"वास्तु दोष या चमक धमक "
परिवर्तन तो प्राकृतिक देन है | वो सबका होता रहता है ,किन्तु वास्तविकता ही बदल जाये ,तो कुछ आश्चर्य होता है | आइये अवलोकन करते हैं ,उन ग्रंथों का - कर्मकांड का प्रतिपादन सर्वप्रथम "शांडिल्य "नामक ऋषि ने किया ?भाव था - आने वाले समय में "द्विज" का भरण पोषण किस प्रकार से हो ? जिस भूमि पर हम निवास करते हैं ,वहाँ यदि किसी प्रकार के भवन का निर्माण करते हैं तो "भूमि दोष " लगता है ,अर्थात परिवार की प्रसन्नता के लिये हमें वास्तु का विचार करने चाहिए ,पर आज आबादी इतनी हो गयी है कि, आप चाहकर भी दोष मुक्त भूमि का चयन नहीं कर सकते हैं ,तो आपको वास्तु का निवारण करना चाहिए | -शास्त्रों का मत है कि "वास्तु" नाम का कोई असुर उत्पन्न हुआ ,वो इतना बलशाली था ,कि किसी भी देबता से पराजित नहीं हुआ ,अंत में "भगवान विष्णु " ने बरदान दिया ,कि किसी भी शुभ कार्ज़ में आपकी भी पूजा होगी ,और यदि भवन का निर्माण होगा तो "प्रधान देबता उस यग्य के आपही होंगें | अतः -वैदिक परम्परा में कोई भी संस्कार धार्मिक हो तो उसमें "नाग की पूजा अवश्य होती है | -मकान के निर्माण में यदि कोई दोष रह जाता है, और आज के युग में तो दोष ही दोष रहते हैं , तो इस पूजा से आप दोष से मुक्त हो जाते हैं -परन्तु आज हम भवन के निर्माण में अत्यधिक रुपयों का व्यय करते हैं ,पर जिससे हमारा कल्याण होगा, उसके प्रति विचार न कर ,हम भव्यता का अत्यधिक विचार करते हैं|
भाव -हमें मकान में ये दोष तो देखना ही चाहिए, केवल भव्यता से ही आप प्रसन्न नहीं रहेंगें ,प्रसन्नता के लिये इन बातों का भी समाधान करना चाहिए |
भवदीय -झा शास्त्री -मेरठ
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गुरुवार, 21 अक्टूबर 2010
"वास्तु दोष या चमक धमक "
प्रस्तुतकर्ता
ज्योतिष सेवा सदन { पंडित कन्हैयालाल झा शास्त्री "}{मेरठ }
पर
गुरुवार, अक्टूबर 21, 2010
लेबल:
jyotish seva sadan
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"वास्तु दोष या चमक धमक "
परिवर्तन तो प्राकृतिक देन है | वो सबका होता रहता है ,किन्तु वास्तविकता ही बदल जाये ,तो कुछ आश्चर्य होता है | आइये अवलोकन करते हैं ,उन ग्रंथों का - कर्मकांड का प्रतिपादन सर्वप्रथम "शांडिल्य "नामक ऋषि ने किया ?भाव था - आने वाले समय में "द्विज" का भरण पोषण किस प्रकार से हो ? जिस भूमि पर हम निवास करते हैं ,वहाँ यदि किसी प्रकार के भवन का निर्माण करते हैं तो "भूमि दोष " लगता है ,अर्थात परिवार की प्रसन्नता के लिये हमें वास्तु का विचार करने चाहिए ,पर आज आबादी इतनी हो गयी है कि, आप चाहकर भी दोष मुक्त भूमि का चयन नहीं कर सकते हैं ,तो आपको वास्तु का निवारण करना चाहिए | -शास्त्रों का मत है कि "वास्तु" नाम का कोई असुर उत्पन्न हुआ ,वो इतना बलशाली था ,कि किसी भी देबता से पराजित नहीं हुआ ,अंत में "भगवान विष्णु " ने बरदान दिया ,कि किसी भी शुभ कार्ज़ में आपकी भी पूजा होगी ,और यदि भवन का निर्माण होगा तो "प्रधान देबता उस यग्य के आपही होंगें | अतः -वैदिक परम्परा में कोई भी संस्कार धार्मिक हो तो उसमें "नाग की पूजा अवश्य होती है | -मकान के निर्माण में यदि कोई दोष रह जाता है, और आज के युग में तो दोष ही दोष रहते हैं , तो इस पूजा से आप दोष से मुक्त हो जाते हैं -परन्तु आज हम भवन के निर्माण में अत्यधिक रुपयों का व्यय करते हैं ,पर जिससे हमारा कल्याण होगा, उसके प्रति विचार न कर ,हम भव्यता का अत्यधिक विचार करते हैं|
भाव -हमें मकान में ये दोष तो देखना ही चाहिए, केवल भव्यता से ही आप प्रसन्न नहीं रहेंगें ,प्रसन्नता के लिये इन बातों का भी समाधान करना चाहिए |
भवदीय -झा शास्त्री -मेरठ
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