09358885616 --09897701636   

"जुड़ने से पहले-एक नजर निवेदन पर डालें ?"

  "जुड़ने से पहले-एक नजर निवेदन पर डालें ?"
--सभी "ज्योतिष सेवा सदन " से जुड़ने वाले एवं जुड़े हुए मित्र बंधुओं से निवेदक है ,कि आप सभी इन नियमों का सदा पालन  करें ?
--{१}-ज्योतिष सेवा सदन देश -विदेशों में रह रहे सभी मित्रों को अपने साथ निरंतर ज्योतिष एवं कर्मकांड की सलाह और ज्ञान का आदान- प्रदान निःशुल्कआजीवन देता रहेगा देता है ,लेखों के माध्यम से ||
{२}-ज्योतिष सेवा सदन के सदस्य वही बन सकते हैं-जो आदर करना और आदर देना जानते हैं ,जो संस्कृति और संस्कारों से अपने आपको बांधे रखना चाहते
 हैं |
{३}-ज्योतिष सेवा सदन- के कोई भी कहीं के भी सदस्य बन सकते हैं ,किन्तु आस्थावान ही बने | ज्योतिष सेवा केवल निःशुल्क एकबार मित्रों को ही मिल पायेगी चाहे आप नेट पर जहाँ भी जुड़ें हों --ऑरकुट ,फेसबुक ,ट्विट्टर ,इबीबो ,हि५ ,जीमेल ,होटमेल,याहू ,नेट्लोग--ब्लॉग पोस्ट -आदि -आदि कहीं भी -ज्योतिष सेवा सदन के नाम से ही उपलब्ध है ||
{४}-ज्योतिष सेवा सदन -की सेवा अगर आपको अच्छी लगती है ,साथ ही अपने परिवार की जानकारी भी चाहते हैं ,निरंतर जुड़ें रहना चाहते हैं ,सलाह और सुगम पथ की जानकारी चाहते हैं तो आपको -ज्योतिष सेवा सदन का सदस्य बनना पड़ेगा --जिसका आजीवन शुल्क 500  रूपरे अदा करने पड़ते हैं ,तभी आप आजीवन जानकारी मौखिक प्राप्त कर पायेंगें ---लेखों के द्वरा हम निरंतर सभी सदस्यों तक पहुँचने की कोशिश करते रहते हैं ||
{५}-ज्योतिष की जानकारी ,या विशेष सलाह आप केवल हेल्प लाइन के माध्यम से ही लें --क्यों की हम लिखने में असमर्थ रहते हैं ||
{६}-मित्रों की अत्यधिक संख्या होने के कारण-ज्योतिष सेवा का समय हमने -रात्रि ८ से 9 .30  कर दिया है आगे और समय बढ़ा देंगें-ताकि किसी भी मित्रों को दिक्कत न हो ?
भवदीय निवेदक -पंडित कन्हैयालाल झा शास्त्री {मेरठ उत्तर प्रदेश }
  आपकी सहायतार्थ  नंबर -09358885616 ,09897701636      

शुक्रवार, 8 जून 2012

ज्योतिष सेवा सदन "झा शास्त्री "{1}: "Have a nice day,Ram Ram,Namskar"

ज्योतिष सेवा सदन "झा शास्त्री "{1}: "Have a nice day,Ram Ram,Namskar": "Life is oneway road,We can see back,,     But can't go back,,So,Enjoy every second...         Because today's newspaper will be tomorrow...

"Have a nice day,Ram Ram,Namskar"

"Life is oneway road,We can see back,,
    But can't go back,,So,Enjoy every second...
        Because today's newspaper will be tomorrow's waste paper..!!
   By-"jha shastri" jyotish seva sadan-{Meerut-UP} 
                "Have a nice day,Ram Ram,Namskar"   
    free jyotish seva-8to9 pm all friends {once}
        cont---09897701636,09358885616--|

बुधवार, 6 जून 2012

"देश-विदेश पाक्षिक ज्योतिष विचार -5-जून-से १९-जून २०१२ तक ?" ----अतिचारी गते जीवे शनौ वक्रत्व भागते | हा! हा !!, भूतं जगत्सर्वं रुण्ड मुंडा च मेदिनी || -----भाव -गुरु अतिचारी एवं शनि वक्री नव पंचम योग में अति नष्ट है -{-अर्थात उत्तम नहीं है } | इस योग के कारण- मास पर्यंत विश्व के किन्हीं देशों में -रुण्ड -मुंड लुढ़कते नजर आयेंगें -अर्थात -आततायी लोग परास्त होंगें | पश्चिम के देशों में तनाव बढेगा |नेपाल ,चीन ,मंगोलिया ,पाकिस्तान ,अफगानिस्तान ,ईरान ,इराक एवं साउदीअरब में भारी हलचल होगी | यूरोपियन देश एशिया के देशों पर दबाब बनाने का प्रयास करेंगें | सीमाओं पर तनाव बढेगा |भारतीय राजनीति में उठा -पटक जारी रहेगी |चुनावी सरगर्मी बढ़ेगी |मंदिर ,मस्जिद ,गुरुद्वारा -धार्मिक विवाद लडाई के केंद्र में रहेगा |-- "एक रशो यदा यन्ति चत्वारः पंचखेचराः | प्लाव्यन्ति महीं सर्वा रुधिरेण जलें वा || ---भाव जब एक राशि में चार ग्रह होते हैं -तो पृथ्वी जल से या रक्त से रंजित हो जाती है अर्थात शांतिवार्ता ---निष्फल हो सकती है || तेजी मंदी -समय उत्तम होने के कारण -बाजार का रुख नरम रहेगा ----सोना ,चांदी ,मशीनरी ,वाहन ,पेयपदार्थ, फल फूल ,सब्जियों के भावों में बढ़ोत्तरी होगी | शेयर शर्राफामें दोतरफा चाल होगी || आकाश लक्षण -शुक्रोदय के प्रवाव -से आंधी- तूफान ,मेघाडंबर के साथ -साथ बूंदा -बूंदी होगी | तापमान वृद्धि के कारण लोग पीड़ित होंगें | सौर धब्बों का प्रकोप विश्व में भारी क्षति का लक्षण होता है || सदा याद रखें ---"अमंत्रामक्षरं नास्ति मूलं अनौषधम | अयोग्यः पुरुषाः नास्ति योजकः तत्र दुर्लभाः {राजधानी } भाव -संसार में कोई भी वस्तु निरर्थक नहीं है || भवदीय निवेदक --पंडित कन्हैयालाल झा शास्त्री {मेरठ उत्तर प्रदेश }

   "देश-विदेश पाक्षिक ज्योतिष विचार -5-जून-से १९-जून २०१२ तक ?"
 ----अतिचारी गते जीवे शनौ वक्रत्व भागते | हा! हा !!,
     भूतं जगत्सर्वं रुण्ड मुंडा  च मेदिनी ||
-----भाव -गुरु अतिचारी एवं शनि वक्री नव पंचम योग में अति नष्ट है -{-अर्थात उत्तम नहीं है } | इस योग के कारण- मास पर्यंत  विश्व  के किन्हीं देशों में -रुण्ड -मुंड लुढ़कते नजर आयेंगें -अर्थात -आततायी लोग परास्त होंगें | पश्चिम के देशों में तनाव बढेगा |नेपाल ,चीन ,मंगोलिया ,पाकिस्तान ,अफगानिस्तान ,ईरान ,इराक एवं साउदीअरब  में भारी हलचल होगी |  यूरोपियन देश एशिया के देशों पर दबाब बनाने का प्रयास करेंगें | सीमाओं पर तनाव बढेगा |भारतीय राजनीति में उठा -पटक जारी रहेगी |चुनावी सरगर्मी बढ़ेगी |मंदिर ,मस्जिद ,गुरुद्वारा -धार्मिक विवाद लडाई के केंद्र में रहेगा |--
  "एक रशो यदा यन्ति चत्वारः पंचखेचराः |
   प्लाव्यन्ति महीं सर्वा रुधिरेण जलें वा ||
---भाव जब एक राशि में चार ग्रह होते हैं -तो  पृथ्वी जल से या रक्त से रंजित हो जाती है  अर्थात शांतिवार्ता ---निष्फल हो सकती है ||
  तेजी मंदी -समय उत्तम होने के कारण -बाजार का रुख नरम रहेगा ----सोना ,चांदी ,मशीनरी ,वाहन ,पेयपदार्थ, फल फूल ,सब्जियों के भावों में बढ़ोत्तरी होगी | शेयर शर्राफामें दोतरफा चाल होगी ||
आकाश लक्षण -शुक्रोदय के प्रवाव -से आंधी- तूफान ,मेघाडंबर के साथ -साथ बूंदा -बूंदी होगी | तापमान वृद्धि के कारण लोग पीड़ित होंगें | सौर धब्बों का प्रकोप विश्व में भारी क्षति का लक्षण होता है ||
   सदा याद रखें ---"अमंत्रामक्षरं नास्ति मूलं अनौषधम |
                           अयोग्यः पुरुषाः नास्ति योजकः तत्र दुर्लभाः {राजधानी }
   भाव -संसार में कोई भी वस्तु निरर्थक नहीं है ||
भवदीय निवेदक --पंडित कन्हैयालाल झा शास्त्री {मेरठ उत्तर प्रदेश }

सोमवार, 4 जून 2012

ज्योतिष सेवा सदन "झा शास्त्री "{1}: "आज अल्पग्रास" चन्द्र ग्रहण" भारत में कहीं से भी न...

ज्योतिष सेवा सदन "झा शास्त्री "{1}: "आज अल्पग्रास" चन्द्र ग्रहण" भारत में कहीं से भी न...:    "आज अल्पग्रास" चन्द्र ग्रहण" भारत में कहीं से भी नहीं दिखाई देगा ?" दिनांक -४-०६-२०१२ सोमवार को दिन में अल्पग्रास चन्द्र ग्रहण भारत से ब...

"आज अल्पग्रास" चन्द्र ग्रहण" भारत में कहीं से भी नहीं दिखाई देगा ?"

   "आज अल्पग्रास" चन्द्र ग्रहण" भारत में कहीं से भी नहीं दिखाई देगा ?"
दिनांक -४-०६-२०१२ सोमवार को दिन में अल्पग्रास चन्द्र ग्रहण भारत से बाह्य पूर्व के देशों में होगा | भारतीय स्टें ० टा. के अनुसार ग्रहण दिन में ३ बजकर २९ मिनट से शुरू होकर सायं ५ बजकर  ३७ मिनट तक रहेगा |इस ग्रहण को -म्यानमार,थाईलेंड ,जापान ,आष्ट्रेलिया ,चीन ,पूर्वी रूस ,मलेशिया ,फिलीपींस,इंडोनेशिया ,उत्तर -दक्षिण अमेरिका ,मैक्सिको ,पेरू ,अर्जेंटीना ,आदि देशों में देखा जा सकेगा |
----भारत में ग्रहण कहीं से भी दिखाई नहीं देगा --देश के पूर्वी भाग असं ,मिजोरम  ,मेघालय ,अरुणाचल प्रदेश - आदि में चंद्रमा विरल छ्या में से होकर गुजरेगा ,जिसे वास्तव में ग्रहण नहीं माना जायेगा |
  भवदीय -पंडित कन्हैयालाल झा शास्त्री {मेरठ उत्तर प्रदेश }

रविवार, 3 जून 2012

"शिखा के बिना आयु ,तेज ,बल ,ओज और पुरुषार्थ नष्ट हो जाते हैं ?"

   "शिखा के बिना आयु ,तेज ,बल ,ओज और पुरुषार्थ नष्ट हो जाते हैं ?"
-हिन्दुओं के प्रमुख सोलह संस्कारों में "चूडाकरण"या "चौल "एक विशेष संस्कार है |इसी संस्कार में आर्यजाति के प्रतीक अथवा मुख्य  जातीय चिन्ह स्वरूप "शिखा  धारण का विधान है | इसके धारण से आयु ,तेज ,बल ,ओज और पुरुषार्थ की प्राप्ति होती है | पारस्कर ,आश्वलायन,बैखानस ,बौधायन ,अग्निवेश्य  ,आपस्तम्ब और जैमिनीय आदि गुह्य -सूत्र ग्रंथों में चुदकर्म के अंतर्गत शिखा रखने का श्पष्ट विधान मिलता है ||
---सिर के मध्य स्थित केश समूह ही चूड़ा कहलाता है | यही चूड़ा प्रधान शिखा मानी जाति है | वशिष्ठ गोत्र वाले मध्य शिखा से दक्षिण भाग में स्थित केश शिखा को चूड़ा कहते हैं | अत्रि और कश्यप गोत्र वाले मध्यभाग में स्थित शिखा के उभय पार्श्व {अगल -बगल }में स्थित केशों को शिखा कहते हैं ||
--उपनयन काल में मध्य शिखा के अतिरिक्त अन्य गौण शिखाओं के वपन का विधान "निर्णय सिन्धु "  में स्पष्ट रूप से पाया जाता है | महर्षि "हारित" कहते हैं --कि जो लोग मोह ,द्वेष या अज्ञानता से शिखा काट देते हैं ,वे "तप्तकश्छ"व्रत करने से शुद्ध होते हैं ||
--ब्रह्मण ,क्षत्रिय ,वैश्य को शिखा,सूत्र और हिन्दुमात्र को शिखा अवश्य धारण करनी चाहिए | बिना यज्ञोपवित और शिखा के हिन्दुओं का किया गया सभी सत्कार्य व्यर्थ हो जाता है और राक्षस कर्म कहलाता है ||
----शिखा के साथ बल ,बीर्य,आयुवृद्धि ,तेज और पराक्रम का गहरा सम्बन्ध है | इसलिए हिन्दुओं का यह सर्वोत्कृष्ट जातीय चिन्ह माना जाता है | जिस प्रकार फौजी सिपाहियों का फौजी वेश वीरता सूचक है | उसी प्रकार सिर के मध्य भाग में सुरक्षित सुस्थिर शिखा चिरंतन ,आर्य गौरव तथा हिंदुत्व की द्योतक  है |इसलिए शिखा रखना नितांत आवश्यक है ||
------वेदं और योगदर्शन के सिद्धांतों के अनुसार शिखा का अधः स्थित भाग ब्रह्मरंध्र माना गया है | इस ब्रह्मरंध्र  के ऊपर सहश्रदल कमल में अमृत रुपी ब्रह्मा का स्थान है |विधिपूर्वक किये गए वेदादि के स्वाध्याय और सविधि कर्मानुष्ठान से समुत्पन्न अमृतत्व का अतिक्रांत वायुवेग से सहश्रदल की कर्णिका से प्रविष्ट होता है ||
धर्मशास्त्रकारों ने कहा है -कि सनन ,दान ,जप ,होम ,संध्या ,स्वाध्याय और देवार्चन करते समय शिखा में ग्रंथि अवश्य लगानी चाहिए-------"स्नाने दाने जपे होमे संधयायाम देवतार्चने |
                 शिखा ग्रंथि सदा कुर्यादीत्येतन मनुरब्रबीत||
-----वैदिक विज्ञानं से यह बात सिद्ध है कि सर्वव्यापी परमेश्वर परमात्मा की अप्रमेय शक्ति को आकृष्ट करने का सर्वोतम साधन "शिखा -धारण "है |  भवदीय -पंडित कन्हैयालाल झा शास्त्री |
        { मेरठ उत्तर प्रदेश }   

ज्योतिष सेवा सदन "झा शास्त्री "{1}: "कैरियर निर्माण हेतु -कुंडली का निरिक्षण अवश्य करे...

ज्योतिष सेवा सदन "झा शास्त्री "{1}: "कैरियर निर्माण हेतु -कुंडली का निरिक्षण अवश्य करे...:   "कैरियर निर्माण हेतु -कुंडली का निरिक्षण अवश्य करें ?" प्राचीन कल में शिक्षा का मुख्य उद्देश्य ज्ञान प्राप्ति होता था |विद्यार्थी किसी ...

"कैरियर निर्माण हेतु -कुंडली का निरिक्षण अवश्य करें ?"

  "कैरियर निर्माण हेतु -कुंडली का निरिक्षण अवश्य करें ?"
प्राचीन कल में शिक्षा का मुख्य उद्देश्य ज्ञान प्राप्ति होता था |विद्यार्थी किसी योग्य विद्वान के निर्देशन में विभिन्न प्रकार की शिक्षा ग्रहण करते थे |इसके  अतिरिक्त उसे शस्त्र सञ्चालन एवं विभिन्न कलाओं का प्रशिक्षण भी दिया जाता था |किन्तु वर्तमान समय में यह सभी प्रशिक्षण गौण हो गए हैं |शिक्षा की महत्ता बढ़ने व् प्रतिस्पर्धात्मक युग में सजग रहते हुए बालक के बोलने व् समझने लगते ही माता -पिता शिक्षा के बारे में चिंतित हो जाते हैं |कुछ वर्षों बाद सबसे बड़ी समस्या यही होती है कि कौन सा विषय पढ़ायें ,जिससे उनके बच्चे का भविष्य सुखमय हो ?
----{१}-सर्वप्रथम जातक के बचपन से ही उसकी कुंडली विषय की पढाई व् कैरियर चयन में सहायक होती है |
---{२}जातक की कुंडली से तय करना चाहिए कि वह नौकरी करेगा या व्यवसाय |
---{३}-जातक कि २० से ४० वर्ष की उम्र के बिच की ग्रहदशा का सूक्षम अध्ययन कर यह देखना चाहिए कि दशा किस प्रकार के कार्यक्षेत्र का संकेत दे रही है |
----{४}-आगामी गोचर या दशा कार्य क्षेत्र में तरक्की का संकेत दे रही है या नहीं ? इसका भी परीक्षण कर लेना चाहिए |
कुंडली में शिक्षा का योग -----जन्म कुंडली का नवम भाव धर्म त्रिकोण स्थान है ,जिसके स्वामी देव गुरु वृहस्पति हैं | यह भाव शिक्षा में महत्वाकांक्षा व् उच्च शिक्षा तथा उच्च शिक्षा किस स्टार कि होगी इसको दर्शाती है | यदि इसका सम्बन्ध पंचम से हो जाये तो अच्छी शिक्षा मिलती है ||
----शिक्षा का स्तर------जन्मकुंडली  का पंचम भाव बुद्धि ,ज्ञान ,कल्पना ,अतीन्द्रिय ज्ञान,रचनात्मक कार्य ,याददास्त व् पूर्वजन्म के संचित कर्म को दर्शाता है | यह शिक्षा के संकाय का स्तर तय करता है ||
-----शिक्षा किस प्रकार की होगी --------जन्मकुंडली का चतुर्थभाव मन का भाव है |यह इस बात का निर्धारण करता है कि आपकी मानसिक योग्यता किस प्रकार की शिक्षा में होगी |जब भी चतुर्थ भाव का स्वामी छठे ,आठवें या बारहवें भाव में गया हो या नीच राशि,अस्त राशि ,शत्रु राशि में बैठा हो व् करक ग्रह {चंद्रमा } पीड़ित हो तो शिक्षा में मन नहीं लगता है ||
-----शिक्षा का उपयोग -----जन्मकुंडली का द्वितीय भाव -वाणी ,धन ,संचय ,व्यक्ति की मानसिक स्थिति को व्यक्त करता है तथा यह दर्शाता है कि शिक्षा आपने ग्रहण कि है वह आपके लिए उपयोगी है या नहीं |यदि इस भाव पर पाप ग्रह का प्रभाव हो तो जातक शिक्षा का उपयोग नहीं करता है |
  जातक को बचपन से किस विषय की पढाई करवानी चाहिए ,इस हेतु हम मूलतः निम्न चार पाठ्यक्रम{ विषय } को ले सकते हैं --गणित ,जिव विज्ञानं ,कला और वाणिज्य -----
   {१}-गणित ---गणित के करक ग्रह बुध का सम्बन्ध यदि जातक के लग्न ,लग्नेश या लग्न नक्षत्र से होता है तो वह गणित में सफल होता है ||
 {२}-शनि एवं मंगल किसी भी प्रकार से सम्बन्ध बनायें तो जातक -मशीनरी कार्य में दशा होता है ||
---जीव विज्ञानं -सूर्य का जल राशिस्थ होना ,छठे एवं दशम भाव /भावेश के बीच सम्बन्ध ,सूर्य एवं मंगल का सम्बन्ध आदि चिकित्सा क्षेत्र में पढाई के करक होते हैं
---कला ------पंचम /पंचमेश एवं करक गुरु ग्रह का पीड़ित होना कला के क्षेत्र में पढाई का करक होता है | इन पर शुभ ग्रहों की दृष्टि पढाई प[उरी करवाने में सक्षम होती है ||
--वाणिज्य --लग्न /लग्नेश का सम्बन्ध बुध के साथ -साथ गुरु से भी हो तो जातक वाणिज्य की पढाई सफलता पूर्वक करता है ||
  आइये जानते हैं अच्छी शिक्षा के योग -----
{१}-द्वितीयेश या वृहस्पति केंद्र या त्रिकोण में हों |
{२}-पंचम भाव में बुध की स्थिति अथवा दृष्टि या बृहस्पति और शुक्र की युति हो |
{३}-पंचमेश की पंचम भाव में वृहस्पति या शुक्र के साथ युति हो ?
{४}-बृहस्पति ,शुक्र और बुध में से कोई भी केंद्र या त्रिकोण में हो ?
---नोट - शिक्षा की सलाह अपने -अपने पुरोहित जी आचार्यजी से लें और अपनी -अपनी संतानों को शिक्षा की सही राह दिखाएं ||
   भवदीय निवेदक -पंडित कन्हैयालाल झा शास्त्री {मेरठ -उत्तर प्रदेश }
  निःशुल्क ज्योतिष सेवा एकबार ही सभी मित्रों को संपर्क सूत्र द्वारा ही मिल पायेगी -रात्रि -8  से 9 .३० में =09897701636 ,09358885616    

शनिवार, 2 जून 2012

ज्योतिष सेवा सदन "झा शास्त्री "{1}: "ज्योतिष के माध्यम से शिक्षा का चयन उपयोगी हो सकता...

ज्योतिष सेवा सदन "झा शास्त्री "{1}: "ज्योतिष के माध्यम से शिक्षा का चयन उपयोगी हो सकता...:    "ज्योतिष के माध्यम से शिक्षा का चयन उपयोगी हो सकता है ?" प्रायः हम देखते हैं कि कुछ व्यवसाय /पदों को प्राप्त करके भी हम छोड़ देते हैं य...

"ज्योतिष के माध्यम से शिक्षा का चयन उपयोगी हो सकता है ?"

   "ज्योतिष के माध्यम से शिक्षा का चयन उपयोगी हो सकता है ?"
प्रायः हम देखते हैं कि कुछ व्यवसाय /पदों को प्राप्त करके भी हम छोड़ देते हैं या अन्य व्यवसाय से जुड़ जाते हैं अथवा अनेक व्यवसाय एक साथ करने लग जाते हैं |इसका मुख्य कारन जातक की कुंडली में ग्रहों की स्थिति होती है |
एक सभ्य ,सुसंस्कृत एवं जिम्मेदार नागरिक बनने में शिक्षा की महत्वपूर्ण भूमिका है |आर्थिक एवं प्रतिस्पर्धा के इस युग में उचित एवं सही माध्यम या सही विषय  चयन कर अच्छे परिणाम प्राप्त किये जा सकते हैं |कोई व्यक्ति kitni शिक्षा प्राप्त करेगा या उसका पढाई के प्रति क्या रुझान होगा ,यह जन्म पत्रिका के माध्यम से जाना जा सकता है |अधिकांश अभिभावकों एवं विद्यार्थियों की चिंता यह रहती है कि क्या पढ़ा जाए ताकि अच्छा कैरियर हो ----
--{१}--सिंह राशि हो -सूर्य की अथिति उत्तम हो---तो आप --चिकित्सा ,शरीर विज्ञानं,प्राणीशास्त्र,नेत्र चिकित्सा ,राजभाषा ,प्रशासन ,राजनीति एवं जीवविज्ञान के क्षेत्र में सफल हो सकते हैं ||
{२}-कर्क राशि हो --चंद्रमा की स्थिति उत्तम हो तो आप ---नर्सिंग ,नाविक शिक्षा ,वनस्पति विज्ञानं ,जंतु विज्ञानं ,{जूलोजी }होटल प्रबंध ,काव्य ,पत्रकारिता ,पर्यटन ,डेयरी विज्ञानं ,जलदाय के क्षेत्र में सफल हो सकते हैं ||
{३}-मेष या वृश्चिक राशि हो मंगल की स्थिति उत्तम हो तो आप -भूमिति {भूमि सम्बन्धी } फौजदारी ,कानून ,इतिहास ,पुलिस सम्बन्धी प्रशिक्षण ,ओवर-सियर प्रशिक्षण,सर्वे ,अभियांत्रिकी ,वायुयान शिक्षा ,शल्य चिकित्सा ,विज्ञानं ,ड्राइविंग ,टेलरिंग या अन्य तकनिकी शिक्षा ,खेल कूद सम्बन्धी प्रशिक्षण ,सैन्य शिक्षा ,दन्त चिकित्सा के क्षेत्र में सफल हो सकते हैं ||
{४}-धनु या मीन- राशि हो ,गुरु प्रबल हों तो आप ---बीजगणित ,द्वितीय भाषा ,आरोग्यशास्त्र विविध ,अर्थशास्त्र ,दर्शन ,मनोविज्ञान ,धार्मिक या आध्यात्मिक शिक्षा के क्षेत्र में सफल हो सकते हैं ||
{५}-मिथुन या कन्या राशि हो साथ ही बुध की स्थिति उत्तम हो तो आप ---गणित ,ज्योतिष ,व्याकरण ,शासन की विभागीय परीक्षाएं ,पदार्थ विज्ञानं ,मानसशास्त्र,हस्तरेखा ज्ञान ,शब्दशास्त्र {भाषा विज्ञानं }टैपिंग ,तत्वज्ञान,पुस्तकालयविज्ञानं,लेखा ,वाणिज्य ,शिक्षक प्रशिक्षणके क्षेत्रों  में सफल हो सकते हैं ||
{६}-वृष या तुला राशि हो साथ ही शुक्र प्रबल हो तो आप ---ललितकला ,{संगीत ,नृत्य ,अभिनय ,चित्रकला ,आदि }फ़िल्म टी० वी०,वेशभूषा ,फैशन ,डिजायनिंग ,काव्य साहित्य एवं अन्य विविध कला के क्षेत्र में सफल हो सकते हैं ||
{७}--मकर या कुम्भ राशि हो शनि की मजबूत स्थिति हो तो आप ----भूगर्भशास्त्र सर्वेक्षण ,अभियांत्रिकी ,ओधोगिकी ,यांत्रिकी ,भवन निर्माण ,मुद्रण कला ,प्रिन्टिंग इत्यादि के क्षेत्रों में सफल हो सकते हैं ||
{८}-यदि आपकी कुंडली में राहु की स्थिति बहुत ही मजबूत है तो आप -तर्कशास्त्र ,हिप्नोटिजम ,मेस्मिरिजम ,करतब के खेल ,{जादू सर्कस आदि } भुत प्रेत सम्बन्धी ज्ञान ,विष चिकित्सा ,एंटी बायोटिक्स इलेक्ट्रोनिक्स  इत्यादि के क्षेत्र में सफल हो सकते हैं ||
{९}--केतु की स्थिति अगर बढियां है आपकी कुंडली में तो आप ---गुप्त विद्याएं,मंत्र -तंत्र सम्बन्धी ज्ञान के क्षेत्रों में निपुण हो सकते हैं ||
भाव -वैज्ञानिक और ओद्योगिक प्रगति के कारण व्यवसायों एवं शैक्षणिक विषयों की संख्या में उत्तरोतर वृद्धि होती जा रही है | अतः ज्योतिष सिधान्तों के आधार पर ग्रहों के पारस्परिक संबंधों को ध्यान में रखते हुए विचार किया जा सकता है |         ---निवेदक -पंडित के० एल० झा शास्त्री{मेरठ उत्तर प्रदेश }
  कृपया निःशुल्क ज्योतिष सेवा रात्रि -8 से 9.30  में संपर्क सूत्र द्वरा ही प्राप्त करें  =09897701636 -09358885616

बुधवार, 30 मई 2012

"रवि योग एवं सिद्धि योग-को जानने की कोशिश करते हैं ?"

   "रवि योग एवं सिद्धि योग-को जानने की कोशिश करते हैं ?"
संसार के सभी शुभ कार्यों {विवाह को छोरकर } में इन योगों का उपयोग कर सकते हैं |--------रवि योग --{१}--रवियोग भी उपरोक्त योगों की तरह सभी शुभ कार्यों में प्रयोग करते हैं | शास्त्रों में-कहा गया है कि-जिस तरह हिमालय का हिम सूर्य के उगने पर गल जाता है और सैकड़ों हाथियों के समूहों को अकेला सिंह भगा देता है ,उसी तरह से -रवि योग भी सभी अशुभ योगों को भगा देता है ,----अर्थात -इस योग में सभी शुभ कार्य निर्विघ्न रूप से पूर्ण होते हैं ||
---{२}-सिद्धि योग ---भी सर्वार्थ सिद्धि आदि और रवि योगों की भांति ही महत्वशाली हैं |उपरोक्त योगों में किये जाने वाले सभी कार्य इसमें भी किये जा सकते हैं |शास्त्रों का कहना है कि सिद्धि योग में यम्घंत ,vish ,आदि कुयोगों का प्रभाव समाप्त हो जाता है ||
  भाव हम हम अपने किसी भी शुभ कार्य  की शुरुआत --इन योगों में करें तो उत्तम रहेगा -किन्तु परामर्श अपने पुरोहित जी से अवश्य लें ||
  भवदीय निवेदक "पंडित के० एल ० झा शास्त्री {किशनपुरी धर्मशाला देहली गेट मेरठ -उत्तर प्रदेश } निःशुल्क ज्योतिष सेवा रात्रि -8  से 9.30  तक प्रति रात्रि सभी मित्रों के लिए उपलब्ध रहती है | ज्योतिष जानकारी केवल संपर्क सूत्र द्वारा ही मिल पायेगी सभी मित्रों को ?--09897701636 ,09358885616    

मंगलवार, 29 मई 2012

ज्योतिष सेवा सदन "झा शास्त्री "{1}: "27 नक्षत्रों की संज्ञा एवं उनमें करने योग्य कर्म ...

ज्योतिष सेवा सदन "झा शास्त्री "{1}: "27 नक्षत्रों की संज्ञा एवं उनमें करने योग्य कर्म ...: --नक्षत्र २७ हैं ,सभी जानते हैं ,किन्तु सभी नक्षत्रों की संज्ञा एवं उन नक्षत्रों में हम  कोन सा कार्ज  करें --शास्त्रकारों के विचार को जा...

"27 नक्षत्रों की संज्ञा एवं उनमें करने योग्य कर्म ?"


--नक्षत्र २७ हैं ,सभी जानते हैं ,किन्तु सभी नक्षत्रों की संज्ञा एवं उन नक्षत्रों में हम  कोन सा कार्ज  करें --शास्त्रकारों के विचार को जाने की कोशिश करते हैं --जिसे हमलोग भी अमुक -अमुक कार्ज नक्षत्रों के अनुसार करें |
-----{१}-उत्तरा फाल्गुनी,उत्तराषाढा,उत्तरा भाद्रपद -रोहिणी और रविवार -यह ध्रुव एवं स्थिर संज्ञक हैं ---इन नक्षत्रों में स्थिर काम-जैसे -गृहराम्भ,बिज बोना ,शांति कर्म {ग्रह आदि शांति }बगीचा लगाना ,तथा मृदु नक्षत्र  मधुर कार्ज  करना शुभ होता है |
--{२}-स्वाति ,पुनर्वसु ,श्रवण ,धनिष्ठा ,शतभिषा --यह नक्षत्र और सोमवार यह चर एवं चल संज्ञक है ,इनमें -वहां ,हाथी,घोडा पर चढ़ना ,फुलवारी आदि लगानासाथ ही यात्रा एवं लघुसंज्ञक कर्म करना भी शुभ रहता है ||
---{३}-पूर्वाफाल्गुनी ,पूर्वाषाढा,पूर्वा भाद्रपद -भरणी ,मघा और मंगलवार यह उग्र तथा क्रूरसंज्ञक हैं,इनमें मारण,अग्नि कार्य ,शुद्धता तथा विष आदि का प्रयोग ,शास्त्र बनाना तथा दारुण संज्ञक नक्षत्रों के कार्य शुभ होते हैं ||
-----{४}-विशाखा ,कृतिका और बुधवार यह मिश्र एवं साधारण संज्ञक हैं ,इनमें अग्नि कार्य,मिश्र नक्षत्रों में कहे हुए कार्य और वृष उत्सर्ग गाय या बैल का दान आदि शब्द से उग्र संज्ञक नक्षत्र के भी कार्य करना शुभ रहता है ||
---{५}-हस्त ,अश्विनी ,पुष्य ,अभिजित ,नक्षत्र और गुरुवार क्षिप्र और लघु संज्ञक हैं ,इनमें दुकान लगाना ,रति ज्ञान {प्रेम  }शास्त्र अध्ययन ,आभूषण बनाना या बनबाना ,शिल्प -चित्र रचना ,कला ,नृत्य आदि सीखना तथा आदि शब्द से चर संज्ञक नक्षत्रों में कहे हुए कार्यों का करना भी शुभ होता है ||
----{६}-मृगशिरा ,रेवती ,चित्रा ,अनुराधा ,और शुक्रवार ये मृदु संज्ञक हैं,इनमें गीत ,वस्त्र ,खेल ,मित्र कार्य एवं आभूषण {गहना }बनाना या धारण करना शुभ होता है ||
---{७}-मूल ,ज्येष्ठा,आर्द्रा ,आश्लेषा और शनिवार यह तीक्ष्ण और दारुण संज्ञक हैं ,इनमें अभिचार {मरण आदि  प्रयोग}घात उग्र कार्य भेद अत्यंत मित्रों में परस्पर कलह ,पशु शिक्षा आदि सब कार्य सिद्ध होता है ||
-----{८}-मूल ,आश्लेषा ,कृतिका ,और विशाखा तीनो पूर्वा और भरणी तथा मघा ये नौ नक्षत्र अधोमुख  हैं | आर्द्रा पुष्य ,श्रवण ,धनिष्ठा,शतभिषा ,तीनो उत्तरा और रोहिणी ,यह नौ नक्षत्र उर्धमुख हैं |मृगशिरा ,रेवती ,चित्रा अनुराधा ,हस्त ,स्वाति ,पुनर्वसु ,ज्येष्ठा ,अश्विनी ये नौ तियर्गमुख नक्षत्र हैं |इन नक्षत्रों के मुख के अनुसार उसी तरह का कार्य सिद्ध होता है ,जैसे अधोमुख से -कुंआं खुद्बबाना इत्यादि ,उर्ध मुख से मकान बनवाना ,तियर्ग मुख में बांध बंधवाना यात्रा एवं चक्र रथ इत्यादि बनवाना शुभ होता है ||
भवदीय -पंडित कन्हैयालाल  झा शास्त्री {मेरठ उत्तर प्रदेश }
निःशुल्क ज्योतिष सेवा सभी मित्रों को केवल एकबार ही मिल पायेगी --संपर्क सूत्र द्वारा --09897701636 ----09358885616     

सोमवार, 28 मई 2012

"कर्ज{ऋण }लेन देन का वर्जित समय ?"

    "कर्ज{ऋण }लेन देन का वर्जित समय ?"
भौतिक आवश्यकता के कारण--लोग कर्ज लेने में संकोच नहीं करते ,तो सांसारिक लोलुपता के कारण कर्ज देने को लोग विह्वल {आतुर }भी बहुत रहते हैं | किन्तु सोच के अनुकून बात नहीं बनने पर लोग प्राण की परवाह भी नहीं करते हैं ---आइये हम ज्योतिष की कुछ सलाह देना चाहते हैं | जिससे कर्जदार लोग ऋणी न रहें ,साहूकार धन से पर्पूर्ण रहें ||
---------संक्रांति का दिन हो या मंगलवार का दिन हो ---वृद्धि योग ,हस्त नक्षत्र युक्त रविवार हो --तो उस दिन ऋण ले लेने से --ऋण जल्दी मुक्त नहीं हो पाता है | अर्थात --अनेक प्रकार की अडचनें सामने अवश्य आ जाती है ||
------मंगलवार के दिन यदि ऋण चुकाया जाये तो अति शुभ होता है | अर्थात -पुनः ऋण लेने की आवश्यकता  नहीं पड़ती  है |
---------बुधवार के दिन ऋण को देना नहीं चाहिए ,---कृतिका ,रोहिणी ,आर्द्रा,आश्लेषा उत्तरा फाल्गुनी,विशाखा ,ज्येष्ठा,मूल --इन नक्षत्रों में या --भद्रा ,व्यतिपात और अमावस में दिया गया धन फिर नहीं मिलता या फिर झगड़े ,विवाद ,मुकदमें आदि करने पर मजबूर करवा देता है ||
  भाव --जब भी धन लेना हो या देना हो इन जानकारी के द्वारा लेन या देन या अपने पुरोहित जी से विचार विमर्श करके लें ||
     भवदीय -पंडित कन्हैयालाल झा शास्त्री {मेरठ -उत्तर प्रदेश }
निःशुल्क ज्योतिष सेवा सभी मित्रों को एकबार ही मिलेगी ---रात्रि 8 - से -9  में -संपर्क सूत्र द्वारा --09897701636 ,09358885616

शनिवार, 26 मई 2012

"Have a nice day,Ram-Ram,Namskar?"

"Never ignore anyone who really cares 4U
  Other wise one day U will realise that U
   Have lost a diamond while U were busy in
       Collecting stones.........!!
From-"jha shastri Meerut-India,
{Have a nice day,ram-Ram,Namskar}  
-Free of coust-jyotish seva all friends-8 to9 pm ,
     con----09358885616,09897701636 

बुधवार, 23 मई 2012

"बहुमूल्य वस्तुएं -त्रिपुष्कर एवं द्विपुष्कर योगों में खरीदें ?"


यद्यपि ज्योतिष शाश्त्रों में अनंत योंग होते हैं | सभी योगों के महत्व भी अलग -अलग हैं | जब पंचांग में कोई मुहूर्त  उपलब्ध नहीं होते हैं-तो योगों में विहित कर्म करने की सदियों से परम्परा रही है | कुछ शाश्त्रकारों के मत के अनुसार -मुहूर्त से भी उत्तम योग होते हैं ,जिन योगों में अमुक -अमुक कार्ज़ करने से विशेष लाभ होते हैं |---------आज हम बात करते हैं त्रिपुष्कर एवं द्विपुष्कर योगों की ----जमीन,हीरे ,जवाहरात ,कार ,ट्रक ,ट्रेक्टर,टेलीविजन ,आभूषण ,घोडा ,गाय ,भैष-आदि बहुमूल्य चीजें और भी योगों में खरीदी जा सकती है ,किन्तु त्रिपुष्कर एवं द्विपुष्कर योग विशेष ही महत्वपूर्ण माने जाते हैं |
---{१}-यदि कोई वस्तु त्रिपुष्कर योग में खरीदी जाये तो वह निकट भविष्य में तिगुनी हो जाती है |
---{२}-यदि कोई बहुमूल्य वस्तु -द्विपुष्कर योग में खरीदी जाये तो -निकट भविष्य में दुगुनी हो जाती है |
----अतः इन योगों में बहुमूल्य वस्तुएं खरीदिनी चाहिए या बैंक में रुपया जमा करवाने चाहिये |
---नोट --इन योगों में मुकदमा दायर करना या दवा खरीदना उत्तम नहीं होता है ,क्योंकि ये वृद्धि कारक योग हैं --तो ये योग दवा एवं शत्रुओं से  मुक्त नहीं अपितु  वृद्धि करायेंगें | इन योगों में अपनी कोई कीमती वस्तु को बेचनी भी नहीं चाहिए |अन्यथा आगे चलकर उससे तिगुनी या दुगुनी बेचने की स्थिति भी पैदा हो सकती है |
----{३}-धन या अचल संपत्ति के संचय के लिए ये योग --अद्वितीय हैं ||
भवदीय -पंडित कन्हैयालाल "झा शास्त्री " {मेरठ  उत्तर प्रदेश }
  निःशुल्क ज्योतिष सेवा सभी मित्रों के लिए रात्रि 8 -से -9   में संपर्क सूत्र द्वरा उपलब्ध रहती है |
      --09358885616 --09897701636 

मंगलवार, 22 मई 2012

ज्योतिष सेवा सदन "झा शास्त्री "{1}: "ज्योतिष की नजरें,पाक्षिक विश्व की ख़बरें -21 -05 -...

ज्योतिष सेवा सदन "झा शास्त्री "{1}: "ज्योतिष की नजरें,पाक्षिक विश्व की ख़बरें -21 -05 -...: इस पक्ष देश -विदेशों की यात्रा करने वाले यात्री सावधान होकर यात्रा करें ,क्योंकि मृगशिरा में स्थित शुक्र के कारण यात्रा में यात्रियों को ...

"ज्योतिष की नजरें,पाक्षिक विश्व की ख़बरें -21 -05 -से 04 -06 -2012 तक ?"


इस पक्ष देश -विदेशों की यात्रा करने वाले यात्री सावधान होकर यात्रा करें ,क्योंकि मृगशिरा में स्थित शुक्र के कारण यात्रा में यात्रियों को परेशानी होगी | धान्य मँहगे होंगें | समाजवादी देशों एवं अनेक तानाशाही देशों में आंतरिक सैन्य संघर्ष होगा |गृहयुद्ध के आसार बनेंगें |भीषण अग्निकांड होगा |तोड़ -फोड़ ,सांप्रदायिक उपद्रव हो सकते हैं |खून -खराबे का तांडव होगा |चीन अंतर्राष्ट्रीय राजनीति में इस समय अकेला पड़ जायेगा |प्रवास सम्बन्धी कानून में ब्रिटेन में परिवर्तन होगा | सार्वजानिक उद्योगों की स्थिति में सुधार होगा,तथा उसमें लाभ की स्थिति बनेगी |देश में मासांत तक  विरोधी पक्ष एवं सत्ता पक्ष में सुधार की संभावनाएं हैं |
----संक्रांति फल -किराने की वस्तुओं के भाव में घटा -बढ़ी होती रहेगी | गेंहूँ ,चना ,जौ के भाव में तेजी आएगी ,किन्तु मक्का ,मूंग ,मोठ ,उड़द का भाव मंदा रहेगा |सोना -चांदी के भाव में काफी उत्तर चढाव होगा |तिल ,तेल ,सरसों ,रूई,अलसी ,मूंगफली  का भाव तेज रहेगा |रस-कास पदार्थ तेज होंगें | रूई ,कपास ,सूत ,कपडे में उत्तर -चढाव होगा ||
भवदीय -पंडित कन्हैयालाल "झा शास्त्री "{मेरठ- उत्तर प्रदेश }
  निःशुल्क ज्योतिष सलाह -सभी मित्रों के लिए रात्रि ८ से 9 में उपलब्ध रहती है |
संपर्क सूत्र -09897701636 ,09358885616  ---

सोमवार, 21 मई 2012

ज्योतिष सेवा सदन "झा शास्त्री "{1}: ज्योतिष सेवा सदन "झा शास्त्री "{1}: "Have a Nice D...

ज्योतिष सेवा सदन "झा शास्त्री "{1}: ज्योतिष सेवा सदन "झा शास्त्री "{1}: "Have a Nice D...: ज्योतिष सेवा सदन "झा शास्त्री "{1}: "Have a Nice Day?" : Living in the favourable&Unfavourable Situation Is called "Part of Life" But smilin...

"इस पक्ष देश -विदेशों में क्या होगा -२१ मई से ४ जून २०१२ तक ?"


  ---कन्या राशि में वक्री शनि २५ जून २०१२ तक उपद्रवों का कारण बनेगा ---"कन्या मीने यदा सौरी राशि वक्रं प्रजायते |
    नृपायुद्धं भयं लोके  दुर्भिक्षं तत्र जायते ||-----के अनुसार किन्हीं देशों में युद्धभय,प्राकृतिक प्रकोप ,भूकंप ,दिग्दाह ,आंधी -तूफान ,अग्निकांड की त्रासदी झेलनी पड़ेगी |असामान्य परिस्थितियों में अकाल जैसे हालात बन सकते हैं | अंतर्राष्ट्रीय शांति परिचर्चा होगी | कश्मीर का मुद्दा और भी उलझ सकता है |अमेरिका आदि  प्रभावी देश दखल देने की कोशिश करेंगें |आस्तीन के सापों से देश के कर्णधारों को सचेत रहना चाहिए अन्यथा हानि होगी देश को |
तेजी -मंदी विचार ---सूर्य के साथ पांच ग्रह संयोग तेजी का संकेत है |----आगे पीछे बहुत ग्रह ,सूर्य से तामस योग | हा !हा ! कार होय जग ,बाढ़े रोग वियोग ||{राजधानी } ----मंहगाई की मार से त्राहि -त्राहि मचेगी | सरकार आयात -निर्यात नीति पर पुनर्विचार करेगी |सतर्कता बरती गयी तो मंहगाई कुछ कम कम होगी ||
--आकाश लक्षण -इस पक्ष गर्मी बेतहासा पड़ेगी | बुध रशिचार -गुरु- शुक्रउदयास्त के प्रभाव से मौसम ख़राब होगा |जहाँ -तहां वर्षा होने से कुछ राहत मिलेगी  देश के दक्षिण संभागों में वर्षा अधिक होगी | आंधी-तूफान जानलेवा सिद्ध हो सकता है |  आगे अच्छी फसल की उम्मीद की जा सकती है ||
   भवदीय- निवेदक -पंडित कन्हैयालाल "झा शास्त्री "{मेरठ उत्तर प्रदेश }
निःशुल्क ज्योतिष सेवा रात्रि ८ से ९ सभी  के लिए उपलब्ध रहती है | सम्पर्क सूत्र-०९८९७७०१६३६,09358885616 

शनिवार, 19 मई 2012

"भारत में ग्रहण कहीं से भी दिखाई नहीं देगा -20/२१ मई 2012 को ?"


दिनांक -२०/२१ मई २०१२ रविवार की रात्रि में खग्रास सूर्यग्रहण  भारत से बाह्य पूर्व देशों में होगा |भारतीय समय के अनुसार ग्रहण रात्रि ३/४०बजे शुरू होकर सोमवार को सुबह ७ बजकर ०६ मिनट पर समाप्त होगा |इस ग्रहण को -कनाडा ,चीन ,ग्रीनलैंड ,इंडोनेशिया ,जापान ,कजाकिस्तान ,उत्त्रिकोरिया ,दक्शिन्कोरिया ,मैक्सिको ,मंगोलिया,नर्वे ,फिलिपिन्स ,रूस ,ताईवान ,और उत्तरी अमेरिका आदि देशों से देखा जा सकेगा ||
भवदीय -पंडित कन्हैयालाल "झा शास्त्री " {मेरठ उत्तर प्रदेश } ज्योतिष सेवा रात्रि -८ से९ सभी मित्रों के लिए उपलब्ध रहती है -सम्पर्क सूत्र द्वारा -0989770636 ,09358885616  |

ज्योतिष सेवा सदन "झा शास्त्री "{1}: "Have a Nice Day?"

ज्योतिष सेवा सदन "झा शास्त्री "{1}: "Have a Nice Day?": Living in the favourable&Unfavourable Situation Is called "Part of Life" But smiling in all there situations is called"Art of Life"      {...

"Have a Nice Day?"

Living in the favourable&Unfavourable Situation Is called "Part of Life" But smiling in all there situations is called"Art of Life"
     { Have a nice day,-Ram-ram,Namskar}
By-Pandit kanhaiyalal jha sastri ---free of coust-jyotish seva --8to9 pm all friends--09897701636,09358885616

शुक्रवार, 18 मई 2012

ज्योतिष सेवा सदन "झा शास्त्री "{1}: Free Astrology Services - 8 to 9 pm- all friends b...

ज्योतिष सेवा सदन "झा शास्त्री "{1}: Free Astrology Services - 8 to 9 pm- all friends b...: Free Astrology Services - 8 to 9 pm- all friends by the contact person is available - 09897701636.09358885616 ----- "Astrology Services" ...

Free Astrology Services - 8 to 9 pm- all friends by the contact person is available -

Free Astrology Services - 8 to 9 pm- all friends by the contact person is available - 09897701636.09358885616 ----- "Astrology Services" feature you have to pay extra charge - that is simple and easy service for the public good. ---- Survey Bhavantu Sukinः --- your happiness means the service. But do not get the service free to all friends at once. --- Again have to pay Rs 500 for the service - but it is a lifetime fee. As often as you wish, you may wish to seek astrological services will get free ...
Manager - Astrology Services House "Jha Shastri," Meerut ..=





गुरुवार, 17 मई 2012

ज्योतिष सेवा सदन "झा शास्त्री "{1}: 2012 में कन्या के शनि {पैर }से आपको -क्या -क्या मि...

ज्योतिष सेवा सदन "झा शास्त्री "{1}: 2012 में कन्या के शनि {पैर }से आपको -क्या -क्या मि...: 2012 में कन्या के शनि {पैर }से आपको -क्या -क्या मिलेगा?" सभी ग्रहों में -"शनि " किसी भीराशि  में अत्यधिक समय व्यतीत करते हैं । स्थूलता क...

2012 में कन्या के शनि {पैर }से आपको -क्या -क्या मिलेगा?"

2012 में कन्या के शनि {पैर }से आपको -क्या -क्या मिलेगा?"
सभी ग्रहों में -"शनि " किसी भीराशि  में अत्यधिक समय व्यतीत करते हैं । स्थूलता की प्रतीक भी होता है-शनि । किन्तु देखने में रमणीय परन्तु -न्यायाधीश होने से लोगों को अत्यधिक पीड़ा भी सहनी पड़ती है । 2012 में शनि -आपकी राशि या आपके ऊपर कितनी दया करने वाले हैं --संक्षिप्त में एक नजर ---।
{1}---मेष -सिंह -धनु राशि वालों को लौह्पाद से शनि का आगमन संघर्ष पूर्ण होगा ।---अर्थात ---आजीविका के लिए -श्रम -संघर्ष ,पारिवारिक तनाव ,परिश्रम से ही स्थितियां अनुकूल हो सकती है ।।
{2}--वृष -तुला -मीन राशि  वालों के लिए स्वर्णपाद से शनि का आगमन कुछ कष्टप्रद रहेगा ।--अर्थात ----यश -प्रतिष्ठा में कमी  प्रियजन या पारिवारिक जन का विछोह ,धर्म के प्रति अनास्था उपजेगी ।।
{3}---कर्क -वृश्चिक - कुम्भ -राशिवालों के लिए रजत्पाद  से शनि का आगमन किसी नए कार्ज़ का शुभारम्भ  आजीविका के साधनों में वृद्धि पारिवारिक सुख -शांति,जन संपर्क बढेगा ।।
---नोट शनि --अपनी -अपनी  राशि के अनुसार फलित का आकलन करें ?
     भवदीय -पंडित कन्हैयालाल झा शास्त्री { मेरठ - उत्तर प्रदेश}
          निःशुल्क ज्योतिष सेवा - रात्रि 8से 9 --सभी मित्रों के लिए संपर्क सूत्र द्वारा उपलब्ध रहती है --09897701636,09358885616-----"ज्योतिष सेवा " सुविधा के लिए आपको अतिरिक्त शुल्क  नहीं देने पड़ते हैं--अर्थात साधारण एवं सरल सेवा जनहित के लिए है ।----सर्वे भवन्तु सुखिनः ---आपकी प्रसन्नता ही सेवा का अभिप्राय है । किन्तु यह सेवा निःशुल्क एकबार ही सभी मित्रों को  मिल पाती है ।---दुबारा सेवा के लिए 500 रूपये अदा करने पड़ते हैं -किन्तु यह आजीवन शुल्क है ।   आप चाहें जितनी बार ज्योतिष सेवा लेना चाहें निःशुल्क मिलती रहेगी ।।
     प्रबंधक -ज्योतिष सेवा सदन "झा शास्त्री " मेरठ ।
    9897701636,9358885616  

सोमवार, 14 मई 2012

"सूर्य शुक्र समागम का अद्भुत दृश्य देखें अन्तरिक्ष में 6 जून2012 को ?"

"सूर्य शुक्र समागम का  अद्भुत दृश्य  देखें अन्तरिक्ष  में 6 जून2012 को ?"   
6जून 2012 बुधवार को प्रातः वक्र गति से गमन करता  हुआ शुक्र सूर्य बिम्ब के ऊपर से  गुजरेगा । बिंदुमात्र शुक्र का अन्तरिक्ष में अद्भुत  नजारा  कुतूहल का विषय बनेगा । पूर्व इतिहास में --1631,1639,1761,1769,1874,1882,  2004 में शुक्र का अतिक्रमण हुआ था ।भविष्य में -2117,2125,2247,2255,2360,2368 में  होगा ।
------ नोट  बुध का शुक्रअतिक्रमण प्रति 100 वर्ष में 8/9 बार होता है। अपने इस सौर  मंडल कक्षा क्रम में -बुध ,शुक्र पृथ्वी,मंगल ,गुरु,, शनि ,हर्शल ,नेपच्यून  एवं प्लूटो हैं। सूर्य एवं पृथ्वी के मध्य भ्रमण करने  वाले -बुध शुक्र अवर ग्रह कहे  जाते हैं ।बाह्य भ्रमण वृत्त में गतिशील ग्रहओं को प्रवर ग्रह  कहा  जाता है । ग्रह के इर्द -गिर्द  घूमने  वाले ग्रह को उपग्रह कहते हैं ।। जैसे - चंद्रमा पृथ्वी का उपग्रह है । -जब -जब सूर्य -पृथ्वी के बीच से  शुक्र या बुध गुजरते हैं,तब -तब शुक्र अतिक्रमण अथवा बुध अतिक्रमण को ही शुक्र सूर्य  भेद  युति या सूर्य भेदयुति कहा जाता है ।।
-----------इस वर्ष 6 जून सन 2012 बुधवार को प्रातः काल 3.40से 10.19 बजे के मध्य वक्र गति से चलता हुआ शुक्र सूर्य बिम्ब के ऊपर से  होकर गुजरेगा -जिसे मापक यन्त्र द्वारा सभी देख  सकते हैं ।।
----------अद्भुत दृश्य को कहाँ -कहाँ  देखा जा सकता है ।----------
-----उत्तरी अमेरिका के उत्तर पश्चिम भाग , हवाई ,पश्चिम  पेसिफिक ,उत्तरी एशिया ,, जापान ,कोरिया ,चीन का पूर्वी भाग , फिलिपिन्स ,पूर्वी आस्ट्रेलिया ,न्यूजीलेंड ,सिंगापूर ,मलेशिया ,थाईलेंड एवं म्यांमार में शुक्र के सम्पूर्ण निष्क्रमण को देखा जा सकेगा ।।
-------भारत में --बुधवार को सूर्य उदय होने से पूर्व -3.40बजे वक्र गति से चलता हुआ शुक्र सूर्य बिम्ब को पूर्व दिशा में स्पर्श करेगा ।उस  समय  भारत में रात्रि होगी । .दिन10 बजकर 19 मिनट पर शुक्र का सूर्य बिम्ब से बाह्य  निर्गम होगा ,जिसे भारत के  विभिन्न शहरों में देखा जा सकेगा ।
----कलकत्ता -प्रातः -4.53 पर ।  मुंबई -6.02 पर प्रातः ।  दिल्ली -5.28 पर प्रातः ।
---  ध्यान दें खुली  आँखों से न देखें । दूरबीन की सहायता  से ही देखें ।।
 भवदीय -पंडित कन्हैयालाल झा शास्त्री {मेरठ उत्तर प्रदेश }
     ज्योतिष सेवा सदन -निःशुल्क ज्योतिष सेवा -रात्रि 8 से 9 सभी मित्रों के लिए  उपलब्ध रहती है ।
          संपर्क सूत्र -0989 7701636 ,09358885616                 

रविवार, 13 मई 2012

"देश -विदेश की पाक्षिक घटना 07-मई 20 20 मई 2012 तक?"

     "देश -विदेश की पाक्षिक घटना 07-मई 20 20 मई 2012 तक?"
  तेल का मूल्य बढेगा । दूसरी राशी  स्थित गुरु से नंद्शाल  नामक  मेघ वर्षा करेगा ।जिससे सब रस सस्ते होंगें ।स्त्री एवं हाथियों  को पीड़ा सहनी पड़ेंगीं । परस्पर विरोध होगा ।-गेंहूँ ,चावल .,चने ,मूंग ,उड़द ,,तिल मंहगें होंगें ।गुरु उदय होने से सुभिक्ष होगा ।पाषाण ,शाली  मणि रत्न व् उपरत्न मंहगें होंगें ।ज्येष्ठ महीने में गुरु का उदय होने से अनावृष्टि होगी ।कृतिका  नक्षत्र में गुरु का उदय होने से -गाडी से तथा अग्नि से आजीविका चलाने  वालों में एवं आधुनिक -अस्त्र -शस्त्र ,स्वचालित यंत्रों  विकास में वृद्धि होगी ।  स्मगलरों एवं अपराधियों का नाश होगा ।
-----बाजार में तेजी आएगी । दूध ,घी ,शक्कर ,रस -कस के  पदार्थों में तेजी आएगी ।
------ सोना -चांदी व् सर्राफा बाजार में मांग  अधिक होने से तेजी का  रुख कायम रहेगा ।।
--------तिलहन ,दलहन ,गेंहूँ ,जोऊ ,चना ,मूंग ,मटर ,मोंठ आदि का भाव तेज रहेगा ।
------खनिज पदार्थों का बाज़ार भाव गरम रहेगा । शेयर्स  मार्केट में तेजी का प्रबल योग है ।
      निवेदक -पंडित कन्हैया लाल "झा "शास्त्री {मेरठ उत्तर प्रदेश }
            ज्योतिष एवं कर्मकांड -ज्योतिष सेवा सदन ।
निःशुल्क ज्योतिष सेवा रात्रि 8 से9 सभी मित्रों के लिए उपलब्ध रहती है ।
    संपर्क सूत्र --09897701636,09358885616 

ज्योतिष सेवा सदन "झा शास्त्री "{1}: "Country - State of the fortnightly event 07 - May...

ज्योतिष सेवा सदन "झा शास्त्री "{1}: "Country - State of the fortnightly event 07 - May...: "Country - State of the fortnightly event 07 - May 20 to May 20, 2012?"    Increase of oil prices. The amount, called the master Nandshal c...

"Country - State of the fortnightly event 07 - May 20 to May 20, 2012?"

"Country - State of the fortnightly event 07 - May 20 to May 20, 2012?"

  
Increase of oil prices. The amount, called the master Nandshal cloud to rain. So all the juices will be cheap. Men and elephants Pdengin suffer. Will conflict. - Wheat, rice., Gram, moong, urad, til Mnhgen will. Sun will rise from the Subhiksh. Stone, V. Upratn powerful gem stones will Mnhgen. Eldest months to master the rise of the drought. Kritika Rise of the Sun in the constellation - a source of livelihood among the vehicle and the fire and modern - weapons - weapons, development of automated devices will increase. Smglron and criminals will perish.
----- Impetus in the market. Milk, ghee, sugar, juice - will tighten up the materials.
------ Gold - silver bullion market demand V. the bullish trend will continue ..
-------- Oilseeds, pulses, wheat, Jou, chickpea, lentil, peas, kidney etc. The prices will remain high.
------ Market Value of minerals will be hot. Is the sum of the strong market shares rapidly.

      
Applicant - Pandit Kanhaiya Lal "JH"} Shastri {Meerut in Uttar Pradesh

            
Astrology and rituals - Astrology Services House.
8 to 9 pm Free Astrology Service is available to all friends.

    
Contact - 09897701636.09358885616

शनिवार, 12 मई 2012

"देश -विदेश ज्योतिष पाक्षिक विचार 7-मई से 20-मई 2012 तक ?"

"देश -विदेश ज्योतिष पाक्षिक विचार 7-मई से 20-मई 2012 तक ?"
   मास में 5 सोमवारों का फल श्रेष्ठ हैं ----सोमस्य पञ्च वारास्यु यात्र मासे भवन्ति ही ।
                                                            धन -धान्य समृद्धि स्यात सुखं  भवन्ति सर्वदा ।।
भाव ---धन -धान्य की  बढ़ोत्तरी होगी ।-कल -कारखानों में उत्पादन बढेगा । जिससे आम लोगों में प्रसन्नता बढ़ेगी ।।
------17 मई से ढाई  महीने  तक चलने वाला विरोधी ग्रह संयोग  ग्रस्त करेगा ---
                                गुरु शुक्रो यदैकस्थो नर युद्दम तदा भवेत् ।
                                अकाले वा भवेद वृष्टिर जगत्यां नात्र संशयः ।।
भाव - के अनुसार साम्प्रदायिक -दंगें -फसाद , झगडे -झमेले  होंगें खूब होंगें ।किसी देश -प्रदेश या महानगर की शामत  आ जाये तो  आश्चर्य नहीं होगा ।घिनौनी राजनीती के चक्रव्यूह में प्रभावी राजनेता अस्तित्वहीन हो सकते हैं ।
-------तेजी -मंदी ---पदार्थों की वृद्धि होने से मंहगाई कम बढ़ेगी । व्यापारियों को बाजार के रुख  को ध्यान में रखते हुए काम करना चाहिए ।भावों में -अकल्पित  उलटफेर  संभव है ।
------आकाश लक्षण -बुधास्त के प्रभाव से घामा छाई का संयोग बनेगा ।-बूंदा -बंदी होने से गर्मी कुछ कम होगी ।-----सूर्य के साथ चार ग्रह संयोग होने से -तूफान ,अग्निदाह की  आशंका बनी रहती है ।इस वर्ष अन्तरिक्ष में विस्मयकारी घटना घट  सकती है ।दक्षिण में  बेतहासा गर्मी पड़ेगी । 
------अकाल मृत्यु से बचने के लिए नित्य प्रातः काल इस श्लोक का पाठ  करें---
      मृत्युन्जय महादेव , त्राहिमाम शरणागतम ।
     जन्म मृत्यु जरा रोगेह,पिदितम कर्म बंध् नैह ।।
  {शब्दों की त्रुटी के लिए क्षमा करें }
--भवदीय ज्योतिष सेवा सदन "झा "शास्त्री "{मेरठ उत्तर प्रदेश }
 निःशुल्क ज्योतिष सेवा रात्रि 8 से 9 सभी मित्रों के लिए  उपलब्ध रहती है ।
---09897701636,09358885616     
      

बुधवार, 25 अप्रैल 2012

ज्योतिष सेवा सदन "झा शास्त्री "{1}: "ज्योतिष सेवा सदन का प्रादुर्भाव ?एक नजर }"

ज्योतिष सेवा सदन "झा शास्त्री "{1}: "ज्योतिष सेवा सदन का प्रादुर्भाव ?एक नजर }": "ज्योतिष सेवा सदन का प्रादुर्भाव ?एक नजर }"  -- ज्योतिष सेवा सदन --एक व्यक्तिगत सेवा सदन है । जिसका निर्माण -२०१० में हुआ । इस सदन का ध्...

"ज्योतिष सेवा सदन का प्रादुर्भाव ?एक नजर }"

"ज्योतिष सेवा सदन का प्रादुर्भाव ?एक नजर }"
 --ज्योतिष सेवा सदन --एक व्यक्तिगत सेवा सदन है । जिसका निर्माण -२०१० में हुआ । इस सदन का ध्येय  केवल देश -विदेशों रह रहे मित्रों के लिए है । कोई भी मित्र बनकर निःशुल्क ज्योतिष सेवा सदन के सदस्य बन बन सकते हैं । ज्योतिष सेवा सदन -धन की लालसा से नहीं  अपितु प्रेम की जिज्ञासा से यह सेवा प्रदान करता है । शुल्क इसलिए रखा गया है -ताकि जरुरत लोग ही मित्र बनकर सेवा प्राप्त करें । जहाँ माँ सरस्वती होंगीं वहां माँ लक्ष्मी को आना ही पड़ता है । अर्थात --जब ज्योतिष सेवा सदन आप मित्रों के हित में कार्य करेगा ,तथा उस हित से आपको लाभ होगा तो आप भी ज्योतिष सेवा सदन के लिए सोचेंगें । प्राचीन युगों से ही ब्राह्मण को-दक्षिणा यग्य के उपरांत ही दी जाती है जैसे -किसी भी पूजा में -सर्वप्रथम सामग्री आती है ,पूजा के उपरांत हवन होता है--किन्तु भूदेव को दक्षिणा यग्य सम्बंधित समस्त कार्य होने के उपरांत ही मिलती है ।अतः हम भी उसी परम्परा के अनुसार कार्य करना चाहते हैं ।---विद्या ददाति विनयम विनया द्याति पात्रताम ।
                                                                    पात्रत्वा धन माप्नोति,धनात धर्मः ततः सुखम ।।
भाव -विद्या से विनय आनी चाहिए,और जब विनम्रता आती है --तो लोग सराहना करते हैं,जब सराहना होती है -तो सम्मान भी मिलता है अर्थात समयानुसार मदद भी मिलती है ,और जब मदद या सम्मान मिलता है -तो लोग धर्म अर्थात हित के कार्य भी करते हैं ।।
------आशा ही नहीं उम्मीद है --ज्योतिष सेवा सदन के निर्माता -पंडित कन्हैयालाल झा शास्त्री {किशनपुरी धर्मशाला देहल गेट मेरठ । के इन बातों पर भरोसा करेंगें ।। 
हमारे विचार से ---कुछ माँ के गर्भ से रिश्ते- नाते बनाकर आते हैं,कुछ इस भूमंडल पर बनाते हैं ,अतः जो भी मित्र - ज्योतिष सेवा सदन से जुड़ते हैं -वो सभी मित्र पराये होकर भी अपने होते हैं ,जुड़े हुए सभी मित्रों को हम वही सम्मान देते हैं --जैसे अपनों को देते हैं ।
-----भ्रमित न हों ---ज्योतिष सेवा सदन -आपके भाग्य को नहीं बदल देगा ,बल्कि आपकी कुंडली में प्राप्त भोग्य को ही दर्शायेगा । आपने जो किया है--आप जो पूर्व संचित कर रखा है -उस बात की ही जानकारी देगा ज्योतिष सेवा सदन ---कर्मण्ये बधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन ----किन्तु -ये भी सत्य है -ज्योतिष दूरगामी चीज है जो प्रलोभन देती है ,राह बताती है ,एक सकून देती है--और सकून किसको नहीं चाहिए --हम चाहकर भी ज्योतिष को विस्मृत नहीं कर सकते हैं । अतः ज्योतिष का लाभ लेना भी चाहिए -और बताये हुए मार्ग पर चलना भी चाहिए ।
------ज्योतिष सेवा सदन --से जुड़ें ,अपने भविष्य में घटित घटना से कैसे बचें ,एवं हमारी आपकी दुबारा बातचीत हो या न हो -किन्तु वार्षिक राशिफल ,व्यापर का आकलन ,ज्योतिष एवं कर्मकांड के लेखों के माध्यम से नित्य हम आपतक पहुचते रहेंगें । हमें आप अपना परिवार का सदस्य समझें ।
----ध्यान दें ----ज्योतिष सेवा निःशुल्क है आजीवन निःशुल्क रहेगी ।
      {१}-जब भी आपको लगे कि हमें ज्योतिष सम्बंधित सलाह लेनी चाहिए --आप उक्त नंबरों पर प्राप्त करें --9897701636 ,09358885616 --।।
      {२}-आप अपनी स्वच्छा से आजीवन सदस्य बनें ,इसके लिए आपको परेशान नहीं करेगा -ज्योतिष सेवा सदन ।।
    {३}-अगर आपको लगता है --ज्योतिष सेवा सदन आपके हित में कार्य कर रहा है ,तो आप इसकी सराहना करें ,इससे जुड़ें --अन्यथा एकबार तो सेवा अवश्य निःशुल्क प्राप्त करें ।।
-----हमें जितना चाहिए वो परमात्मा की आप मित्रों की कृपा से प्राप्त है । २३ धंटे-हम स्वार्थ के लिए जीते हैं -कितु एक धंटा आप मित्रों के लिए जीना चाहते हैं यही सोच है हमारी ।।
   भवदीय ज्योतिष सेवा सदन "झा शास्त्री "             

मंगलवार, 24 अप्रैल 2012

ज्योतिष सेवा सदन "झा शास्त्री "

ज्योतिष सेवा सदन "झा शास्त्री "

ज्योतिष सेवा सदन "झा शास्त्री "
{1}निःशुल्क ज्योतिष सेवा रात्रि ८ se9 में सभी मित्रों को एकबार ही मिल पाती है । 
  {२}-ज्योतिष सेवा केवल फ़ोन से {संपर्क सूत्र } प्राप्त करें ।
{३}- मित्रों की संख्या अत्यधिक हो जाने के कारण हमें लिखने में परेशानी होती है ,atah सभी मित्रों से निवेदन करते हैं कि आप--ज्योतिष की जानकारी उपलब्ध--नम्बरों पर प्राप्त करें ।
{४}-यदि आपको लगता है कि--ज्योतिष सेवा सदन -आजीवन आपको ज्योतिष की सही जानकारी उपलब्ध कराएगी ---तो आप ज्योतिष सेवा सदन के सदस्य बनें --५०० रुपया शुल्क है आजीवन सदस्यता के लिए ।
{५}-हमारा ध्येय -तन ,मन एवं श्रम से सभी मित्रों  को सही ज्योतिष की जानकारी देने की है --जो आपके बिना अर्थात मित्रों के सहयोग के बिना हम नहीं कर पायेंगें ।
-----नोह सहयोग धन का नहीं --मन का करें अर्थात यह ज्योतिष जानकारी आपके नियमित साधारण शुल्क फ़ोन से मिलती है न की अतिरिक्त शुल्क देने पड़ते हैं ।।
-------09897701636 ,09358885616 ---फ़ोन से रात्रि ८ से९ में ज्योतिष सेवा कोई भी मित्र बनकर प्राप्त करें ।
     भवदीय ज्योतिष सेवा सदन {पंडित कन्हैयालाल झा शास्त्री }मेरठ उत्तर प्रदेश ।
               ज्योतिष सेवा सदन --facebook  
 

शनिवार, 21 अप्रैल 2012

ज्योतिष सेवा सदन "झा शास्त्री "{1}: "देश -विदेश ज्योतिष पाक्षिक विचार {२२अप्रैल से ६ म...

ज्योतिष सेवा सदन "झा शास्त्री "{1}: "देश -विदेश ज्योतिष पाक्षिक विचार {२२अप्रैल से ६ म...: "देश -विदेश ज्योतिष पाक्षिक विचार {२२अप्रैल से ६ मई तक2012} ----सम सप्तक बहु ग्रह हो,अथवा एकही संग ।       प्रजा कष्ट पावे अति ,जन विग...

"देश -विदेश ज्योतिष पाक्षिक विचार {२२अप्रैल से ६ मई तक2012}

"देश -विदेश ज्योतिष पाक्षिक विचार {२२अप्रैल से ६ मई तक2012}
----सम सप्तक बहु ग्रह हो,अथवा एकही संग ।
      प्रजा कष्ट पावे अति ,जन विग्रह का रंग ।।{राजधानी p0}  
भाव -इस योग के कारण जहाँ -तहाँ उपद्रव ,अशांति आम लोगों के लिए दुखदायी होगी ।राजनेता एक दूसरे को नीचा दिखाने की कोशिश करेंगें ।-------अमेरिका ,ईरान ,इराक ,साउदीअरब,पाकिस्तान ,अफगानिस्तान  में स्थिति भयानक हो सकती है ।--सीमा विवाद उभरकर सामने आ सकता है ।---आतंकी उत्पात से लोग त्रस्त हो सकते हैं ।----विश्व शांति परिचर्चा अप्रभावी रहेगी ।।
-------तेजी मंदी एक नजर -----
              "यदा सौम्यः स्थितौ मेषे महार्घम च चतुष्पदम ।
               सुवर्ण संताम यति नात्र कार्या विचारणा ।।{ताजिक नीलकंठी }
भाव ------मेष राशि में जब बुध हो तो ---चोपाये {चार पहिये या चार पायों वाले }दोपाये ,पशुपक्षी ,वाहन इत्यादि में तेजी आएगी । अन्य धातु---निर्माण सामग्री ,श्रींगार की वस्तुएं ,रसकश ,फल -फूल,सब्जियों में तेजी का चक्र चलेगा ।
-------सर्राफा-शेयर - बाज़ार-----घटती -बढती रहेगी ।।
-----आकाश लक्षण ------तापमान में वृद्धि होगी ,पक्ष में -गुरु अस्त के कारण जहाँ -तहाँ बदल्चल ,आंधी- तूफान,बूंदा -बांदी का संयोग बनेगा । कहीं भयंकर अग्निदाह ,विस्फोट ,रेल,यान- खान दुर्घटना ,भुकम्पादी की भी आशंका रहेगी ।
------अपने मन के कार्य को पाने के लिए इन देवताओं से प्रार्थना करें ------
{१} वासनापूर्ति {दाम्पत्य सुख }के लिए --रूद्र शिव की उपासना करें ।
{२}-बल वृद्धि के लिए -इलादेवी {माँ दुर्गा }या श्री हनुमान जी की उपासना करें ।
{३}-सौन्दर्य {सुन्दर आकर्षक } दिखने के लिए -गन्धर्व की उपासना करें ।
{४}-विवाह हेतु ---उर्वशी अपसरा -की पूजा करें ।
{५}-यश एवं कीर्ति के लिए नारायण {विष्णु }की उपासना करें ।
{६}-विद्या प्राप्ति के लिए --शिव या श्री सरस्वती की आराधना करें ।
{७}-मुकदमा में विजय के लिए --बगलामुखीदेवि की आरादना करने से जीत मिलती है ।
-----भवदीय पंडित कन्हैयालाल झा शास्त्री [ज्योतिष सेवा सदन -मेरठ उत्तर प्रदेश }
        ज्योतिष निःशुल्क सेवा रात्रि ८ से९ में कोई भी मित्रबंकर प्राप्त कर सकते हैं {एकबार }
          संपर्क सूत्र ---09897701636 ,09358885616     

शुक्रवार, 20 अप्रैल 2012

ज्योतिष सेवा सदन "झा शास्त्री "{1}: "दैनिक उपयोग में इन योगों का करें सोचकर प्रयोग ?

ज्योतिष सेवा सदन "झा शास्त्री "{1}: "दैनिक उपयोग में इन योगों का करें सोचकर प्रयोग ?: "दैनिक उपयोग में इन योगों का करें सोचकर प्रयोग ? सर्वार्थसिद्धि,अमृतसिद्धि,गुरुपुष्यामृत एवं रविपुश्यामृत --इस तरह के बहुत से योग होते ...

"दैनिक उपयोग में इन योगों का करें सोचकर प्रयोग ?

"दैनिक उपयोग में इन योगों का करें सोचकर प्रयोग ?
सर्वार्थसिद्धि,अमृतसिद्धि,गुरुपुष्यामृत एवं रविपुश्यामृत --इस तरह के बहुत से योग होते हैं । वारों का विशेष नक्षत्रों से संपर्क होने पर ये योग बनते हैं ,जैसा कि इन योगों के नामों से प्रतीत भी होता है ।इन योगों में शुभ कार्य हमलोग करते भी हैं एवं करने भी चाहिए ।आचार्यों के मत अनुसार -यात्रा ,गृहप्रवेश ,नूतन कार्यों का शुभारम्भ -पंचांग {पतरा }में मुहूर्त उपलभध न होने पर-जैसे {-व्यतिपात ,वैधृति ,गुरु -शुक्र अस्त या अधिकमास एवं वेध आदि के कारण} तो सर्वार्थ सिद्धि योगों का आश्रय लेना चाहिए ।।
{१}-----अम्रित्सिद्धि योग=,रविवार को -हस्त ,सोमवार को -मृगशिरा ,मंगलवार को अश्विनी ,बुधवार को अनुराधा ,गुरुवार को पुष्य ,शुक्रवार को रेवती ,शनिवार को रोहिणी नक्षत्र से सम्बन्ध होने पर -ये अम्रित्सिद्धियोग बनता है ।----इन योगों को अमृत सिद्धि योग की विशेष संज्ञा दी गयी है ।।  
{२}----रविवार व गुरुवार को पुष्य नक्षत्र का सम्बन्ध होने पर --राविपुश्यामृत--गुरुपुष्यामृत योग बन जाता है ।जो कि अत्यंत शुभ एवं प्रभावकारी मन गया है ।इस योग वाले दिन को विशेष फल प्रप्तिदायक माना गया है ।
-----------नोट {भाव }---ध्यान रखें -गुरुपुष्यामृत योग के समय -विवाह ,मंगलवार वाले अम्रित्सिद्धियोग के समय नए घर में प्रवेश ,तथा --शनिवार वाले अम्रित्सिद्धियोग के समय यात्रा नहीं करनी चाहिए ।।
      भवदीय -पंडित कन्हैयालाल झा शास्त्री [ज्योतिष सेवा सदन =मेरठ उत्तर प्रदेश }
         निःशुल्क ज्योतिष सेवा रात्रि ८ से९ सभी मित्रों के लिए उपलभध रहती है ।
             संपर्क सूत्र --09897701636 ,09358885616

बुधवार, 18 अप्रैल 2012

ज्योतिष सेवा सदन "झा शास्त्री "{1}: अपने - निवास का नाम और प्रभाव जानें ?

ज्योतिष सेवा सदन "झा शास्त्री "{1}: अपने - निवास का नाम और प्रभाव जानें ?: अपने - निवास का नाम और प्रभाव जानें ?  निवास की भूमि बहुत ही सोचकर लेनी चाहिए । प्रत्येक निवास की भूमि का नाम और प्रभाव शास्त्रकारों ने ...अपने - निवास का नाम और प्रभाव जानें ? 
निवास की भूमि बहुत ही सोचकर लेनी चाहिए । प्रत्येक निवास की भूमि का नाम और प्रभाव शास्त्रकारों ने अनेकानेक ग्रंथों में उल्लेख किये हैं । आइये हमलोग स्वयं अपनी -अपनी भूमि {निवास स्थान }का नाम और प्रभाव जानने की कोशिश करते हैं । शास्त्रों के मत के अनुसार -८ प्रकार के निवास स्थान होते हैं -गजपृष्ट,कुर्म पृष्ट ,दैत्यपृष्ट,नागपृष्ट,क्षत्रिया भूमि,वैश्या भूमि,शूद्रा भूमि ,एवं वास्तु भूमि ।।
{१}-गजपृष्ट----जिस स्थान में दक्षिण ,पश्चिम नैरितय और वायवकोण की ओर भूमि उच्च हो -उस भूमि को गज पृष्ट भूमि कहते हैं ।इस भूमि पर निवास करने से -धन ,धन्य ,संतान आयु की वृद्धि होती है ।
{२}-कुर्मपृष्ट-जहाँ मध्य में उच्च हो और चारो दिशाओं में झुकाव हो ,वह कर्मपृष्ट भूमि कहलाती है ।--इस भूमि पर निवास करने से -नित्य उत्साह ,धन -धन्य ,संतान ,आरोग्य ,यश एवं प्रतिष्ठा की वृद्धि होती है ।
{३}-दैत्यपृष्ट--ईशानकोण,पूर्व और अग्नि कोण में उच्च हो ,एवं पश्चिम में नीचा हो तो -उसे दैत्यपृष्ट भूमि कहते हैं ।इस स्थान पर निवास करने से -परिजनों के लिए उत्तम नहीं होता है अर्थात गृहस्वामी दुखी रहते हैं ।
{४}-नागपृष्ट--जिस भूमि पर दक्षिण और उत्तर दोनों दिशाओं  में उच्च हो बीच में नीचा हो,उस भूमि को नाग पृष्ट भूमि कहते हैं ।इस भूमि पर सुख कम दुःख विशेष मिलता है ।
{५}-क्षत्रियाभूमि-जहाँ की मिटटी  का रंग लाल हो -उस भूमि को -क्षत्रिया भूमि कहते हैं ।इस भूमि पर केवल क्षत्रिय की सुखी रह सकते हैं ।
{६}-वैश्याभूमि--जहाँ की मिटटी का रंग पीला हो ,उस भूमि को वैश्याभूमि कहते हैं । इस भूमि पर केवल वैश्यों को ही निवास करने चाहिए ।
{७}-शूद्राभूमि--जहाँ की मिटटी का रंग काला हो ,उसे शूद्रा भूमि कहते हैं । इस भूमि पर केवल शुद्रों को ही निवाद करने चाहिए ।
{८}-वास्तु भूमि-जिस भूमि की लम्बाई उत्तर दक्षिण बराबर हो या चकोर हो ,किन्तु पूर्व पश्चिम लम्बाई बराबर हो तो निवास के लिए अशुभ होती है ।
नोट -चारो वर्ण अपने -अपने वर्ण की भूमि में वास करें तो शुभ फल मिलता है ।ब्राह्मणों के लिए सब भूमि बसने योग्य होती है ।----"मन्धा क्षूयेत्र  संतोशो जायते भुवि ।
                                      तत्र कार्ज़गृहेसर्वे रिति गर्गादी सम्मतम ।।
भाव -जिस मनुष्य को जहाँ की भूमि पसंद हो ,वहां पर घर बनाकर बसे --वास्तु का निदान करके -तो दूषित भूमि भी लाभदायक बन जाती है ।।
भवदीय पंडित कन्हैयालाल झा शास्त्री {ज्योतिष सेवा सदन }
      मेरठ उत्तर प्रदेश संपर्क सूत्र -9897701636 ,9358885616  

अपने - निवास का नाम और प्रभाव जानें ?

अपने - निवास का नाम और प्रभाव जानें ? 
निवास की भूमि बहुत ही सोचकर लेनी चाहिए । प्रत्येक निवास की भूमि का नाम और प्रभाव शास्त्रकारों ने अनेकानेक ग्रंथों में उल्लेख किये हैं । आइये हमलोग स्वयं अपनी -अपनी भूमि {निवास स्थान }का नाम और प्रभाव जानने की कोशिश करते हैं । शास्त्रों के मत के अनुसार -८ प्रकार के निवास स्थान होते हैं -गजपृष्ट,कुर्म पृष्ट ,दैत्यपृष्ट,नागपृष्ट,क्षत्रिया भूमि,वैश्या भूमि,शूद्रा भूमि ,एवं वास्तु भूमि ।।
{१}-गजपृष्ट----जिस स्थान में दक्षिण ,पश्चिम नैरितय और वायवकोण की ओर भूमि उच्च हो -उस भूमि को गज पृष्ट भूमि कहते हैं ।इस भूमि पर निवास करने से -धन ,धन्य ,संतान आयु की वृद्धि होती है ।
{२}-कुर्मपृष्ट-जहाँ मध्य में उच्च हो और चारो दिशाओं में झुकाव हो ,वह कर्मपृष्ट भूमि कहलाती है ।--इस भूमि पर निवास करने से -नित्य उत्साह ,धन -धन्य ,संतान ,आरोग्य ,यश एवं प्रतिष्ठा की वृद्धि होती है ।
{३}-दैत्यपृष्ट--ईशानकोण,पूर्व और अग्नि कोण में उच्च हो ,एवं पश्चिम में नीचा हो तो -उसे दैत्यपृष्ट भूमि कहते हैं ।इस स्थान पर निवास करने से -परिजनों के लिए उत्तम नहीं होता है अर्थात गृहस्वामी दुखी रहते हैं ।
{४}-नागपृष्ट--जिस भूमि पर दक्षिण और उत्तर दोनों दिशाओं  में उच्च हो बीच में नीचा हो,उस भूमि को नाग पृष्ट भूमि कहते हैं ।इस भूमि पर सुख कम दुःख विशेष मिलता है ।
{५}-क्षत्रियाभूमि-जहाँ की मिटटी  का रंग लाल हो -उस भूमि को -क्षत्रिया भूमि कहते हैं ।इस भूमि पर केवल क्षत्रिय की सुखी रह सकते हैं ।
{६}-वैश्याभूमि--जहाँ की मिटटी का रंग पीला हो ,उस भूमि को वैश्याभूमि कहते हैं । इस भूमि पर केवल वैश्यों को ही निवास करने चाहिए ।
{७}-शूद्राभूमि--जहाँ की मिटटी का रंग काला हो ,उसे शूद्रा भूमि कहते हैं । इस भूमि पर केवल शुद्रों को ही निवाद करने चाहिए ।
{८}-वास्तु भूमि-जिस भूमि की लम्बाई उत्तर दक्षिण बराबर हो या चकोर हो ,किन्तु पूर्व पश्चिम लम्बाई बराबर हो तो निवास के लिए अशुभ होती है ।
नोट -चारो वर्ण अपने -अपने वर्ण की भूमि में वास करें तो शुभ फल मिलता है ।ब्राह्मणों के लिए सब भूमि बसने योग्य होती है ।----"मन्धा क्षूयेत्र  संतोशो जायते भुवि ।
                                      तत्र कार्ज़गृहेसर्वे रिति गर्गादी सम्मतम ।।
भाव -जिस मनुष्य को जहाँ की भूमि पसंद हो ,वहां पर घर बनाकर बसे --वास्तु का निदान करके -तो दूषित भूमि भी लाभदायक बन जाती है ।।
भवदीय पंडित कन्हैयालाल झा शास्त्री {ज्योतिष सेवा सदन }
      मेरठ उत्तर प्रदेश संपर्क सूत्र -9897701636 ,9358885616  








                    

सोमवार, 16 अप्रैल 2012

ज्योतिष सेवा सदन "झा शास्त्री " {मेरठ -उत्तर प्रदेश }

ज्योतिष सेवा सदन "झा शास्त्री " {मेरठ -उत्तर प्रदेश }
    इंटरनेट ज्योतिष सेवा रात्रि ८से ९ {निःशुल्क सेवा }
       संपर्क सूत्र -09897701636 ,09358885616  
              {एकबार अवश्य मिलेगी }

मंगलवार, 10 अप्रैल 2012

ज्योतिष सेवा सदन "झा शास्त्री "{1}: हमारे "नक्षत्र" और हमारे "पेड़ "?

ज्योतिष सेवा सदन "झा शास्त्री "{1}: हमारे "नक्षत्र" और हमारे "पेड़ "?: हमारे "नक्षत्र" और हमारे "पेड़ "? --ग्रहों की शांति हेतु  पूजा -पाठ ,यग्य हवं में विशेष प्रजाति के पल्लव {टहनी } पुष्प ,फूल ,फल ,काष्ट{स...

हमारे "नक्षत्र" और हमारे "पेड़ "?

हमारे "नक्षत्र" और हमारे "पेड़ "?
--ग्रहों की शांति हेतु  पूजा -पाठ ,यग्य हवं में विशेष प्रजाति के पल्लव {टहनी } पुष्प ,फूल ,फल ,काष्ट{समिधा }की आवश्यकता पड़ती है ,जो कि नवग्रह एवं नक्षत्रों से सम्बंधित पौधे ही दे सकते हैं ।पुराणों के अनुसार जिस नक्षत्र में गृह विद्यमान हो उस समय उस नक्षत्र सम्बन्धी पौधे का यत्नपूर्वक  संरक्षण तथा पूजन से ग्रह की शांति होती है तथा जातक को मनोवांछित फल मिलता है ।।
       क्यों न हमलोग --अपनी सुख समृधि के लिए - अपने -अपने नक्षत्रों के अनुसार पेड़ ,बगीचा ,बाटिका लगायें ?
नक्षत्र ---------------------पेड़  {१५}-स्वाती ------अर्जुन 
{१}-अश्विनी ------कुचिला          {१६}-विशाखा ---कटाई
 {2}-भरणी---------आंवला         {१७}-अनुराधा ---मौलश्री
{३}-कृतिका ----गूलर                  {१८}-ज्येष्ठा-----चीड़
 {४}-रोहिणी ---जामुन                 [१९}-मूल ----साल
{५}-मृगशिरा ---खैर                    {२०}-पूर्वाषाढा---जलवेतस
[६}-आर्द्रा--------शीशम                {२१}-उत्तराषाढा ----कटहल 
{७}-पुनर्वसु ------बांस                  {२२}-अभिजित{ xxx}
{८}-पुष्य --------पीपल                 {23}-श्रवण ---मदार
{९}-आश्लेषा ---नागकेसर                {२४}-शतभिषा ---कदम्ब
{१०}-मघा-----बरगद                     {२५}-पूर्वा भाद्रपद ----आम
{११}-पुर्वा फाल्गुनी-----ढ़ाक             {२६}-उत्तरा भाद्रपद ----नीम
{१२}-उत्तरी फाल्गुनी ----पाकड़          {२७}--रेवती -----महुआ
{१३}-हस्त ----रीठा
{14}-चित्रा------वेळ 
---नोट --उक्त नक्षत्रों के पौधे हैं जो आप --ग्रह जनित दोषों के निवारणार्थ  सरलता से पौधे {रोप }लगा सकते हैं ।  ग्रह ,नक्षत्रों के पौधों का उल्लेख ,पौराणिक ज्योतिष ,आयुर्वेदिक ,तांत्रिक व् एनी ग्रंथों में मिलता है --इनमें से प्रमुख ग्रन्थ हैं --{१}-नारद पुराण{२}-ज्योतिष ग्रन्थ हैं --नारद संहिता {३}-आयुवेदिक ग्रन्थ --राज निघंट वृहत धू श्रुत  नारायणी संहिता {४}-तांत्रिक ग्रन्थ -शारदा तिलक ,मन्त्रमहार्णव ,श्री विद्यार्नव तंत्र आदि {५} अन्य ग्रंथ---आनादाश्रम प्रकाशन ,वनस्पति ---अध्यात्म ,नक्षत्र वृक्ष आदि ।।
    भवदीय --ज्योतिष सेवा सदन {पंडित कन्हैयालाल झा शास्त्री }मेरठ उतर प्रदेश ।
           ज्योतिष सेवा रात्रि ८ से ९ सभी मित्रों के लिए ?
          संपर्क सूत्र -09897701636 ,09358885616  

शुक्रवार, 6 अप्रैल 2012

ज्योतिष सेवा सदन "झा शास्त्री "{1}: Have a nice day

ज्योतिष सेवा सदन "झा शास्त्री "{1}: Have a nice day: The best sentence by Swami-"Vivekanand"     "Take risks in your life"..              >If you win,You can lead.!       >If you loose,You ...

Have a nice day

The best sentence by Swami-"Vivekanand"
    "Take risks in your life"..
             >If you win,You can lead.!
      >If you loose,You can guide.!
  from-"jha shastri"free of coust-8to9pm oll friends{Once}
09897701636,09358885616   

बुधवार, 21 मार्च 2012

देश -विदेश-पाक्षिक ज्योतिष विचार -

ज्योतिष सेवा सदन "झा शास्त्री "{1}: "देश -विदेश-पाक्षिक ज्योतिष विचार -२३/०३/से०६/०४/२...

ज्योतिष सेवा सदन "झा शास्त्री "{1}: "देश -विदेश-पाक्षिक ज्योतिष विचार -२३/०३/से०६/०४/२...: "देश -विदेश-पाक्षिक ज्योतिष विचार -२३/०३/से०६/०४/२०१२तक ?"   "सुमिरि सारदा गजवदन,गुरु देवन शिर नाय ।     "वत्सर " विश्वावसु  का फल लिख ...

"देश -विदेश-पाक्षिक ज्योतिष विचार -२३/०३/से०६/०४/२०१२तक?"

"देश -विदेश-पाक्षिक ज्योतिष विचार -२३/०३/से०६/०४/२०१२तक ?"
 "सुमिरि सारदा गजवदन,गुरु देवन शिर नाय ।
    "वत्सर " विश्वावसु  का फल लिख दो हरषाय ।।
----श्री विष्णुबीसी - के १९ वें विश्वावसु संवत की शुरुआत कन्या लग्न से हो रही है । ज्योतिष्कारों - के विचार पर एक नज़र--- मारिदक्षिणदेशेस्यात,तथा बंगेप्युप्द्र्वह ।
                     लोक दुखं पश्चिमायाम विग्रहोंन समर्घ्ता ||
भाव --देश-विदेश - के दक्षिण भागों में मरी पड़े अर्थात बहुत ही मारा- मारी होगी । बंगाल एवं वृष राशि के स्थान में नित नए-नए  उपद्रव ,दंगे -फसाद  होते रहेंगें ।पश्चिम - में भारी राजविग्रह होगा तथा मंहगाई वृद्धि से हो हल्ला मचेगा । -------२३/१२/२०१२ तक वृश्चिक का राहु सर्वत्र अशांति बनाएगा । राजा -शुक्र -का केतु  से संयोग विरोधी धर्म सम्प्रदायों में आपसी कलह का कारण बनेगा । पश्चिमी सीमाओं पर चौकसी बरतनी चाहिए ।देश में घुसपैठ दुःख का कारण बनेगी ।।
-------तेजी -मंदी विचार -बुध का राशि संचार गति परिवर्तन के कारण भावों में उतार -चढाव होने के साथ -साथ अनिश्चितता बनी रहेगी ।
--------वक्र चाल चलते हुए,बुध मार्गी हो जाय।
            सभी वस्तु व्यापार की ,एकदम पलटा खाय ।।
------अतः व्यापार सोच समझकर करें । वस्त्र ,शेयर ,सर्राफा ,श्रींगारसामग्री ,मशीनरी एवं धातुओं में तेजी संभव है ।-------आकाश -लक्षण -पक्ष के अन्दर -कहीं स्वच्छ तो कहीं हलकी वर्षा होगी ।
-----स्वास्थ - सर्द -गर्म के कारण रोग उत्पन्न होंगें ।।
-----भवदीय -ज्योतिष सेवा सदन "झा शास्त्री "{मेरठ -उत्तर प्रदेश }
      पंडित कन्हैयालाल झा शास्त्री {ज्योतिष एवं कर्मकांड विशेषग्य }
       संपर्क सूत्र -09897701636 ,09358885616